15 साल बेमिसाल: भारत ने जीता पोलियो से ‘महायुद्ध’, आज ही के दिन मिला था वाइल्ड पोलियो का आखिरी मरीज
15 साल बेमिसाल: भारत ने जीता पोलियो से ‘महायुद्ध’, आज ही के दिन मिला था वाइल्ड पोलियो का आखिरी मरीज
नई दिल्ली/जेनेवा | आयुष्य पथ डेस्क (13 जनवरी 2026)
वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 13 जनवरी 2026 को भारत ने एक ऐसी उपलब्धि के 15 साल पूरे किए हैं, जिसे कभी असंभव माना जाता था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पुष्टि की है कि आज ही के दिन, ठीक 15 साल पहले, भारत में वाइल्ड पोलियोवायरस (Wild Poliovirus) का आखिरी मामला दर्ज किया गया था।
यह ऐतिहासिक जीत केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरे WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की है, जिसने पिछले डेढ़ दशक में पोलियो को सिर उठाने का मौका नहीं दिया।
वो आखिरी तारीख: 13 जनवरी 2011
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में 13 जनवरी 2011 को एक दो साल के बच्चे में वाइल्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (WPV1) की पुष्टि हुई थी। यह भारत और पूरे क्षेत्र में दर्ज किया गया अंतिम मामला था। इसके बाद, तीन साल तक कोई नया मामला न मिलने पर, 27 मार्च 2014 को WHO ने भारत सहित क्षेत्र के 11 देशों को आधिकारिक रूप से ‘पोलियो-मुक्त’ प्रमाणित किया।
भारत, बांग्लादेश, भूटान, उत्तर कोरिया, इंडोनेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और तिमोर-लेस्ते।
कैसे जीती भारत ने यह असंभव लड़ाई?
एक समय था जब दुनिया के आधे पोलियो मरीज भारत में थे। इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे दशकों की कड़ी मेहनत थी:
- पल्स पोलियो अभियान (दो बूंद जिंदगी की): 1995 में शुरू हुए इस महाअभियान ने हर साल 17 करोड़ से अधिक बच्चों को प्रतिरक्षित किया।
- घर-घर दस्तक: स्वास्थ्य कर्मियों ने सुदूर गांवों, ईंट भट्ठों और घुमंतू आबादी तक पहुंचकर एक भी बच्चे को छूटने नहीं दिया।
- मजबूत निगरानी (Surveillance): बुखार और लकवे के हर संदिग्ध मामले की गहन जांच की गई।
- सामुदायिक भागीदारी: आयुष मंत्रालय और स्थानीय धर्मगुरुओं ने टीकाकरण के प्रति झिझक को दूर करने में अहम भूमिका निभाई।
15 साल बाद: जीत बड़ी है, पर जंग जारी है
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘वाइल्ड पोलियो’ खत्म हो चुका है, लेकिन हमें अभी भी सतर्क रहना होगा।
– डॉ. टी. जैकब जॉन, प्रख्यात पोलियो विशेषज्ञ
यह 15वीं वर्षगांठ भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती और लाखों स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण का प्रमाण है।
(स्रोत: WHO SEARO आधिकारिक बयान एवं स्वास्थ्य मंत्रालय अपडेट्स – 13 जनवरी 2026)

