छत्तीसगढ़ के वनांचल में ‘सेहत का मेला’: गौरेला में निःशुल्क आयुष शिविर आयोजित, ग्रामीणों को मिली संजीवनी
छत्तीसगढ़ के वनांचल में ‘सेहत का मेला’: गौरेला में निःशुल्क आयुष शिविर आयोजित, ग्रामीणों को मिली संजीवनी
गौरेला/बिलासपुर | आयुष्य पथ डेस्क (09 जनवरी 2026)छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य के आयुष विभाग ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। 9 जनवरी 2026 को गौरेला विकासखंड के ग्राम डाहीबहरा (Dahibahara) में एक विशाल ‘निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य मेला एवं जागरूकता शिविर’ का आयोजन किया गया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय समुदायों को उनके घर के नजदीक ही आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ प्रदान करना था।
शिविर में क्या रहा खास?
डाहीबहरा में आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी स्वास्थ्य जांच कराई। आयुष विभाग की टीम ने न केवल इलाज किया, बल्कि बचाव के तरीके भी बताए:
- निःशुल्क निदान एवं उपचार: अनुभवी वैद्यों और आयुष चिकित्सकों ने वात, पित्त और कफ नाड़ी परीक्षण के आधार पर मरीजों का इलाज किया।
- औषधि वितरण: मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार निःशुल्क आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं वितरित की गईं।
- योग चौपाल: ग्रामीणों को निरोगी रहने के लिए योगासन और प्राणायाम का महत्व समझाया गया और कुछ सरल अभ्यास भी कराए गए।
गौरेला क्षेत्र मुख्य रूप से जनजातीय बाहुल्य है। यहाँ के बैगा और अन्य आदिवासी समुदायों के लिए यह शिविर वरदान साबित हुआ। उन्हें मौसमी बीमारियों से बचने के लिए स्थानीय जड़ी-बूटियों के उपयोग और खान-पान (आहार-विहार) की जानकारी दी गई।
‘आयुष आपके द्वार’ की सार्थकता
इस तरह के विकासखंड स्तरीय मेलों का आयोजन ‘आयुष आपके द्वार’ अभियान का हिस्सा है। इसका लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा को केवल शहरों तक सीमित न रखकर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसे शिविर जिले के अन्य गांवों में भी लगाए जाएंगे ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।
(स्रोत: आयुष मंत्रालय अपडेट्स और स्थानीय क्षेत्रीय रिपोर्ट्स – 9 जनवरी 2026)

