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किसिंग और स्वास्थ्य: क्या चुंबन से सच में गंभीर बीमारियां होती हैं? वायरल खबर का सच | आयुष्य पथ

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किसिंग और स्वास्थ्य: मीडिया में वायरल हो रही डरावनी खबरों की असली सच्चाई

हाल ही में कई भारतीय मीडिया पोर्टल्स (जैसे आज तक, पत्रिका, न्यूज18) पर ‘किसिंग’ (चुंबन) से जुड़ी कुछ चेतावनी भरी खबरें वायरल हुई हैं। इन खबरों में दावा किया गया है कि किस करने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं और इससे बचने के लिए किस करने से पहले पानी पीना चाहिए।

वास्तविकता यह है कि मीडिया ने दो बिल्कुल अलग-अलग मेडिकल रिसर्च को आपस में मिला दिया है, जिससे यह खबर अनावश्यक रूप से सनसनीखेज (sensationalized) बन गई है। आइए इन दोनों अध्ययनों के वैज्ञानिक तथ्यों को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से समझते हैं:

1. ग्लूटेन ट्रांसफर और सीलिएक डिजीज (Celiac Disease) का सच

यह अध्ययन 2025 में Digestive Disease Week (DDW) में कोलंबिया यूनिवर्सिटी (लीड: Anne Lee) द्वारा प्रस्तुत किया गया था। यह रिसर्च मुख्य रूप से उन कपल्स पर की गई थी जिनमें से एक पार्टनर को सीलिएक डिजीज (Gluten से एलर्जी) है और दूसरे को नहीं।

रिसर्च कैसे हुई?

  • गैर-सीलिएक पार्टनर ने ग्लूटेन युक्त क्रैकर्स खाए।
  • पहली स्थिति: 5 मिनट रुककर डीप किस (कम से कम 10 सेकंड) किया गया।
  • दूसरी स्थिति: क्रैकर्स खाने के तुरंत बाद लगभग आधा गिलास (4 औंस) पानी पीकर किस किया गया।

निष्कर्ष (राहत की खबर):

  • बिना पानी पिए किस करने पर भी 90% मामलों में ग्लूटेन का स्तर 20 ppm से नीचे रहा (जो कि FDA के अनुसार सुरक्षित ग्लूटेन-फ्री सीमा है)।
  • पानी पीने के बाद किस करने पर खतरा लगभग शून्य हो गया। 60% सैंपल्स में ग्लूटेन बिल्कुल भी डिटेक्ट नहीं हुआ।
  • किसी भी सीलिएक मरीज को किस के बाद बीमारी के लक्षण नहीं दिखे।
वैज्ञानिक सलाह: सीलिएक डिजीज वाले लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। यदि आपके पार्टनर ने ग्लूटेन खाया है, तो किस करने से पहले उनका पानी पी लेना एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय है।

2. एपस्टीन-बार वायरस (EBV) और मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) की चेतावनी

यह एक बिल्कुल अलग और पुरानी रिसर्च है, जिसे मीडिया ने ग्लूटेन वाली रिसर्च के साथ जोड़ दिया है। एपस्टीन-बार वायरस (EBV) को अक्सर “किसिंग डिजीज” (Infectious Mononucleosis) भी कहा जाता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से लार (Saliva) के माध्यम से फैलता है।

मुख्य तथ्य:

  • EBV दुनिया के सबसे आम वायरसों में से एक है। ज्यादातर लोग बचपन या युवावस्था में ही इसके संपर्क में आ जाते हैं।
  • हार्वर्ड और मेयो क्लिनिक जैसे संस्थानों की हालिया स्टडीज बताती हैं कि जिन लोगों को कभी गंभीर EBV इन्फेक्शन (मोनो) हुआ है, उनमें भविष्य में मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) नामक ऑटोइम्यून बीमारी होने का खतरा 2-3 गुना ज्यादा हो सकता है।
  • चूंकि यह लार से फैलता है, इसलिए किसिंग या जूठे बर्तन शेयर करने से इसका ट्रांसमिशन हो सकता है।
वैज्ञानिक सलाह: हर किस से MS नहीं होता। ज्यादातर लोगों में EBV के लक्षण बहुत हल्के होते हैं। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को एक्टिव ‘मोनो’ इन्फेक्शन (तेज बुखार, गले में खराश, भारी थकान) है, तो उनके साथ क्लोज कांटेक्ट (किसिंग) से बचें। (ध्यान दें: पानी पीने से EBV वायरस के ट्रांसफर पर कोई असर नहीं पड़ता, यह सलाह सिर्फ ग्लूटेन के लिए थी।)

निष्कर्ष: डरें नहीं, जागरूक रहें

मीडिया रिपोर्ट्स ने इन दोनों अलग-अलग बातों को मिलाकर “किस करने से पहले पानी पियो वरना गंभीर बीमारी होगी” जैसी भ्रामक हेडलाइन बना दी। वास्तविकता यह है कि:

  • ग्लूटेन का रिस्क बहुत कम है, और पानी पीने से यह और भी कम हो जाता है।
  • EBV-MS का कनेक्शन एक स्थापित तथ्य है, लेकिन यह कोई नई या तुरंत होने वाली महामारी नहीं है।

प्रैक्टिकल सलाह यही है कि रोमांस का आनंद लें, लेकिन स्वच्छता और पार्टनर के स्वास्थ्य इतिहास (सीलिएक या एक्टिव इन्फेक्शन) के प्रति थोड़ी जागरूकता बनाए रखें।

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