Regional NewsAyurveda & Traditional Systems

राजस्थान में बवासीर-भगंदर का ‘बिना ऑपरेशन’ इलाज: हनुमानगढ़ और करौली में निःशुल्क क्षारसूत्र शिविर शुरू

राजस्थान में बवासीर-भगंदर का ‘बिना ऑपरेशन’ इलाज: हनुमानगढ़ और करौली में निःशुल्क क्षारसूत्र शिविर शुरू | Ayushya Path

राजस्थान में बवासीर-भगंदर का ‘बिना ऑपरेशन’ इलाज: हनुमानगढ़ और करौली में निःशुल्क क्षारसूत्र शिविर शुरू, मरीजों की उमड़ी भीड़

गुदा रोगों (Anorectal diseases) से परेशान मरीजों के लिए राजस्थान सरकार एक बड़ी राहत लेकर आई है। राजस्थान आयुष विभाग और राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के संयुक्त तत्वावधान में राज्य भर में ‘निःशुल्क आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविरों’ का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बवासीर, भगंदर और फिशर जैसे जटिल रोगों का इलाज बिना किसी बड़े ऑपरेशन या चीर-फाड़ के ‘क्षारसूत्र पद्धति’ से किया जा रहा है .

हनुमानगढ़ में 10 दिवसीय शिविर जारी

हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित दुर्गा मंदिर धर्मशाला में 10 दिवसीय निःशुल्क क्षारसूत्र अंतरंग शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन चल रहा है।

  • तारीख: यह शिविर 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 7 जनवरी 2026 तक चलेगा।
  • विशेषता: शिविर का पोस्टर विमोचन जिला कलेक्टर द्वारा किया गया। यहाँ अनुभवी आयुष चिकित्सकों द्वारा मरीजों की निःशुल्क जांच, परामर्श और दवाएं दी जा रही हैं।
  • समय: प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक।

करौली और झुंझुनूं में भी मिली राहत

राज्य के अन्य जिलों में भी इन शिविरों को व्यापक सफलता मिली है:

  • करौली (सपोटरा): यहाँ मेड़तवाल वैश्य समाज भवन में 22 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक शिविर आयोजित किया गया। यहाँ क्षारसूत्र के अलावा पंचकर्म, अग्निकर्म और रक्तमोक्षण जैसी थैरेपी भी निःशुल्क प्रदान की गईं।
  • झुंझुनूं: मलसीसर रोड स्थित नौरंगराम दयानन्द ढूकिया शिक्षण संस्थान में 15 से 24 दिसंबर 2025 तक विशाल शिविर लगाया गया, जिसमें ग्रामीण मरीजों को प्राथमिकता दी गई।

इसके अलावा, बालोतरा (जसोल CHC), बागरा और रामशाला जैसे स्थानों पर भी इसी तरह के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं .

क्या है क्षारसूत्र विधि?

आयुर्वेद की यह प्राचीन तकनीक एक मेडिकेटेड धागे (क्षारीय सूत्र) का उपयोग करती है। यह संक्रमण-मुक्त है और पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें रिकवरी बहुत तेजी से होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें रोग के दोबारा होने (Recurrence) की संभावना न के बराबर होती है।

आयुष विभाग ने अपील की है कि जरूरतमंद रोगी इन शिविरों में पहुंचकर पूर्व रजिस्ट्रेशन कराएं और सरकार की इस ‘सेवा और समर्पण’ पहल का लाभ उठाएं .

(स्रोत: दैनिक भास्कर, हनुमानगढ़ डीएम फेसबुक पेज, और स्थानीय समाचार रिपोर्ट्स – दिसंबर 2025)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *