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आयुष मंत्रालय 2025 समीक्षा: बजट, WHO समिट और महाकुंभ – जानिए कैसे यह वर्ष बना ‘परिवर्तनकारी’

आयुष मंत्रालय 2025 समीक्षा: बजट, WHO समिट और महाकुंभ – जानिए कैसे यह वर्ष बना ‘परिवर्तनकारी’ | Ayushya Path

आयुष मंत्रालय: 2025 बना ‘परिवर्तनकारी वर्ष’ – वैश्विक मंच पर भारत की पारंपरिक चिकित्सा का डंका, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

वर्ष 2025 भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आयुष मंत्रालय के लिए एक ऐतिहासिक और ‘परिवर्तनकारी वर्ष’ साबित हुआ है। साक्ष्य-आधारित विकास (Evidence-based development) और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देते हुए, भारत ने इस वर्ष वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाई है। बजट में 14.2% की भारी बढ़ोतरी के साथ कुल ₹3,992.9 करोड़ का आवंटन सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

आयुष्य पथ आपके लिए लाया है वर्ष 2025 की उन बड़ी उपलब्धियों का लेखा-जोखा, जिसने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई दिशा दी है।

1. WHO ग्लोबल समिट और ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’

वर्ष के अंत में (17-19 दिसंबर), नई दिल्ली ने दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (2nd WHO Global Traditional Medicine Summit) की मेजबानी की। इस समिट की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया जाना रहा।

महत्वपूर्ण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंच से ‘आयुष मार्क’ (Ayush Mark) लॉन्च किया। यह मार्क आयुष उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता के लिए एक ‘ग्लोबल बेंचमार्क’ (Global Benchmark) के रूप में कार्य करेगा, जिससे भारतीय उत्पादों पर दुनिया का भरोसा और बढ़ेगा।

2. ICD-11 में शामिल होकर मिली वैश्विक मान्यता

आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के लिए यह साल मील का पत्थर साबित हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण (ICD-11) में इन पद्धतियों के मॉड्यूल को शामिल किया गया है।

  • इसका लाभ: अब आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक पद्धतियों में निदान की गई बीमारियों को वैश्विक रिपोर्टिंग सिस्टम में दर्ज किया जा सकेगा। यह आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

3. प्रयागराज महाकुंभ: सेवा का महाकुंभ

वर्ष 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में आयुष मंत्रालय ने सेवा के नए कीर्तिमान स्थापित किए। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • 9 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को आयुष ओपीडी (OPD), मोबाइल हेल्थ यूनिट और वेलनेस हॉल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं।
  • विशाल स्तर पर योग सत्र आयोजित किए गए और निःशुल्क औषधीय पौधों का वितरण किया गया।

4. ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ और 5 गिनीज रिकॉर्ड

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए चलाए गए ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की।

  • 1.29 करोड़ से अधिक नागरिकों का प्रकृति परीक्षण किया गया।
  • इस अभियान के दौरान सामूहिक भागीदारी और डेटा संग्रह के लिए 5 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए गए, जो जन-भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

5. डिजिटल क्रांति और बाजार में उछाल

डिजिटल हेल्थ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मंत्रालय ने दो प्रमुख पोर्टल लॉन्च किए:

  1. आयुष सुरक्षा पोर्टल (Ayush Suraksha Portal): इसका उद्देश्य आयुष से जुड़ी भ्रामक जानकारियों और गलत दावों (Misinformation) पर लगाम लगाना है।
  2. MAISP पोर्टल: यह आयुष क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने के लिए शुरू किया गया है।

आर्थिक दृष्टिकोण: आयुष बाजार में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। वर्ष 2024 में जो बाजार $43.3 बिलियन का था, उसके 2030 तक $200 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़ा बताता है कि आयुष अब केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है।

निष्कर्ष

वर्ष 2025 न केवल नीतियों के निर्माण का वर्ष था, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने का भी वर्ष रहा। वैश्विक मंचों पर स्वीकृति से लेकर कुंभ के मेले में आम जन की सेवा तक, आयुष मंत्रालय ने यह सिद्ध कर दिया है कि भविष्य ‘एकीकृत स्वास्थ्य सेवा’ (Integrative Healthcare) का है।

(आधार: पीआईबी ‘Year End Review 2025’ प्रेस रिलीज़)

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