Editor’s Pick

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‘बलिवैश्व यज्ञ’: उपभोक्तावाद के दौर में ‘वैदिक इकोलॉजी’ का शंखनाद

आज के उपभोक्तावादी दौर में, जब हमने प्रकृति से नाता तोड़ लिया है, ‘बलिवैश्व यज्ञ’ केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक आवश्यकता है। यह लेख बताता है कि कैसे ‘वैदिक इकोलॉजी’ और ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा’ (त्यागपूर्वक भोग) का सिद्धांत हमें ‘सचेत भोजन’ (Mindful Eating) से जोड़ता है। जानिए कैसे यह प्राचीन ‘सूक्ष्म पारिस्थितिकी प्रबंधन’ (Micro-level Ecological Management) आधुनिक युग की पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान बन सकता है और हमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के दर्शन की ओर ले जाता है।

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Editor's PickIntegrative Therapies (Acupressure, Reiki etc.)National (AYUSH Ministry & India News)

पैथियों की लड़ाई में मरीज क्यों हारे? हमें ‘इंटीग्रेटिव हेल्थ’ की जरूरत है

एलोपैथी और आयुर्वेद की लड़ाई में मरीज का नुकसान क्यों? भारत को अब इंटीग्रेटिव हेल्थ (एकीकृत चिकित्सा) मॉडल की जरूरत है। पढ़ें संपादक की राय।

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Integrative Therapies (Acupressure, Reiki etc.)Editor's Pick

अन्नमयकोश: पंचकोश का आधार, पोषण विज्ञान और Integrative Medicine में महत्व

तैत्तिरीय उपनिषद में वर्णित अन्नमयकोश क्या है? जानें पंचकोश सिद्धांत, अमा (Toxins) बनने के कारण, पंचकर्म शुद्धि और एकात्मिक चिकित्सा (Integrative Medicine) में इसका महत्व।

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