Top NewsCCRYN

झज्जर में CCRYN की नेशनल कॉन्फ्रेंस: योग और नेचुरोपैथी से ‘मोटापा मुक्त भारत’ का संकल्प

CCRYN National Conference on Naturopathy 2026 Jhajjar
National Conference on Naturopathy 2026 CCRYN Jhajjar

‘मोटापा मुक्त भारत’ का रोडमैप तैयार: झज्जर में CCRYN की नेशनल कॉन्फ्रेंस में गूंजा ‘योग और नेचुरोपैथी’ का मंत्र

आधुनिक जीवनशैली से उपजी बीमारियों (NCDs) के खिलाफ भारत ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्य हथियार बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, आयुष मंत्रालय के तहत शीर्ष अनुसंधान संस्था सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड नेचुरोपैथी (CCRYN) ने हरियाणा के झज्जर में दो दिवसीय ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन नेचुरोपैथी 2026’ का सफल आयोजन किया।

5 और 6 फरवरी को सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर योग एंड नेचुरोपैथी (CRIYN), झज्जर के परिसर में आयोजित इस महाकुंभ की थीम “योगा एंड नेचुरोपैथी फॉर अ फिटर एंड हेल्दियर यू” (एक स्वस्थ और फिट आपके लिए योग और प्राकृतिक चिकित्सा) रखी गई थी। सम्मेलन का मुख्य फोकस मोटापे की महामारी को रोकना और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देना था।

उद्घाटन सत्र: “वैकल्पिक नहीं, मुख्यधारा है नेचुरोपैथी”

सम्मेलन का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि योग और नेचुरोपैथी को केवल ‘वैकल्पिक चिकित्सा’ न मानकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की ‘मुख्यधारा’ में लाया जाए।

“डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) से निपटने में योग और नेचुरोपैथी 70-80% तक प्रभावी साबित हो रहे हैं। CCRYN इस दिशा में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान (Evidence-based research) को मजबूत कर रहा है।”
— संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय

सबसे बड़ी चुनौती पर प्रहार: मोटापा रोकथाम

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में मोटापे (Obesity) पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, जो कई बीमारियों की जड़ है। विशेषज्ञों ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए कि लगभग 70% भारतीय मोटापे के उच्च जोखिम क्षेत्र में हैं।

विशेषज्ञों का समाधान:
  • योगिक क्रियाएं: सूर्य नमस्कार, ताड़ासन और भुजंगासन के साथ कपालभाति और अनुलोम-विलोम प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करना।
  • नेचुरोपैथी डाइट: उपवास (Fasting) और जूस थेरेपी का वैज्ञानिक प्रयोग।
  • परिणाम: विशेषज्ञों ने दावा किया कि सही मार्गदर्शन में योग और नेचुरोपैथी अपनाने से 6 से 12 महीनों में प्राकृतिक रूप से 10-15% वजन कम किया जा सकता है।

आहार और जीवनशैली: ‘प्रकृति की ओर लौटो’

सम्मेलन में संतुलित आहार को स्वास्थ्य का आधार बताया गया। नेचुरोपैथी विशेषज्ञों ने ‘रॉ फूड’ (कच्चा आहार), मौसमी फल-सब्जियों और अंकुरित अनाज (Sprouts) पर जोर दिया। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से वात-पित्त-कफ संतुलन और ‘माइंडफुल ईटिंग’ (ध्यानपूर्वक भोजन करना) पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

तनाव प्रबंधन के लिए दवाओं के बजाय योग निद्रा, ध्यान, मड थेरेपी (मिट्टी चिकित्सा) और हाइड्रोथेरेपी (जल चिकित्सा) को अपनाने की सलाह दी गई। साथ ही, मानसिक शांति के लिए ‘डिजिटल डिटॉक्स’ की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

विज्ञान और शोध का संगम

यह सम्मेलन केवल भाषणों तक सीमित नहीं था। CRIYN के वैज्ञानिकों ने योग और नेचुरोपैथी पर चल रहे अपने क्लिनिकल ट्रायल्स के उत्साहजनक परिणाम साझा किए। वहीं, देश भर से आए छात्रों और युवा शोधकर्ताओं ने पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से नई संभावनाओं को प्रदर्शित किया।

निष्कर्ष

झज्जर में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि बजट 2026-27 में आयुष क्षेत्र को मिली 10% की बढ़ोतरी का उपयोग जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में किया जा रहा है। CCRYN का यह प्रयास ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में मील का पत्थर साबित होगा।

Tags: #NaturopathyConference2026 #CCRYNJhajjar #YogaForHealth #ObesitySolution #AyushMinistry #HolisticHealth #AyushyaPath

स्रोत: CCRYN/PIB विज्ञप्ति | संपादक: आयुष्य पथ डेस्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *