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सूर्य-किरण एवं रंग चिकित्सा (Chromotherapy): एक एकीकृत वैज्ञानिक दृष्टिकोण | शोध विशेषांक

लेखक/सम्पादक: आचार्य डॉ. जयप्रकाशानन्द (संस्थापक, आयुष्य मन्दिरम्)

सह-सम्पादक: योगाचार्य सुषमा कुमारी

प्रकाशन दिनांक: 07 मई 2026 | अंक: 02

प्रस्तावना: सौर ऊर्जा और जीवन का आधार

सृष्टि के आरंभ से ही सूर्य को ‘प्राण’ का आधार माना गया है। प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) में ‘सूर्य किरण चिकित्सा’ या ‘क्रोमोथेरेपी’ केवल एक वैकल्पिक पद्धति नहीं है, बल्कि यह वह मूल विज्ञान है जो यह समझाता है कि दृश्य प्रकाश (Visible Light) की विभिन्न तरंगदैर्ध्य (Wavelengths) मानव शरीर के जैविक तंत्र के साथ कैसे अंतः क्रिया करती हैं।

यह शोध पत्र ‘आयुष्य मन्दिरम्’ की उस साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) विचारधारा को समर्पित है, जो प्राचीन ऋषि-मुनियों के ज्ञान को आधुनिक प्रयोगशालाओं के ‘फोटोबायोमॉड्यूलेशन’ (Photobiomodulation) सिद्धांतों से जोड़ता है।

शोध पत्र के प्रमुख विषय (Key Highlights):

  • ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय आधार (Scriptural Foundation)
  • फोटोबायोमॉड्यूलेशन (PBM) का आधुनिक विज्ञान
  • न्यूरोएंडोक्राइन तंत्र (Neuroendocrine System) पर प्रकाश का प्रभाव
  • आयुष्य मन्दिरम् कार्यप्रणाली: सूर्य-संतृप्त जल एवं तेल निर्माण के कड़े वैज्ञानिक मानक

संपूर्ण शोध पत्र (PDF) डाउनलोड करें

सूर्य-किरण एवं रंग चिकित्सा पर ‘आयुष्य पथ’ का यह विशेष शोध दस्तावेज़ मुफ्त में उपलब्ध है।

📥 शोध पत्र डाउनलोड करें (PDF)

फ़ाइल का आकार: लगभग 2MB | प्रकाशक: आयुष्य मन्दिरम्

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