हाइपरटेंशन (High BP) कम करने के 6 अचूक योग और डाइट | Ayushya Path
हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) को कहें अलविदा 🧘♂️
रक्तचाप को संतुलित करने वाले 6 अचूक योग और प्राणायाम
100 दिवसीय योग काउन्टडाउन: दिन – 66 🧘♀️✨
प्रस्तावना: ‘साइलेंट किलर’ से बचाव
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, अनियमित दिनचर्या और अनुचित आहार के कारण उच्च रक्तचाप (Hypertension) एक आम लेकिन बेहद गंभीर समस्या बन गया है। इसे मेडिकल विज्ञान में ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) भी कहा जाता है, क्योंकि अक्सर इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन यह भीतर ही भीतर हृदय (Heart), मस्तिष्क (Brain), और गुर्दों (Kidneys) को भारी नुकसान पहुंचाता है।
हाल ही में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने भी इस बात पर जोर दिया है कि उच्च रक्तचाप को रातों-रात नहीं रोका जा सकता, बल्कि इसके लिए प्रतिदिन छोटे-छोटे स्वस्थ कदम उठाने पड़ते हैं। योग, प्राणायाम और एक संतुलित सात्विक आहार के माध्यम से न केवल उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि इसे जड़ से समाप्त भी किया जा सकता है।
आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित पथ्य आहार और दिनचर्या

योग के साथ-साथ आहार (Diet) का हमारे रक्तचाप पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आयुष मंत्रालय के ताज़ा दिशानिर्देशों के अनुसार, उच्च रक्तचाप के रोगियों को अपने भोजन में निम्नलिखित पथ्य (DO’s – Preferred Diet) को अवश्य शामिल करना चाहिए:
उपयोगी आहार:
- अनाज: जौ (Barley), ज्वार (Jowar) और गेहूं (Wheat)। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और रक्त वाहिकाओं को साफ रखते हैं।
- सब्जियां: लौकी (Bottle gourd), करेला (Bitter gourd), गाजर (Carrot), और शलजम (Turnip)। लौकी का रस विशेष रूप से हृदय और रक्तचाप के लिए अमृत समान माना गया है।
- फल एवं अन्य: आंवला (Amla), मुनक्का/दाख (Draksha), मूंग दाल (Green gram) और तिल का तेल (Sesame oil)। आंवला विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है जो धमनियों की कठोरता को कम करता है।
स्वस्थ आदतें (Healthy Practices):
- कम नमक वाला भोजन (Low salty diet)।
- कम वसा/चिकनाई वाला आहार (Low fatty diet)।
- ताजे फलों और हरी सब्जियों का प्रचुर मात्रा में सेवन।
- मानसिक शांति (Mental relaxation) और यौगिक दिनचर्या।
रक्तचाप को संतुलित करने वाले 6 अचूक योग और प्राणायाम
योग विज्ञान में नाड़ी तंत्र (Nervous System) को शांत करने और रक्त संचार (Blood Circulation) को सुचारू बनाने के लिए विशेष आसनों और प्राणायामों का वर्णन है। यहाँ 6 सबसे प्रभावशाली अभ्यासों की विस्तृत विवेचना दी गई है:
1. शीतली प्राणायाम (Sheetali Pranayama)

शीतली शब्द का अर्थ ही ‘शीतलता’ प्रदान करने वाला है। उच्च रक्तचाप में शरीर का तापमान और रक्त का प्रवाह अक्सर उग्र हो जाता है। यह प्राणायाम शरीर और मन दोनों को तुरंत ठंडक पहुंचाता है।
- प्रभाव: यह ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ (Parasympathetic Nervous System) को सक्रिय करता है, जिससे हृदय गति (Heart rate) सामान्य होती है और क्रोध, तनाव या चिंता तुरंत दूर होती है।
- विधि:
- किसी भी ध्यानात्मक आसन (सुखासन, पद्मासन) में रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठ जाएं।
- जीभ को बाहर निकालें और उसे दोनों किनारों से मोड़कर एक ट्यूब (पाइप) का आकार दें।
- इस ट्यूब जैसी जीभ से श्वास को धीरे-धीरे अंदर खींचें (श्वास लेते समय सी-सी की आवाज़ आएगी और जीभ पर ठंडक महसूस होगी)।
- मुंह बंद करें और श्वास को कुछ क्षण भीतर रोकें (अपनी क्षमता अनुसार)।
- फिर दोनों नासिका छिद्रों से धीरे-धीरे श्वास बाहर निकाल दें।
2. पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana)

पेट की गैस या अपच का सीधा असर हृदय और रक्तचाप पर पड़ता है। जब पेट में वायु (गैस) फंसती है, तो वह डायाफ्राम (Diaphragm) पर ऊपर की ओर दबाव डालती है, जिससे हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और बीपी बढ़ जाता है।
- प्रभाव: यह आसन अपान वायु को बाहर निकालकर उदर गुहा (Abdominal cavity) के दबाव को कम करता है, जिससे हृदय को तुरंत राहत मिलती है और रक्तचाप सामान्य होता है।
- विधि:
- पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
- श्वास भरते हुए दोनों पैरों को मोड़ें और घुटनों को छाती के पास लाएं।
- दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर (Interlock) घुटनों को पकड़ें और श्वास छोड़ते हुए उन्हें पेट पर दबाएं।
- (नोट: उच्च रक्तचाप के रोगियों को गर्दन उठाकर नाक को घुटने से लगाने से बचना चाहिए। उन्हें केवल सिर ज़मीन पर रखकर पैरों को पेट पर दबाना चाहिए, ताकि हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।)
3. bhramari प्राणायाम (Bhramari Pranayama)

इसे ‘हमिंग बी ब्रीथ’ (Humming Bee Breath) भी कहते हैं। हाइपरटेंशन के लिए यह एक रामबाण उपाय है।
- प्रभाव: भ्रामरी के दौरान निकलने वाली ध्वनि तरंगें (Vibrations) मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) को शांत करती हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि भ्रामरी के अभ्यास से शरीर में ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ (Nitric Oxide) का स्राव बढ़ता है, जो रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) को चौड़ा करता है और ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से कम करता है।
- विधि:
- आँखें बंद करके सीधे बैठें।
- दोनों हाथों के अंगूठों से कानों को बंद करें (ताकि बाहर की आवाज़ न आए)।
- तर्जनी उंगली माथे पर और बाकी तीन उंगलियां आंखों पर हल्के से रखें (षण्मुखी मुद्रा)।
- गहरी श्वास अंदर लें और श्वास छोड़ते हुए गले से भौंरे (Bee) जैसी गुंजन (मँकार) की ध्वनि करें।
4. शशांकासन (Shashankasana)

शशांक का अर्थ ‘खरगोश’ (Hare) होता है। जिस प्रकार खरगोश शांत और फुर्तीला होता है, यह आसन हमारे तंत्रिका तंत्र को वैसी ही गहरी शांति प्रदान करता है।
- प्रभाव: जब हम शशांकासन में आगे की ओर झुकते हैं, तो हृदय के ऊपर से गुरुत्वाकर्षण का दबाव कम हो जाता है। इससे एड्रेनल ग्रंथि (Adrenal Gland) का स्राव संतुलित होता है और स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ (Cortisol) का स्तर गिरता है, जो सीधे तौर पर बीपी को कम करता है।
- विधि:
- वज्रासन (घुटनों के बल) में बैठ जाएं।
- श्वास भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
- श्वास छोड़ते हुए कमर के निचले हिस्से से आगे की ओर झुकें, जब तक कि आपके हाथ और माथा ज़मीन को न छू लें।
- इस स्थिति में शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें और सामान्य श्वास लेते रहें।
5. भुजंगासन (Bhujangasana)

भुजंग यानी कोबरा (Cobra)। यह छाती और फेफड़ों को खोलने वाला एक बेहतरीन आसन है।
- प्रभाव: हालांकि उच्च रक्तचाप में तीव्र पीछे झुकने वाले आसनों से मना किया जाता है, लेकिन भुजंगासन का ‘सरल रूप’ (जहाँ केवल छाती को हल्का सा उठाया जाए) फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। इससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और हृदय को शुद्ध रक्त पंप करने में आसानी होती है।
- विधि:
- पेट के बल लेट जाएं, दोनों पैर आपस में जुड़े हों।
- दोनों हथेलियों को कंधों के ठीक नीचे ज़मीन पर रखें। कोहनियां शरीर से सटी हुई हों।
- श्वास भरते हुए धीरे-धीरे सिर, कंधे और छाती को नाभि तक ऊपर उठाएं।
- (नोट: हाई बीपी के रोगी इस अवस्था में श्वास को रोकें नहीं (कुम्भक न करें), बल्कि सामान्य रूप से श्वास लेते और छोड़ते रहें। झटके से न उठें।)
6. अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom-Vilom / Nadi Shodhana)

इसे ‘नाड़ी शोधन प्राणायाम’ का प्राथमिक स्तर माना जाता है। यह शरीर की इड़ा (चंद्र/ठंडी) और पिंगला (सूर्य/गर्म) नाड़ियों के बीच संतुलन स्थापित करता है।
- प्रभाव: यह प्राणायाम दाएं और बाएं मस्तिष्क गोलार्धों (Brain Hemispheres) में तालमेल बैठाता है। इसके नियमित अभ्यास से हृदय की धड़कन (Heart Rate) और रक्तचाप (Blood Pressure) में चमत्कारी रूप से स्थिरता आती है। यह विचारों की उथल-पुथल को शांत कर गहरी नींद लाने में भी सहायक है।
- विधि:
- सुखासन में बैठकर बाएं हाथ को घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रखें।
- दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका (Right Nostril) को बंद करें और बाईं नासिका (Left Nostril) से गहरी और धीमी श्वास लें।
- अब अनामिका (Ring finger) से बाईं नासिका को बंद करें और अंगूठा हटाकर दाईं नासिका से श्वास बाहर छोड़ें।
- फिर दाईं ओर से ही श्वास अंदर लें और बाईं ओर से बाहर छोड़ें। यह एक चक्र हुआ। इसे बिना आवाज़ किए अत्यंत सहजता से करें।
निष्कर्ष: जीवनशैली ही औषधि है
रक्तचाप को मात्र एक बीमारी समझना भूल है; यह शरीर का एक ‘अलार्म’ है जो बता रहा है कि हमारी जीवनशैली प्रकृति के अनुकूल नहीं है। आयुष मंत्रालय के “Eat Right. Stay Balanced.” के मूलमंत्र और महर्षि पतंजलि के योग विज्ञान को जीवन में उतारकर हम इस समस्या को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं।
दवाइयां केवल लक्षणों को दबाती हैं, लेकिन ‘योग’ रोग के मूल कारण (तनाव, दूषित नाड़ियां और गलत खान-पान) को नष्ट करता है। आज से ही अपनी दिनचर्या में इन 6 योग-प्राणायामों को शामिल करें और एक स्वस्थ, ऊर्जावान जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
100 दिवसीय योग काउन्टडाउन: दिन – 66 🧘♀️✨
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या योग के माध्यम से उच्च रक्तचाप (High BP) को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है?
हाँ, नियमित योग, ध्यान और सात्विक आहार के संयोजन से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित ही नहीं, बल्कि धीरे-धीरे जड़ से खत्म भी किया जा सकता है। योग तनाव के मूल कारण को दूर करके नर्वस सिस्टम को शांत करता है। हालांकि, इसे अपनी जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बनाना आवश्यक है।
2. क्या मुझे योग अभ्यास शुरू करने के बाद अपनी बीपी की दवाएं बंद कर देनी चाहिए?
बिल्कुल नहीं। योग एक पूरक चिकित्सा (Complementary therapy) है। योग शुरू करने के साथ दवाएं तुरंत बंद न करें। जब योग के अभ्यास से आपका ब्लड प्रेशर प्राकृतिक रूप से सामान्य रहने लगे, तब अपने चिकित्सक (Doctor) की सलाह से ही दवाओं की खुराक कम करें या बंद करें।
3. उच्च रक्तचाप के रोगियों को किन योगासनों से सख्त बचना चाहिए?
हाई बीपी के रोगियों को ऐसे आसन नहीं करने चाहिए जिनमें सिर हृदय से नीचे जाता हो (Inverted Poses) जैसे- शीर्षासन (Headstand), सर्वांगासन या अधोमुख श्वानासन। इसके अलावा तेजी से सांस लेने वाले प्राणायाम (जैसे भस्त्रिका) और श्वास रोकने की क्रिया (कुम्भक) से भी बचना चाहिए।
4. योग और प्राणायाम करने का सबसे सही समय कौन सा है?
योग अभ्यास के लिए सबसे उत्तम समय सुबह सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त) या शौच आदि से निवृत्त होकर खाली पेट का समय होता है। यदि सुबह समय न मिले, तो शाम को भोजन के कम से कम 4-5 घंटे बाद भी अभ्यास किया जा सकता है।
5. क्या सर्दियों में भी शीतली प्राणायाम का अभ्यास किया जा सकता है?
चूंकि शीतली प्राणायाम शरीर के तापमान को कम करता है और ठंडक पहुंचाता है, इसलिए अत्यधिक सर्दियों में या कफ, सर्दी, खांसी और अस्थमा की स्थिति में इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी अधिक लाभकारी हैं।
6. केवल आहार में बदलाव करके रक्तचाप कम किया जा सकता है?
आहार में बदलाव (जैसे कम नमक, ताजे फल और लौकी का रस) रक्तचाप कम करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। लेकिन मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता को दूर करने के लिए आहार के साथ योग और प्राणायाम को जोड़ना सबसे बेहतर और स्थायी परिणाम देता है।

