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5 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: आयुष मंत्रालय के ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ ने रचा इतिहास, 1.29 करोड़ लोगों की हुई जांच

5 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: आयुष मंत्रालय के ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ ने रचा इतिहास, 1.29 करोड़ लोगों की हुई जांच | Ayushya Path

5 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: आयुष मंत्रालय के ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ ने रचा इतिहास, 1.29 करोड़ लोगों की हुई जांच

भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की स्वीकार्यता अब नए वैश्विक आयाम छू रही है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने घोषणा की है कि उसके महत्वाकांक्षी ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ ने एक साथ पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) अपने नाम किए हैं।

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा ‘प्रकृति आकलन अभियान’ साबित हुआ है, जिसमें 1.29 करोड़ से अधिक लोगों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

क्या है यह उपलब्धि?

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आयुष मंत्रालय को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। यह अभियान पिछले 5 वर्षों से चल रहा था और इसने अपने निर्धारित लक्ष्यों से कहीं अधिक सफलता प्राप्त की है।

🏆 रिकॉर्ड ब्रेकिंग आंकड़े:
1.29 करोड़+ आवेदनों और परीक्षणों के साथ भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में यह नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि ‘वर्ष के अंत की समीक्षा 2025’ (Year End Review 2025) की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक है।

क्यों खास है ‘प्रकृति परीक्षण’?

आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार, हर व्यक्ति के शरीर की संरचना अलग होती है, जिसे वात, पित्त और कफ के आधार पर ‘प्रकृति’ कहा जाता है।

  • उद्देश्य: इस अभियान का मुख्य लक्ष्य आम जनमानस की शारीरिक प्रकृति को पहचानना था।
  • लाभ: परीक्षण के आधार पर लोगों को उनकी प्रकृति के अनुकूल आहार, विहार और जीवनशैली (Lifestyle) अपनाने की सलाह दी गई, जिससे वे रोगों से बच सकें।

वैश्विक स्तर पर भारत की धमक

आयुष मंत्रालय ने इस सफलता का श्रेय देश भर के चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और जागरूक नागरिकों को दिया है। मंत्रालय का कहना है कि 5 गिनीज रिकॉर्ड बनाना केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा अब आधुनिक दुनिया में भी वैज्ञानिक रूप से स्थापित हो रही है।

यह पहल योग और प्राकृतिक चिकित्सा को घर-घर पहुँचाने के सरकार के संकल्प को और मजबूत करती है।

(स्रोत: पीआईबी आयुष, 2 जनवरी 2026)

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