विश्व ब्रेल दिवस 2026: ‘स्पर्श की अनुभूति का उत्सव’—भारती ब्रेल 2.1 का मसौदा जारी, जानें दृष्टिबाधितों के नए अधिकार
विश्व ब्रेल दिवस 2026: ‘स्पर्श की अनुभूति का उत्सव’—भारती ब्रेल 2.1 का मसौदा जारी, जानें दृष्टिबाधितों के नए अधिकार
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (05 जनवरी 2026)लुई ब्रेल की जयंती (4 जनवरी) के अवसर पर पूरे देश ने ‘स्पर्श की अनुभूति का उत्सव’ (Celebration of Touch) मनाया। भारत सरकार ने इस दिन को केवल एक औपचारिकता न मानकर, दृष्टिबाधितों के लिए शिक्षा और गरिमा का प्रवेश द्वार बताया है।
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 50,32,463 दृष्टिबाधित व्यक्ति हैं। इन लाखों लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने इस वर्ष एक बड़ा कदम उठाया है।
विश्व ब्रेल दिवस 2026 के अवसर पर, सरकार ने ‘भारती ब्रेल 2.1’ का मसौदा (Draft) सार्वजनिक फीडबैक के लिए जारी किया है। यह नई संहिता भारतीय भाषाओं में ब्रेल को डिजिटल युग के अनुरूप और अधिक सुलभ बनाएगी। इसके साथ ही तमिल, मलयालम और ओडिया जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षण शुरू करने की घोषणा की गई है。
ब्रेल: सिर्फ डॉट्स नहीं, आजादी है
ब्रेल कोई भाषा नहीं, बल्कि एक कोड है। यह छह बिंदुओं (Dots) के सेल पर आधारित एक स्पर्शजन्य प्रणाली है, जिसे फ्रांस के लुई ब्रेल ने 19वीं सदी में विकसित किया था।
भारत में ब्रेल का आगमन 1887 में ही हो गया था, लेकिन आजादी के बाद 1951 में ‘भारती ब्रेल’ (Bharati Braille) को राष्ट्रीय मानक के रूप में स्वीकार किया गया। यह एक ऐसा कोड है जो भारत की विभिन्न भाषाओं को एक समान स्पर्श-लिपि में पिरोता है।
अधिकार-आधारित नई पहलें
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPWD Act) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत सरकार ने ब्रेल को ‘चैरिटी’ से हटाकर ‘अधिकार’ (Right) बना दिया है। प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
- मुफ्त शिक्षा सामग्री: 18 वर्ष की आयु तक दृष्टिबाधित छात्रों को ब्रेल पुस्तकें और सहायक उपकरण मुफ्त मिलेंगे।
- समावेशी शिक्षा: सभी शैक्षणिक संस्थानों में सुलभ ढांचा और ब्रेल-अनुकूल वातावरण अनिवार्य कर दिया गया है।
- सुगम्य भारत अभियान: 2015 में शुरू हुए इस अभियान के तहत इमारतों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को दृष्टिबाधितों के अनुकूल बनाया जा रहा है।
भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांगजन अधिकार कन्वेंशन (UNCRPD) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, यह सुनिश्चित कर रही है कि तकनीक और स्पर्श का यह संगम किसी भी नागरिक को पीछे न छूटने दे।
(स्रोत: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो – PIB, रिलीज आईडी: 2211300)

