शंखप्रक्षालन: डायबिटीज और बीपी का ‘प्राकृतिक डायलिसिस’ — पेट की सफाई का पूरा विज्ञान और विधि
शंखप्रक्षालन: मानव शरीर की बायो-केमिकल ओवरहॉलिंग
(एक वैज्ञानिक विश्लेषण)
लेखक: आचार्य डॉ. जयप्रकाशानन्द (संस्थापक: आयुष्य मन्दिरम्, रेवाड़ी)
प्रस्तावना: शरीर, विज्ञान और शुद्धि
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानता है कि मानव शरीर एक मशीन है, और समय के साथ इसके अंगों का खराब होना स्वाभाविक है। लेकिन भारतीय योग विज्ञान, विशेषकर हठयोग, का मत इससे भिन्न है। हठयोग के अनुसार, शरीर खराब नहीं होता, बल्कि उसमें ‘विजातीय द्रव्य’ (Foreign Matter) या टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं, जो प्राण शक्ति के प्रवाह को रोकते हैं।
शंखप्रक्षालन (Shankhaprakshalana), जिसे ‘वारिसार धौति’ भी कहा जाता है, केवल पेट साफ़ करने की विधि नहीं है। यह विश्व की एकमात्र ऐसी प्रक्रिया है जो बिना किसी सर्जरी या मशीन के, मनुष्य के पूरे पाचन तंत्र (Gastrointestinal Tract) की 30 फीट लंबी नली को पूरी तरह से धोकर नया कर देती है।
1. विजातीय द्रव्य और रोग का मूल कारण
मेरी PhD थीसिस और प्राकृतिक चिकित्सा का मूल सिद्धांत है: “रोग एक, कारण एक, निवारण एक।”
वह एक कारण है—शरीर में बिना पचे हुए भोजन और मेटाबॉलिक वेस्ट का सड़ना। हमारी आंतों की भीतरी दीवारों पर विली (Villi) होती हैं, जिनका काम भोजन से पोषक तत्व सोखना है। वर्षों तक गलत खान-पान (मैदा, चीनी, प्रोसेस्ड फूड) के कारण, इन दीवारों पर ‘म्यूकस’ और पुराने मल की एक कठोर परत जम जाती है। यह परत कुपोषण और ऑटो-इन्टोक्सिकेशन (Auto-intoxication) का कारण बनती है, जिससे सोरायसिस, आर्थराइटिस और डायबिटीज जैसे रोग उत्पन्न होते हैं।
2. शंखप्रक्षालन का शरीर-क्रिया विज्ञान (Physiology)
शंखप्रक्षालन कैसे काम करता है, इसे समझना किसी मेडिकल चमत्कार से कम नहीं है। यह प्रक्रिया गुरुत्वाकर्षण, यांत्रिकी और रसायन विज्ञान का अद्भुत संगम है।
(A) खारा पानी ही क्यों? (The Osmotic Principle)
अक्सर लोग पूछते हैं कि हम सादा पानी क्यों नहीं पी सकते? यदि आप सादा पानी पिएंगे, तो वह आंतों द्वारा सोख लिया जाएगा और किडनी के माध्यम से पेशाब बनकर निकल जाएगा। शंखप्रक्षालन में हम पानी को आइसोटोनिक (Isotonic) बनाते हैं—यानी पानी में नमक की मात्रा (0.9%) हमारे रक्त प्लाज्मा के बराबर होती है।
- परिणाम: शरीर इस पानी को न तो सोखता है और न ही छोड़ता है। यह पानी एक ‘झाड़ू’ की तरह मुंह से गुदा तक बिना रुके बहता है।
- रक्त का डायलिसिस: चूंकि यह घोल शरीर में नहीं रमता, यह ‘ऑस्मोसिस’ के विपरीत सिद्धांत पर काम करता है। यह आंतों की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Capillaries) से गंदे खून के टॉक्सिन्स को खींचकर आंत में ले आता है और बाहर निकाल देता है। इसे हम “प्राकृतिक डायलिसिस” कह सकते हैं।
(B) वाल्व और स्फिंक्टर का खुलना (The Valve Mechanism)
शंखप्रक्षालन के 5 विशेष आसन पाचन तंत्र के द्वारों (Valves) को चाबी की तरह खोलते हैं:
- पाइलोरिक स्फिंक्टर: ‘ताड़ासन’ और ‘तिर्यक ताड़ासन’ से यह खुलता है, जिससे पानी पेट से छोटी आंत में जाता है।
- इलिओसिकल वाल्व: ‘कटिचक्रासन’ और ‘तिर्यक भुजंगासन’ पानी को बड़ी आंत (Colon) में धकेलते हैं।
- सिग्मोइड कोलन: ‘उदराकर्षणासन’ मलाशय पर दबाव डालता है, जिससे मल निष्कासन होता है।
3. प्रक्रिया की वैज्ञानिक विधि
चेतावनी: यह क्रिया किसी योग्य योग शिक्षक के मार्गदर्शन में ही करें।
- तैयारी: सुबह खाली पेट, गुनगुना पानी (37°C-40°C) + सेंधा नमक (2 चम्मच प्रति लीटर)।
- संचालन: 2 गिलास पानी पिएं और तुरंत 5 आसनों का सेट (ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटिचक्रासन, तिर्यक भुजंगासन, उदराकर्षणासन) 8-8 बार करें।
- चक्र: इस चक्र (पानी + आसन) को तब तक दोहराएं जब तक गुदा से निकलने वाला पानी लगभग साफ न हो जाए (आमतौर पर 16-20 गिलास)।
- समापन: अंत में कुंजल क्रिया (Vaman) और जल नेति अनिवार्य है ताकि वाल्व बंद हो जाएं।
4. आहार विज्ञान: खिचड़ी का रहस्य
प्रक्रिया के 45 मिनट बाद विशेष खिचड़ी (मूंग दाल + चावल + घी) खानी होती है। घी आंतों की नंगी दीवारों पर एक नई, चिकनी सुरक्षात्मक परत (Lubrication) बनाता है। अगले 24 घंटों तक दूध, दही, फल, कच्ची सब्जियां और रासायनिक पदार्थ वर्जित हैं।
5. नैदानिक लाभ (Clinical Benefits)
आयुष्य मन्दिरम् के अनुभव और शोध निम्नलिखित लाभों की पुष्टि करते हैं:
- मधुमेह (Diabetes Type-2): पैंक्रियास का पुनर्जीवन और इंसुलिन प्रतिरोध में कमी।
- उच्च रक्तचाप: रक्त शुद्धि और विश्राम तंत्र (Parasympathetic nervous system) की सक्रियता।
- मानसिक स्वास्थ्य: आंतों में सेरोटोनिन का उत्पादन सुधरता है, जिससे डिप्रेशन और सुस्ती दूर होती है।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या शंखप्रक्षालन से वजन कम होता है?
हाँ, एक ही सत्र में 2-4 किलो वजन कम हो सकता है। यह वजन मुख्य रूप से पुराने मल, टॉक्सिन्स और जल प्रतिधारण (Water weight) का होता है।
Q2. क्या मैं इसे YouTube वीडियो देखकर घर पर कर सकता हूँ?
बिल्कुल नहीं। यह एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है। गलत तरीके से करने पर चक्कर, उल्टी या सिरदर्द हो सकता है। इसे पहली बार विशेषज्ञ के सामने ही करें।
Q3. पानी नमकीन होता है, तो क्या इससे बी.पी. नहीं बढ़ जाएगा?
यह तार्किक प्रश्न है। इसका उत्तर ‘आइसोटोनिसिटी’ है। चूंकि पानी में नमक की मात्रा (0.9%) खून के बराबर होती है, शरीर इस पानी को सोखता ही नहीं है। यह पानी किडनी तक पहुँचता ही नहीं, बल्कि सीधे मल मार्ग से निकल जाता है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति में बीपी बढ़ने का खतरा नहीं रहता।
Q4. क्या बच्चे शंखप्रक्षालन कर सकते हैं?
8 वर्ष से कम के बच्चों के लिए यह वर्जित है। 8-12 वर्ष के बच्चे ‘लघु शंखप्रक्षालन’ (6 गिलास पानी) कर सकते हैं। पूर्ण प्रक्रिया 12+ उम्र के लिए उपयुक्त है।
Q5. हर्निया या बवासीर (Piles) रोगियों के लिए यह कैसा है?
हर्निया: बिल्कुल नहीं करें, दबाव से समस्या बढ़ेगी।
बवासीर: कब्ज इसका मूल कारण है, इसलिए यह फायदेमंद है। लेकिन अगर खून आ रहा हो (Bleeding) तो न करें।
Q6. हृदय या मिर्गी रोगियों के बारे में आपकी क्या राय है?
इन दोनों स्थितियों में ‘पूर्ण शंखप्रक्षालन’ सख्ती से मना (Contraindicated) है। यह हृदय पर लोड डाल सकता है और मिर्गी का दौरा ट्रिगर कर सकता है।
Q7. क्या अल्सर के रोगियों को यह करना चाहिए?
नहीं। नमक का पानी अल्सर (आंतों के घाव) में भयानक जलन पैदा करेगा। अल्सर ठीक होने के बाद ही इसे करें।
Q8. गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आपकी क्या राय है?
गर्भावस्था में यह पूरी तरह निषिद्ध है। प्रसव के 6 महीने बाद इसे किया जा सकता है। बच्चों के लिए (देखें प्रश्न 4)।
Q9. क्या क्रिया के बाद दूध, दही, खट्टे फल आदि खा सकते हैं?
अगले 24 घंटों तक ये सब जहर समान हैं। आंतें बहुत कोमल होती हैं; खट्टा, तीखा या भारी भोजन उन्हें नुकसान पहुँचाएगा। केवल खिचड़ी और घी खाएं।
Q10. क्या क्रिया के बाद स्नान कर सकते हैं?
तुरंत नहीं। क्रिया से शरीर में बहुत गर्मी (Metabolic Heat) पैदा होती है। कम से कम 3-4 घंटे रुककर, खिचड़ी खाने के बाद ही गुनगुने पानी से नहाएं।
7. संदर्भ सूची (References)
- घेरंड संहिता (Gheranda Samhita): शंखप्रक्षालन (वरिसार धौति) का प्राचीन वर्णन।
https://archive.org/details/gheranda-samhita - हठयोग प्रदीपिका (Hatha Yoga Pradipika): षट्कर्मों में वरिसार धौति का उल्लेख।
View Archive - Safety and usefulness of Laghu shankha prakshalana in patients with essential hypertension (2014):
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4296435/ - Effectiveness and safety of Shankhaprakshalana in bowel preparation for colonoscopy (2024):
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/38112914/ - A review on the physiological and therapeutic effects of Śankhaprakṣhālana kriyā (2022):
ResearchGate Link - Asana Pranayama Mudra Bandha (Bihar School of Yoga):
https://www.biharyoga.net/publications/asana-pranayama-mudra-bandha/ - Shankhaprakshalana Guide (Fitsri Yoga):
https://www.fitsri.com/yoga/shankhaprakshalana - Auto-intoxication theory (Scientific Review):
https://en.wikipedia.org/wiki/Colon_cleansing - Contraindications of Shankhaprakshalana:
https://www.forceful-tranquility.com/how-to-do-shankhaprakshalana-complete-guide/ - Bihar School of Yoga Resources:
https://www.yogamag.net/archives/

