असाध्य रोगों के इलाज के लिए रिसर्च को बनाएं जीवन का लक्ष्य’: 9वें सिद्ध दिवस पर उपराष्ट्रपति का छात्रों को मंत्र
‘असाध्य रोगों के इलाज के लिए रिसर्च को बनाएं जीवन का लक्ष्य’: 9वें सिद्ध दिवस पर उपराष्ट्रपति का छात्रों को मंत्र
चेन्नई/नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (06 जनवरी 2026)भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक, सिद्ध चिकित्सा (Siddha Medicine) को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक जोरदार आह्वान किया गया है। 3 जनवरी 2026 को चेन्नई में आयोजित ‘नौवें सिद्ध दिवस’ (9th Siddha Day) समारोह का उद्घाटन करते हुए, भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने युवा छात्रों और शोधकर्ताओं में नया जोश भरा।
समारोह में उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें प्रयोगशालाओं (Labs) और अनुसंधान (Research) का हिस्सा बनना होगा।
“सिद्ध अतीत का अवशेष नहीं, जीवंत ज्ञान है”
छात्रों को सलाह: ‘रिसर्च’ पर करें फोकस
उपराष्ट्रपति ने सिद्ध चिकित्सा के छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को प्रेरित करते हुए एक विशेष सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें उन असाध्य रोगों (Incurable Diseases) के लिए स्थायी इलाज खोजने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिनका उत्तर आधुनिक चिकित्सा के पास भी नहीं है। उन्होंने ‘अनुसंधान’ को जीवन का लक्ष्य बनाने पर जोर दिया।
संरक्षण और दस्तावेजीकरण की चुनौती
समारोह के दौरान सिद्ध चिकित्सा के इतिहास में अपर्याप्त दस्तावेजीकरण (Lack of Documentation) की समस्या पर भी चिंता जताई गई।
- उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा के कारण कई प्राचीन ताड़ के पत्ते (Palm leaf manuscripts) और ग्रंथ नष्ट होने के कगार पर हैं।
- उन्होंने विद्वानों से अपील की कि वे संरक्षण और वैज्ञानिक शोध को प्राथमिकता दें ताकि यह ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।
इस अवसर पर आयुष मंत्री ने सिद्ध चिकित्सा को ‘समग्र स्वास्थ्य’ (Holistic Health) का एक उन्नत रूप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सिद्ध को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका प्रमाण WHO के ICD-11 में सिद्ध का शामिल होना है।
क्यों मनाया जाता है सिद्ध दिवस?
सिद्ध दिवस हर साल 6 जनवरी (या तमिल कैलेंडर के अनुसार मार्गज़ी महीने के आयिल्यम नक्षत्र) को मनाया जाता है। यह दिन सिद्ध चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महान ऋषि अगस्त्य (Agastya Rishi) की जयंती का प्रतीक है। इस वर्ष का मुख्य समारोह 3 जनवरी को आयोजित किया गया।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में हमारी पारंपरिक जड़ें ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति बनेंगी।
(स्रोत: पीआईबी एवं आयुष मंत्रालय विज्ञप्ति)

