सर्दियों में रूखी त्वचा का ‘आयुर्वेदिक इलाज’: अभ्यंगम (तेल मालिश) से पाएं मखमली त्वचा और जोड़ों के दर्द से राहत
सर्दियों में त्वचा की सूखापन और रूखेपन से बचें: महंगी क्रीम नहीं, आयुर्वेद का ‘अभ्यंगम’ है असली समाधान
नई दिल्ली | आयुष्य पथ वेलनेस डेस्क | 27 दिसंबर 2025
दिसंबर की सर्द हवाएं हमारी त्वचा से प्राकृतिक नमी छीन लेती हैं, जिससे त्वचा रूखी, बेजान और फटी हुई हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में शरीर में ‘वात दोष’ (रूखापन) बढ़ जाता है। इसका एकमात्र स्थायी समाधान है— ‘अभ्यंगम’ (Abhyangam) या औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश।
अभ्यंगम क्या है?
संस्कृत में ‘अभ्यंग’ का अर्थ है—अंगों पर तेल का लेपन। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह केवल त्वचा को चिकना करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शरीर को ‘स्नेहन’ (Oleation) प्रदान करता है, जो वात दोष को शांत करता है, जोड़ों को चिकनाई देता है और शरीर को अंदर से पोषण देता है।
अभ्यंगम कैसे करें? (सही विधि)
- तेल: सर्दियों के लिए तिल का तेल (Sesame Oil) या सरसों का तेल सर्वश्रेष्ठ है। इसे हल्का गुनगुना करें।
- शुरुआत: सिर (Scalp), कान और कानों के पीछे से शुरू करें।
- गति (Motion): हाथों-पैरों पर लंबी मालिश करें और जोड़ों (घुटने, कोहनी) पर गोलाकार (Circular) मालिश करें।
- तलवे: पैरों के तलवों की मालिश जरूर करें, इससे नींद अच्छी आती है।
- स्नान: तेल लगाने के 15-20 मिनट बाद गुनगुने पानी से नहाएं ताकि तेल त्वचा में समा जाए।
मुख्य लाभ (Key Benefits)
- ✅ मखमली त्वचा: त्वचा में नमी और कोमलता बढ़ती है, रूखापन खत्म होता है।
- ✅ बेहतर रक्त संचार: शरीर में गर्माहट आती है और ठंड कम लगती है।
- ✅ दर्द निवारण: जोड़ों का दर्द, कमर दर्द और जकड़न (Stiffness) दूर होती है।
- ✅ तनाव मुक्ति: यह कोर्टिसोल लेवल कम करता है, जिससे मानसिक शांति और अच्छी नींद मिलती है।
“हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है। वात प्रकृति वालों को तिल का तेल, पित्त वालों को नारियल तेल, और कफ प्रकृति वालों को सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए। यदि आपको बुखार या अपच है, तो मालिश न करें।”
— योगाचार्य सुषमा, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ
निष्कर्ष: सर्दियों में अभ्यंगम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यह न केवल आपको सुंदर त्वचा देगा, बल्कि मौसमी बीमारियों से भी बचाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता और आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक या आयुर्वेदिक वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

