‘कैल्शियम और पाचन’ का डबल डोज: घर पर बनाएं तिल-अलसी का ‘सुपर मुखवास’, हड्डियों में जान और पेट को रखेगा साफ
‘कैल्शियम और पाचन’ का डबल डोज: घर पर बनाएं तिल-अलसी का ‘सुपर मुखवास’, हड्डियों में जान और पेट को रखेगा साफ
नई दिल्ली | आयुष्य पथ रेसिपी डेस्क (14 जनवरी 2026)
आयुर्वेद में भोजन के बाद मुखवास (Mouth Freshener) लेने की परंपरा केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि पाचन को दुरुस्त करने के लिए बनाई गई थी। आज हम आपको एक ऐसी ‘सुपर रेसिपी’ बता रहे हैं जो दो शक्तिशाली बीजों—तिल (Sesame) और अलसी (Flaxseeds)—का मिश्रण है।
यह मुखवास विशेष रूप से सर्दियों में फायदेमंद है। तिल को ‘कैल्शियम का पावरहाउस’ माना जाता है, जबकि अलसी ओमेगा-3 और फाइबर से भरपूर होती है। इसे रोज खाने के बाद एक चम्मच लेने से न केवल पाचन सुधरता है, बल्कि हड्डियों को मजबूती भी मिलती है।
🥣 सामग्री (Ingredients)
- सफेद/काले तिल: 1 कप (लगभग 100 ग्राम)
- अलसी के बीज: 1 कप (लगभग 200 ग्राम)
- काला नमक: 1 से 1½ चम्मच (स्वादानुसार)
- नींबू का रस: 2-3 बड़े चम्मच
- वैकल्पिक: 2 चम्मच सौंफ और चुटकी भर हींग (पाचन के लिए)
👩🍳 बनाने की विधि (Step-by-Step)
- तैयारी: सबसे पहले तिल और अलसी को साफ कर लें। एक कटोरी में नींबू का रस और काला नमक मिलाकर घोल तैयार करें।
- मिक्सिंग: अलसी के बीजों में नींबू-नमक का घोल अच्छी तरह मिलाएं। इसे 15-20 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि बीज स्वाद सोख लें और नरम हो जाएं।
- भूनना (Roasting):
- एक भारी तले की कड़ाही में पहले तिल डालें और मध्यम आंच पर 3-4 मिनट तक भूनें (हल्का भूरा होने तक)। इसे निकाल लें।
- अब उसी कड़ाही में नींबू लगी अलसी डालें और 4-6 मिनट तक भूनें। अलसी चटकने लगेगी और कुरकुरी हो जाएगी।
- मिलाना: भुने हुए तिल और अलसी को एक साथ मिलाएं। ठंडा होने दें।
- स्टोरेज: पूरी तरह ठंडा होने पर कांच के एयरटाइट जार में भरकर रखें।
🌿 स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits):
- पाचन सहायक: काला नमक और नींबू पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे गैस और ब्लोटिंग नहीं होती।
- हड्डियों की मजबूती: तिल में दूध से भी ज्यादा कैल्शियम होता है, जो जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
- हार्ट हेल्थ: अलसी का ओमेगा-3 खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
सेवन का सही तरीका
दोपहर और रात के भोजन के बाद 1 छोटा चम्मच चबा-चबाकर खाएं। ध्यान रहे, अलसी तासीर में गर्म होती है, इसलिए गर्भवती महिलाएं इसका सेवन सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से करें।
(स्रोत: आयुर्वेदिक आहार संहिता एवं पोषण विशेषज्ञों की सलाह – 14 जनवरी 2026)

