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प्राकृतिक कृषि: GNFSU हालोल में आचार्य देवव्रत का जन-आंदोलन का आह्वान | Ayushya Path

हालोल GNFSU में प्राकृतिक कृषि और किसान उत्पादक संगठन पर सार्थक परिसंवाद | आयुष्य पथ
पंचमहाल, गुजरात (20 मई 2026) | श्रेणी: कृषि एवं जन-स्वास्थ्य

हालोल में गुजरात नेचुरल फार्मिंग साइंस यूनिवर्सिटी (GNFSU) में प्राकृतिक कृषि और किसान उत्पादक संगठन पर सार्थक परिसंवाद: आचार्य देवव्रत का रसायन-मुक्त खेती को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान

गुजरात नेचुरल फार्मिंग साइंस यूनिवर्सिटी हालोल में प्राकृतिक कृषि परिसंवाद

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हालोल स्थित गुजरात नेचुरल Farming साइंस यूनिवर्सिटी (GNFSU) में “प्राकृतिक कृषि और किसान उत्पादक संगठन” विषय पर आयोजित महत्वपूर्ण परिसंवाद में भाग लिया। यह कार्यक्रम प्राकृतिक खेती को मुख्यधारा में लाने, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करने और राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य बातें और राज्यपाल का संबोधन

आचार्य देवव्रत ने परिसंवाद को संबोधित करते हुए कहा, “विकसित और निरोगी भारत के निर्माण के लिए हमारे किसान और कृषि वैज्ञानिक मिलकर कार्य करें।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन घटने का भय पूरी तरह भ्रामक है। यह जीरो बजट खेती है, जो भूमि की उर्वरता बढ़ाती है, लागत कम करती है और किसानों को समृद्धि का नया मार्ग दिखाती है।

“यूरिया-डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की जीवंतता नष्ट हो रही है। मिट्टी को पुनर्जीवित करने के लिए प्राकृतिक कृषि की ओर लौटना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी अनिवार्यता है।”
– आचार्य देवव्रत, माननीय राज्यपाल, गुजरात

देसी गौमाता को भारतीय कृषि का वरदान बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेतों को रसायन-मुक्त और मिट्टी को जीवंत बनाता है। रसायनों से दूषित भोजन और जल आने वाली पीढ़ियों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे में डाल रहा है। जो किसान इस क्रांति के सारथी बनेंगे, वे न केवल खुद खुशहाल होंगे बल्कि पूरे राष्ट्र को स्वस्थ बनाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को जन-आंदोलन बनाने के लिए सभी कृषि वैज्ञानिकों, किसानों और युवाओं से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

डिग्री प्रदान और मॉडल फार्म का निरीक्षण

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जो एक अत्यंत सुखद और गौरवशाली क्षण रहा। इससे पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के प्राकृतिक कृषि मॉडल फार्म का सघन निरीक्षण किया। यहाँ रसायनों के बिना उगाई गई लहलहाती फसलें, शुद्ध वातावरण और तैयार प्राकृतिक उत्पादों को देखकर उन्होंने गहरा संतोष व्यक्त किया।

निरीक्षण के दौरान रेखांकित मुख्य बिंदु:

  • रसायन-रहित खेती न केवल पूरी तरह संभव है, बल्कि यह पारंपरिक रासायनिक खेती से अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी है।
  • प्राकृतिक उत्पाद पोषण से भरपूर और पूरी तरह से जहर-मुक्त होते हैं, जो जन-स्वास्थ्य के लिए अमृत समान हैं।
  • प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर ही मानव जाति सच्ची और दीर्घकालिक समृद्धि प्राप्त कर सकती है।

गुजरात नेचुरल फार्मिंग साइंस यूनिवर्सिटी (GNFSU) के बारे में

GNFSU भारत की पहली और दुनिया की एकमात्र प्राकृतिक खेती को समर्पित अनूठी यूनिवर्सिटी है, जिसकी स्थापना 2017 में गुजरात सरकार द्वारा की गई थी। यह पंचमहाल जिले के हालोल (जंबूदी फार्म) में स्थित है। यहाँ M.Sc. (Natural Farming) और M.Sc. (Organic Farming) जैसे अत्याधुनिक एवं प्रामाणिक पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यह विश्वविद्यालय निरंतर अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को वैश्विक पटल पर बढ़ावा दे रहा है।

प्राकृतिक खेती के मुख्य लाभ (SEO Highlights)

जीरो बजट फार्मिंग: महंगे बाहरी उर्वरक और हानिकारक कीटनाशक खरीदने की कोई जरूरत नहीं पड़ती, जिससे खेती की लागत न्यूनतम हो जाती है।
मिट्टी का उत्कृष्ट स्वास्थ्य: केंचुए और मित्र सूक्ष्म जीवों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे भूमि की प्राकृतिक उर्वरता हमेशा बनी रहती है।
स्वास्थ्यवर्धक एवं पोषक भोजन: केमिकल-फ्री और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर अनाज, फल और सब्जियां समाज को निरोगी बनाती हैं।
पर्यावरण और जल संरक्षण: रासायनिक बहाव न होने से जल और मिट्टी का प्रदूषण रुकता है, जिससे यह विधि पूरी तरह जलवायु अनुकूल (Climate-friendly) बनती है।
किसानों की आय में वृद्धि: उत्पादन लागत घटने और शुद्ध प्राकृतिक उत्पादों की बाजार में बेहतर कीमत मिलने से किसानों का शुद्ध मुनाफा बढ़ता है।

राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन से जुड़ें!

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देशभर में प्राकृतिक खेती को सर्वोच्च प्रोत्साहन मिल रहा है। गुजरात इस पावन क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।

‘आयुष्य पथ’ देश के सभी किसान भाइयों, युवाओं और कृषि वैज्ञानिकों से अपील करता है: आज ही प्राकृतिक खेती को अपनाएं, अपने क्षेत्रों में किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाएं और मिट्टी व स्वास्थ्य की इस राष्ट्रीय क्रांति का हिस्सा बनें।

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