विश्व कैंसर दिवस 2026: AIIA ने पेश किया ‘इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी’ मॉडल | Ayushya Path News

कैंसर पर ‘विजय’ का नया मंत्र: AIIA ने विश्व कैंसर दिवस पर पेश किया ‘इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी’ मॉडल, छात्रों ने लिया संकल्प
कैंसर अब लाइलाज नहीं है, और अगर आयुर्वेद का साथ मिल जाए, तो यह लड़ाई और भी आसान हो सकती है। इसी संदेश के साथ, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (AIIA), नई दिल्ली ने विश्व कैंसर दिवस 2026 (4 फरवरी) के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता और शैक्षणिक महाकुंभ का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी’ (Integrative Oncology) रहा—यानी कैंसर के इलाज में एलोपैथी की आधुनिक तकनीकों के साथ आयुर्वेद की प्राचीन शक्ति का मेल। कार्यक्रम का संचालन AIIA के सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी (CIO) द्वारा किया गया, जो कैंसर केयर में एक नई क्रांति ला रहा है।
जागरूकता ही बचाव: स्लोगन और निबंध प्रतियोगिता
संस्थान को कैंसर मुक्त भारत की दिशा में सक्रिय करने के लिए छात्रों और स्टाफ के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। छात्रों ने अपनी रचनात्मकता से यह संदेश दिया कि डरने की नहीं, लड़ने की जरूरत है।
- “शुरुआती जांच से कैंसर हारेगा, आयुर्वेद से जीवन बचेगा”
- “आयुर्वेद + आधुनिक चिकित्सा = कैंसर पर विजय”
- “जागरूकता है पहला कदम, कैंसर से मुक्ति का रास्ता”
निबंध लेखन प्रतियोगिता में छात्रों ने “कैंसर रोकथाम में आयुर्वेद की भूमिका” विषय पर गहन शोध प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि कैसे रसायन चिकित्सा और रक्तशोधक जड़ी-बूटियां कैंसर सेल्स को पनपने से रोक सकती हैं।
खतरे की घंटी: महिलाओं के कैंसर पर विशेष फोकस
जागरूकता सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री (NCRP) के ताजा आंकड़ों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत में महिलाओं में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है:
- स्तन कैंसर: 2.4 लाख नए मामले।
- गर्भाशय ग्रीवा (Cervix): 79,000+ मामले।
- अंडाशय (Ovary): 49,500+ मामले।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि त्रिफला, अश्वगंधा, कंचनार गुग्गुलु, हल्दी और नीम जैसी औषधियाँ न केवल इम्यूनिटी बढ़ाती हैं, बल्कि कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।
विशेषज्ञों की राय: ‘एक नई उम्मीद’
कार्यक्रम में इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी के महत्व पर गहन चर्चा हुई।
“आयुर्वेद केवल बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि रोगी का इलाज करता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन के दौरान होने वाले दुष्प्रभावों (Side Effects) को कम करने और रिकवरी को तेज करने में आयुर्वेद की भूमिका गेम-चेंजर साबित हो रही है। हमारा CIO केंद्र इसी दिशा में काम कर रहा है।”
— डॉ. रामावतार शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, AIIA
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉ. सी.एस. प्रभु ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इंटीग्रेटिव अप्रोच से मरीजों की ‘क्वालिटी ऑफ लाइफ’ में सुधार होता है। वहीं, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संदेश दिया कि बजट 2026 में आयुष को मिले बढ़ावा के बाद ऐसे कार्यक्रम कैंसर केयर को मुख्यधारा में लाने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
निष्कर्ष
AIIA का यह आयोजन केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि एक शुरुआत है। यह बताता है कि भविष्य की चिकित्सा पद्धति ‘एकाकी’ नहीं, बल्कि ‘समग्र’ (Holistic) होगी। जब आधुनिक डायग्नोसिस और आयुर्वेदिक उपचार मिल जाएंगे, तो कैंसर जैसा शब्द भी डरावना नहीं लगेगा।
रिपोर्ट: आयुष्य पथ हेल्थ डेस्क | स्रोत: AIIA आधिकारिक अपडेट्स/DD News

