डिजिटल शोर के बीच ‘मौन’ की शक्ति: क्या हम मानसिक शांति खो चुके हैं?
हम इतिहास के उस दौर में जी रहे हैं जहाँ हम 24 घंटे ‘कनेक्टेड’ हैं, फिर भी शायद सबसे ज्यादा ‘अकेले’ हैं। सुबह आँख खुलते ही मोबाइल की नोटिफिकेशन घंटी हमारे मन की शांति को निगल लेती है। हम हर पल कुछ न कुछ देख रहे हैं, सुन रहे हैं या टाइप कर रहे हैं। परिणाम? एंग्जायटी (Anxiety), अनिद्रा और बिखरा हुआ ध्यान।
शांति की खोज एलोपैथी के पास चिंता के लिए ‘शामक दवाएं’ (Sedatives) तो हैं, लेकिन ‘शांति’ के लिए कोई कैप्सूल नहीं है। यहाँ योग का ‘प्रत्याहार’ और ‘मुद्रा विज्ञान’ काम आता है। गायत्री मुद्रा हो या ज्ञान मुद्रा—ये उंगलियों के साधारण इशारे नहीं, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को री-सेट करने के स्विच हैं।
मौन ही औषधि है ‘आयुष्य पथ’ का आह्वान है कि प्रतिदिन कुछ देर अपने गैजेट्स को खुद से दूर रखें। हमें अपने बच्चों को स्मार्टफोन देने से पहले, उन्हें अपने मन को नियंत्रित करना सिखाना होगा। असली स्मार्टनेस फोन में नहीं, एक स्थिर और शांत मन में है। शोर से भरी इस दुनिया में, ‘मौन’ (Silence) ही सबसे बड़ी लग्जरी है।
— जयप्रकाश (संपादक, आयुष्य पथ)

