आयुष थाली: अब बीमारी के आधार पर तय होगा रोगी का भोजन, आयुष मंत्रालय की नई पहल
आयुष थाली: अब अस्पतालों में ‘जनरल डाइट’ नहीं, बल्कि रोगी की बीमारी के अनुसार परोसा जाएगा भोजन
नई दिल्ली/रेवाड़ी | आयुष्य पथ समाचार
भारतीय चिकित्सा पद्धति में कहा गया है— “आहार संभवो वस्तु, रोगश्च आहार संभवः” अर्थात शरीर का निर्माण भी आहार से होता है और रोगों का कारण भी आहार ही है। इसी सिद्धांत को आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में लागू करने के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मंत्रालय जल्द ही अस्पतालों में ‘आयुष थाली’ (Ayush Thali) की शुरुआत करने जा रहा है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने हाल ही में घोषणा की है कि यह थाली न केवल पोषण का स्रोत होगी, बल्कि आहार के माध्यम से उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
क्या है ‘आयुष थाली’ का कांसेप्ट?
वर्तमान में अधिकांश अस्पतालों में मरीजों के लिए एक सामान्य प्रकार का भोजन (General Diet) बनता है। चाहे मरीज किसी भी बीमारी से ग्रसित हो, भोजन में बहुत अधिक अंतर नहीं होता। लेकिन ‘आयुष थाली’ इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगी। इस नई पहल के तहत:
- बीमारी के अनुसार भोजन: भोजन रोगी की विशिष्ट बीमारी (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी रोग आदि) के आधार पर तय किया जाएगा।
- प्रकृति का ध्यान: आयुर्वेद के त्रिदोष सिद्धांत (वात, पित्त, कफ) को ध्यान में रखकर भोजन तैयार किया जाएगा।
- इलाज का हिस्सा: भोजन को सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि दवा के रूप में (पथ्य-अपथ्य) देखा जाएगा।
‘जनता’ की बजाय ‘विशिष्टता’ पर जोर
जनसत्ता में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक अस्पतालों में सभी रोगियों के लिए एक तरह का भोजन बनता है। लेकिन आयुष मंत्रालय का मानना है कि संकल्प जल्द ही ‘आयुष थाली’ जारी करेगा। इन थालियों में शरीर को आधार मानकर भोजन परोसे जाएंगे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिस मरीज को जिस तरह के “लघु” (हल्के) या “गुरु” (भारी) भोजन की आवश्यकता होगी, उसे वैसा ही आहार दिया जाएगा। यह कदम आयुर्वेद की उस मान्यता को पुष्ट करता है कि ‘आहार ही औषधि है’।
आयुष्य पथ का विश्लेषण: यह क्यों जरूरी है?
प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के दृष्टिकोण से यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। आयुष्य मन्दिरम् की विचारधारा भी यही मानती है कि विजातीय द्रव्य (Foreign Matter) और गलत खान-पान ही रोगों की जड़ है। यदि अस्पताल के बिस्तर पर ही मरीज को सही, सात्विक और रोग-नाशक आहार मिलने लगे, तो:
- दवाइयों पर निर्भरता कम होगी।
- रिकवरी (स्वास्थ्य लाभ) की गति तेज होगी।
- रोगी को सही जीवनशैली की शिक्षा मिलेगी।
कब से होगी शुरुआत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी शुरुआत पहले आयुष अस्पतालों (जैसे अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली) से की जा सकती है। इसके बाद इसे अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में एक मॉडल के रूप में पेश किया जाएगा। इस पहल से आधुनिक डायटेटिक्स (Dietetics) और पारंपरिक ज्ञान का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
संदर्भ (References):
- मुख्य स्रोत: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार (Ministry of Ayush) आधिकारिक ‘X’ हैंडल (@moayush).
- समाचार रिपोर्ट: जनसत्ता (Jansatta) समाचार पत्र।
- शीर्षक: “आयुष थाली : रोगी की बीमारी से तय होगा खाना”।
- दिनांक: 15 दिसंबर 2025 (सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार)।
- उद्धृत व्यक्तित्व: केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव।

