9वां सिद्ध दिवस: “सिद्ध अतीत का अवशेष नहीं, जीवित परंपरा है” – उपराष्ट्रपति ने चेन्नई में किया भव्य उद्घाटन
9वां सिद्ध दिवस: “सिद्ध अतीत का अवशेष नहीं, जीवित परंपरा है” – उपराष्ट्रपति ने चेन्नई में किया भव्य उद्घाटन
चेन्नई/नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (05 जनवरी 2026)भारत की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से एक ‘सिद्ध चिकित्सा’ की वैश्विक स्वीकार्यता को एक नई ऊंचाई मिली है। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के कलाईवनार आरंगम में 9वें सिद्ध दिवस (9th Siddha Day) समारोह का भव्य उद्घाटन किया। इस वर्ष का समारोह “सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ” (Siddha for Global Health) की थीम पर आयोजित किया गया。
समारोह में केंद्रीय आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव और तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री श्री मा. सुब्रमण्यन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और चिकित्सक उपस्थित थे。
उपराष्ट्रपति का संदेश: “जीवित परंपराओं का संरक्षण जरूरी”
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा के कारण कई अमूल्य ग्रंथ और पांडुलिपियां खतरे में थीं। उन्होंने विद्वानों से अपील की कि वे इस प्राचीन ज्ञान को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने हेतु अनुसंधान और दस्तावेज़ीकरण पर ध्यान दें। उन्होंने सिद्ध चिकित्सा को आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों के लिए एक ‘समग्र और निवारक’ समाधान बताया。
WHO में शामिल होना बड़ी उपलब्धि: आयुष मंत्री
केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय ने परिवर्तनकारी विकास किया है। उन्होंने सिद्ध चिकित्सा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साझा की:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ICD-11 (International Classification of Diseases) में ‘सिद्ध रुग्णता संहिता’ (Siddha Morbidity Codes) को शामिल किया जाना सिद्ध चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा。
5 दिग्गजों का सम्मान (Siddha Awards 2026)
समारोह का मुख्य आकर्षण उन पांच प्रतिष्ठित हस्तियों का सम्मान था, जिन्होंने सिद्ध चिकित्सा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उपराष्ट्रपति ने इन्हें सम्मानित किया:
- डॉ. बी. माइकल जयराज
- डॉ. टी. कन्नन राजाराम
- स्वर्गीय डॉ. आई. सोर्नामरिअम्मल (मरणोपरांत)
- डॉ. मोहना राज
- प्रो. डॉ. वी. बानुमति
इन दिग्गजों को अनुसंधान, शिक्षा और पांडुलिपि संरक्षण में उनके असाधारण योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया。
भविष्य की राह
उपराष्ट्रपति ने युवा छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सिद्ध चिकित्सा में निरंतर शोध से लाइलाज बीमारियों के लिए स्थायी इलाज मिल सकता है। उन्होंने शोधकर्ताओं से ‘जिम्मेदार और साक्ष्य-आधारित अभ्यास’ (Evidence-based practice) के माध्यम से जनता का विश्वास जीतने का आह्वान किया。
(स्रोत: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो – PIB, रिलीज आईडी: 2211118)

