CCRH में पद्म श्री डॉ. पद्मा गुरमेत का सम्मान: आयुष का गौरव
लद्दाख से दिल्ली तक गूंजी तालियां: पद्म श्री डॉ. पद्मा गुरमेत का CCRH मुख्यालय में भव्य सम्मान – आयुष परिवार ने कहा ‘हमें आप पर गर्व है’
नई दिल्ली, 2 फरवरी 2026 (आयुष्य पथ ब्यूरो): लद्दाख की बर्फीली चोटियों से निकलकर भारत की संसद तक ‘सोवा-रिग्पा’ (Sowa-Rigpa) चिकित्सा पद्धति को पहचान दिलाने वाले डॉ. पद्मा गुरमेत आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हाल ही में भारत सरकार द्वारा उन्हें ‘पद्म श्री’ (2026) से सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद, पूरे आयुष जगत में खुशी की लहर है।
इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) ने अपने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में 1 फरवरी को एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। यह कार्यक्रम केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि होम्योपैथी और सोवा-रिग्पा जैसी अलग-अलग पद्धतियों के बीच ‘आयुष एकता’ का प्रतीक बना।
शाल, श्रीफल और सम्मान: समारोह की झलकियां
समारोह का माहौल बेहद आत्मीय और गरिमामय था। CCRH के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पद्मा गुरमेत का स्वागत किया।
- सम्मान: डॉ. कौशिक ने डॉ. गुरमेत को पारंपरिक शाल ओढ़ाकर, श्रीफल (नारियल), प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
- संचालन: कार्यक्रम का संचालन अनुसंधान अधिकारी डॉ. दीप्ति सिंह ने किया। उन्होंने डॉ. गुरमेत की जीवन यात्रा और सोवा-रिग्पा को राष्ट्रीय चिकित्सा प्रणाली (National Medical System) का दर्जा दिलाने में उनके संघर्ष को रेखांकित किया।
- उपस्थिति: इस मौके पर सहायक निदेशक (प्रशासन) डॉ. के.सी. मुरलीधरन सहित परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक, अनुसंधान अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
“सौम्य व्यक्तित्व, फौलादी इरादे”: डॉ. सुभाष कौशिक
अपने संबोधन में CCRH के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने डॉ. गुरमेत की प्रशंसा करते हुए कहा:
“डॉ. गुरमेत का व्यक्तित्व जितना सौम्य और सरल है, उनके इरादे उतने ही मजबूत हैं। उन्होंने सोवा-रिग्पा को विलुप्त होने से बचाया और उसे मुख्यधारा में लाए। एक आयुष परिवार के रूप में, यह सम्मान हम सभी के लिए गर्व का विषय है।”
डॉ. गुरमेत का संदेश: “बड़े लक्ष्य, बड़ा सहयोग”
सम्मान से अभिभूत पद्म श्री डॉ. पद्मा गुरमेत ने अपने संबोधन में युवाओं और शोधकर्ताओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा:
- महत्वाकांक्षा: “जीवन में हमेशा महत्वाकांक्षी लक्ष्य (Ambitious Goals) निर्धारित करें और उन्हें पाने के लिए तब तक न रुकें जब तक सफलता न मिल जाए।”
- सहयोग की शक्ति: उन्होंने विशेष रूप से CCRH और लेह स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा (NISR) के बीच चल रहे संयुक्त अनुसंधान (Joint Research) की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब दो चिकित्सा पद्धतियां मिलती हैं, तो विज्ञान का नया अध्याय लिखा जाता है।
कौन हैं डॉ. पद्मा गुरमेत?
डॉ. पद्मा गुरमेत लद्दाख के एक प्रसिद्ध ‘आमची’ (सोवा-रिग्पा चिकित्सक) और विद्वान हैं। वे वर्तमान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा (NISR), लेह के निदेशक हैं। उन्हें 2026 में चिकित्सा क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्म श्री दिया गया है। उनके प्रयासों से ही सोवा-रिग्पा को आयुष मंत्रालय के तहत आधिकारिक मान्यता मिली है।
आयुष एकता का संदेश
यह समारोह इस बात का प्रमाण है कि आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद, होम्योपैथी, सोवा-रिग्पा और अन्य पद्धतियां अब ‘साइलो’ (Silos) में काम नहीं कर रही हैं, बल्कि एक-दूसरे का हाथ थामकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण में जुटी हैं।
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रिपोर्ट: आयुष्य पथ दिल्ली डेस्क | स्रोत: CCRH/Ayush Ministry

