फेफड़ों का सुरक्षा कवच’: प्रदूषण के ‘जहरीले धुएं’ से कैसे बचें? आयुष मंत्रालय ने 8 जनवरी को जारी की नई सलाह
‘फेफड़ों का सुरक्षा कवच’: प्रदूषण के ‘जहरीले धुएं’ से कैसे बचें? आयुष मंत्रालय ने 8 जनवरी को जारी की नई सलाह
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (08 जनवरी 2026)सर्दियों के इस मौसम में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है। इस बीच, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आज (8 जनवरी 2026) एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सलाह जारी की है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे श्वसन तंत्र (Respiratory System) के लिए एक ‘गंभीर खतरा’ बन चुका है।
“बाहरी स्मॉग (Smog) और घरेलू धुआं—दोनों ही फेफड़ों को धीरे-धीरे और लंबे समय तक नुकसान पहुंचाते हैं। डीजल एग्जॉस्ट और प्रदूषित हवा हमारे वायुमार्ग (Airways) में जलन और सूजन पैदा कर रही है।”
दोहरी मार: घर और बाहर दोनों जगह खतरा
मंत्रालय ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है कि खतरा सिर्फ घर के बाहर नहीं है।
- आउटडोर पॉल्यूशन: वाहनों से निकलने वाला डीजल एग्जॉस्ट और औद्योगिक धुआं।
- इनडोर पॉल्यूशन: घर के अंदर का धुआं (कुकिंग, अगरबत्ती आदि) और खराब वेंटिलेशन।
मंत्रालय का समाधान: ‘सक्रिय दृष्टिकोण’ (Proactive Approach)
आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है कि हमें पर्यावरण जागरूकता के साथ-साथ अपनी जीवनशैली में आयुष की प्रमाणित प्रथाओं को जोड़ना होगा। इसके लिए दो प्रमुख उपाय सुझाए गए हैं:
1. उचित वेंटिलेशन (Proper Ventilation)
बंद घरों में प्रदूषक तत्व जमा हो जाते हैं। मंत्रालय के अनुसार, घर में हवा की आवाजाही (Cross Ventilation) सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह घर के अंदर मौजूद जहरीले कणों की सांद्रता (Concentration) को कम करता है और ताजी हवा का संचार करता है।
2. प्राणायाम: आंतरिक मजबूती का आधार
प्रदूषण से लड़ने के लिए मास्क बाहरी सुरक्षा है, लेकिन प्राणायाम आंतरिक सुरक्षा कवच है।
- फेफड़ों की सूजन से बचाव: नियमित प्राणायाम श्वसन नली की सूजन (Inflammation) को कम करता है।
- श्वसन क्षमता: यह फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता (Lung Capacity) को बनाए रखता है, जो सर्दियों में स्मॉग के कारण घट जाती है।
मंत्रालय का यह संदेश स्पष्ट है—प्रदूषण को हम पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर हम इसके प्रभाव को कम जरूर कर सकते हैं।
(मूल स्रोत: आयुष मंत्रालय आधिकारिक X पोस्ट (@moayush), दिनांक 8 जनवरी 2026, पोस्ट ID: 2009235316440527298)

