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आयुष क्रांति: अब खेत पर ही AI से होगी औषधीय पौधों की क्वालिटी चेकिंग, IIT दिल्ली में विशेषज्ञों ने तैयार किया ‘डिजिटल रोडमैप’

आयुष क्रांति: अब खेत पर ही AI से होगी औषधीय पौधों की क्वालिटी चेकिंग, IIT दिल्ली में विशेषज्ञों ने तैयार किया ‘डिजिटल रोडमैप’ | Ayushya Path

आयुष क्रांति: अब खेत पर ही AI से होगी औषधीय पौधों की क्वालिटी चेकिंग, IIT दिल्ली में विशेषज्ञों ने तैयार किया ‘डिजिटल रोडमैप’

भारत की ‘हर्बल इकोनॉमी’ को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विज्ञान और परंपरा का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। IIT दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (8-9 जनवरी) में देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने औषधीय पौधों की खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर मुहर लगा दी है।

संगोष्ठी का मुख्य एजेंडा था— “फार्म-गेट (खेत) पर ही गुणवत्ता की जांच।” यानी अब लैब का इंतज़ार नहीं, बल्कि खेत में ही पता चल जाएगा कि अश्वगंधा या तुलसी की गुणवत्ता कैसी है।

🤖 भविष्य की तकनीक:
विशेषज्ञों ने ऐसे पोर्टेबल डिवाइस और एआई-सक्षम सिस्टम बनाने पर जोर दिया है जो खेत में ही पौधों के सक्रिय तत्वों (Active Ingredients) की जांच कर सकें। साथ ही, ब्लॉकचेन (Blockchain) तकनीक से सप्लाई चेन में पारदर्शिता लाई जाएगी ताकि मिलावट को रोका जा सके।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अभी तक औषधीय पौधों की गुणवत्ता जांच अक्सर उत्पादन के बहुत बाद होती थी, जिससे कई बार खराब माल बाजार में आ जाता था या किसानों को सही दाम नहीं मिल पाते थे।

  • मिलावट पर लगाम: एआई टूल्स के जरिए असली और नकली पौधों की पहचान तुरंत हो सकेगी।
  • किसानों को लाभ: अगर किसान को खेत पर ही अपनी फसल की गुणवत्ता का प्रमाण मिल जाएगा, तो वे व्यापारियों से बेहतर दाम मांग सकेंगे।
  • वैश्विक विश्वास: जब पूरी दुनिया को पता होगा कि भारतीय जड़ी-बूटियां ‘ट्रेसेबल’ (Traceable) हैं और उनकी डिजिटल कुंडली मौजूद है, तो निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञों की राय

“भारतीय औषधीय पौधों के कच्चे माल में वैश्विक विश्वास पैदा करने के लिए ‘फार्म-गेट’ स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है।”
प्रो. (डॉ.) तनुजा नेसारी, निदेशक, ITRA

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के सीईओ प्रो. डॉ. महेश कुमार दाधिच ने भी कहा कि अब समय आ गया है कि हम ‘वृक्ष आयुर्वेद’ के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विनियमन (Regulation) के साथ जोड़ें।

भविष्य की योजना

संगोष्ठी के समापन पर एक राष्ट्रीय ढांचा (National Framework) विकसित करने की नींव रखी गई। इसके तहत जल्द ही एनएमपीबी (NMPB) समर्थित पायलट परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें किसानों को ये डिजिटल उपकरण दिए जाएंगे और उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।

यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आयुष सेक्टर को दुनिया का सिरमौर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

(स्रोत: पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति आईडी: 2213717, दिनांक 12 जनवरी 2026)

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