डेनमार्क में पंचकर्म: AIIA विशेषज्ञ ने बताया दीर्घायु का राज
डेनमार्क में गूंजा ‘पंचकर्म’ का विज्ञान: AIIA विशेषज्ञ ने बताया दीर्घायु का राज – ‘बॉडी माइंड सोल फेयर’ का शानदार समापन
कोपेनहेगन/नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026 (आयुष्य पथ इंटरनेशनल डेस्क): यूरोप के दिल कहे जाने वाले डेनमार्क में पिछले तीन दिनों से चल रहे ‘बॉडी माइंड सोल फेयर’ (Body Mind Soul Fair) का समापन भारतीय ज्ञान परंपरा के जयघोष के साथ हुआ। समापन सत्र में भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति ‘पंचकर्म’ (Panchakarma) छाई रही, जिसे आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसकर दुनिया के सामने रखा गया।
भारत सरकार के शीर्ष आयुर्वेद संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामावतार शर्मा ने समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। भारतीय दूतावास (कोपेनहेगन) के सहयोग से आयोजित इस सत्र में डॉ. शर्मा ने बताया कि कैसे आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, बल्कि ‘दीर्घायु’ (Longevity) का विज्ञान है।
पंचकर्म: शरीर का ‘डीप डिटॉक्स’ और एंटी-एजिंग फॉर्मूला
डॉ. रामावतार शर्मा ने अपने विस्तृत व्याख्यान में डेनिश दर्शकों को समझाया कि पंचकर्म (पांच कर्म: वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य और रक्तमोक्षण) केवल मसाज या रिलैक्सेशन थेरेपी नहीं है, बल्कि यह शरीर की एक ‘बायो-प्यूरिफिकेशन’ (Bio-purification) प्रक्रिया है।
उन्होंने इसके तीन प्रमुख लाभों पर जोर दिया:
- दोषों का संतुलन: शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों (Toxins/Ama) को जड़ से निकालकर वात, पित्त और कफ को संतुलित करना।
- इम्यूनिटी और दीर्घायु: नियमित पंचकर्म शरीर की कोशिकाओं (Cells) को पुनर्जीवित (Rejuvenate) करता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया (Ageing process) धीमी होती है और व्यक्ति लंबे समय तक युवा बना रहता है।
- मानसिक शांति: यूरोप में बढ़ती ‘बर्नआउट’ और तनाव की समस्या के लिए पंचकर्म की ‘शिरोधारा’ और ‘नस्य’ क्रिया को उन्होंने सबसे प्रभावी प्राकृतिक समाधान बताया।
AIIA: साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद का वैश्विक केंद्र
डॉ. शर्मा ने वैश्विक मंच पर AIIA (All India Institute of Ayurveda) का विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली स्थित यह संस्थान किस तरह आयुर्वेद को ‘साक्ष्य-आधारित’ (Evidence-based) बना रहा है।
“AIIA में हम प्राचीन संहिताओं के ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की प्रयोगशालाओं में परखते हैं। आज हमारे पास पोस्ट-ग्रेजुएट और पीएचडी स्तर की रिसर्च सुविधाएं हैं जो दुनिया को दिखा रही हैं कि आयुर्वेद हर कसौटी पर खरा उतरता है।”
दिनचर्या: अनुशासन ही स्वास्थ्य है
अपने संबोधन के अंतिम भाग में डॉ. शर्मा ने ‘दिनचर्या’ (Daily Regimen) के महत्व पर बात की। उन्होंने पश्चिमी दर्शकों को समझाया कि स्वास्थ्य किसी दवा की शीशी में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों में छिपा है।
- ब्रह्म मुहूर्त में जागना (सुबह जल्दी उठना)।
- ऋतु के अनुसार भोजन करना।
- योग और निद्रा का सही समय।
भारत का ‘AYUSH स्टॉल’: कूटनीति की नई मिसाल
30 जनवरी से 1 फरवरी तक चले इस फेयर में भारत का स्टॉल नंबर 90 आकर्षण का केंद्र बना रहा।
- सैकड़ों परामर्श: तीन दिनों में सैकड़ों डेनिश नागरिकों ने भारतीय वैद्यों से फ्री कंसल्टेशन लिया।
- योग डेमो: मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग (MDNIY) द्वारा कराए गए योग सत्रों में लोगों ने भारी उत्साह दिखाया।
विशेषज्ञों की राय: ‘सॉफ्ट पावर’ की जीत
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि डेनमार्क में AIIA की यह सक्रिय भागीदारी भारत की ‘AYUSH डिप्लोमेसी’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जब एक सरकारी संस्थान का विशेषज्ञ विदेशी मंच पर वैज्ञानिक तथ्यों के साथ बात करता है, तो उससे पूरी चिकित्सा पद्धति की विश्वसनीयता (Credibility) बढ़ती है।
निष्कर्ष
‘बॉडी माइंड सोल फेयर’ का समापन यह संदेश देकर गया है कि दुनिया अब ‘केमिकल’ से ऊबकर ‘नेचुरल’ की ओर लौट रही है, और उस रास्ते का सबसे बड़ा मार्गदर्शक भारत का आयुर्वेद है।
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रिपोर्ट: आयुष्य पथ इंटरनेशनल डेस्क | स्रोत: AIIA/Embassy of India, Copenhagen

