AIIA व ResearchAyu का समझौता: गठिया और डायबिटीज पर बड़ी रिसर्च
गठिया और डायबिटीज के इलाज में आएगी क्रांति: AIIA और ResearchAyu ने मिलाया हाथ, वैज्ञानिक रिसर्च का नया अध्याय
नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 (आयुष्य पथ न्यूज): क्या आयुर्वेद में घुटनों के घिसे हुए कार्टिलेज को दोबारा बनाने या डायबिटीज को जड़ से कंट्रोल करने का वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Evidence) मौजूद है? इसी सवाल का ठोस जवाब ढूंढने और इलाज के नए प्रोटोकॉल बनाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है।
आयुष मंत्रालय के अधीन देश के शीर्ष संस्थान अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली और मुंबई स्थित संस्था ResearchAyu (Healthy Life Innovations Pvt. Ltd.) ने एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
गंभीर रोगों पर ‘एविडेंस-बेस्ड’ प्रहार
29 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित यह समझौता केवल एक कागजी कार्यवाही नहीं, बल्कि उन लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जो एलोपैथी में स्थाई इलाज न मिलने से निराश हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ‘कठिन से इलाज’ (Difficult-to-treat) बीमारियों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आयुर्वेदिक समाधान तैयार करना है।
किन बीमारियों पर होगा सबसे पहले वार?
इस रिसर्च पार्टनरशिप के पहले चरण में तीन प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों को चुना गया है:
- ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis): घुटनों और जोड़ों का दर्द। विशेष रूप से कार्टिलेज (हड्डी के बीच की गद्दी) के क्षय को रोकने और रिजनरेशन पर शोध।
- डायबिटीज (Diabetes): टाइप-2 डायबिटीज और इसकी जटिलताओं (जैसे आंखों और नसों पर असर – Retinopathy/Neuropathy) का प्रबंधन।
- ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune Diseases): जब शरीर की रक्षा प्रणाली खुद ही दुश्मन बन जाए (जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस, थायरॉइड)।
30 लाख थेरेपी सेशंस का निचोड़ अब AIIA के पास
इस समझौते का सबसे बड़ा पहलू ‘अनुभव और विज्ञान’ का मिलन है।
- ResearchAyu की ताकत: उनके पास 30 लाख से अधिक थेरेपी सेशंस का डेटा और क्लिनिकल अनुभव है, खासकर घुटनों के कार्टिलेज रिजनरेशन (Cartilage Regeneration) के क्षेत्र में।
- AIIA की भूमिका: आयुष मंत्रालय का यह संस्थान इस डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण (Clinical Validation) करेगा और नए ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल विकसित करेगा।
“यह MoU आयुर्वेद को आधुनिक मेडिकल रिसर्च की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब पारंपरिक ज्ञान को एविडेंस-बेस्ड अप्रोच (साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण) के साथ दुनिया के सामने रखा जाएगा।”
समारोह की झलकियां
AIIA परिसर में आयोजित इस समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति और ResearchAyu के फाउंडर व CEO श्री दीपक पाटिल ने दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया। इस मौके पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता और चिकित्सक भी मौजूद रहे।
भविष्य की राह
इस साझेदारी से उम्मीद है कि आने वाले समय में ऑस्टियोआर्थराइटिस और डायबिटीज के मरीजों को मानकीकृत (Standardized) आयुर्वेदिक दवाएं और उपचार मिल सकेंगे, जो न केवल प्रभावी होंगे बल्कि आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर भी खरे उतरेंगे।
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रिपोर्ट: आयुष्य पथ न्यूज डेस्क | स्थान: नई दिल्ली

