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विश्व कुष्ठ दिवस: भेदभाव मिटाएं, 2027 तक कुष्ठ मुक्त भारत बनाएं

World Leprosy Day 2026 India: Prataprao Jadhav Message and Ayurveda

“भेदभाव नहीं, अपनापन चाहिए”: विश्व कुष्ठ दिवस पर आयुष मंत्री की भावुक अपील – क्या 2027 तक भारत होगा ‘कुष्ठ मुक्त’?

नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 (आयुष्य पथ न्यूज): आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (शहीद दिवस) पर उन्हें नमन कर रहा है। लेकिन 30 जनवरी का दिन एक और बड़े संकल्प का दिन है—‘कुष्ठ निवारण’ (Anti-Leprosy Day)। गांधीजी का मानना था कि कुष्ठ रोगियों की सेवा ईश्वर की सेवा है। उनके इसी स्वप्न को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने आज के दिन विशेष जागरूकता अभियान का आह्वान किया है।

इस अवसर पर केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने एक ऐसा संदेश दिया है जो बीमारी से ज्यादा समाज की सोच को बदलने पर केंद्रित है।

“भेदभाव न करें, मिलकर रहें संग…”

श्री प्रतापराव जाधव (@mprataprao) ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए देशवासियों से कुष्ठ रोगियों के प्रति नजरिया बदलने की अपील की है। उन्होंने लिखा:

“भेदभाव न करें, मिलकर रहें संग।
दया भाव ही है, कुष्ठ रोग का अंत।”

मंत्री ने जोर देकर कहा कि कुष्ठ रोग (Leprosy) कोई दैवीय प्रकोप या पाप नहीं है, बल्कि एक जीवाणु संक्रमण (Bacterial Infection) है, जिसका इलाज पूरी तरह संभव है। उन्होंने अपील की कि आधुनिक चिकित्सा (MDT) के साथ-साथ आयुर्वेद और उचित जीवनशैली अपनाकर हम इस बीमारी को जड़ से मिटा सकते हैं।

2026 की थीम: “इलाज संभव है, चुनौती कलंक है”

इस वर्ष की वैश्विक थीम “Leprosy is curable, the real challenge is stigma” (कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, असली चुनौती कलंक है) रखी गई है।

हकीकत क्या है?

  • संक्रमण: यह Mycobacterium leprae बैक्टीरिया से होता है। यह बहुत कम संक्रामक है। यह छूने, साथ बैठने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता।
  • इलाज: सरकारी अस्पतालों में मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) मुफ्त उपलब्ध है। अगर शुरुआती दौर में इलाज शुरू हो जाए, तो शरीर में कोई विकलांगता नहीं आती।
  • सामाजिक डर: सबसे बड़ी बाधा बीमारी नहीं, बल्कि समाज का डर है, जिसके कारण मरीज अपनी बीमारी छुपाते हैं और इलाज में देरी करते हैं।

भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय?

आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के कुल कुष्ठ रोगियों में से लगभग 53% भारत में हैं। यह एक बड़ी चुनौती है।

  • सरकार का लक्ष्य: भारत सरकार ने वर्ष 2027 तक देश को कुष्ठ-मुक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है (जबकि WHO का लक्ष्य 2030 है)।
  • गांधीजी का विजन: गांधीजी ने स्वयं परसुरे शास्त्री (एक कुष्ठ रोगी) की सेवा की थी ताकि समाज को यह संदेश मिले कि कुष्ठ रोगी अछूत नहीं हैं।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण

आयुष मंत्रालय के अनुसार, कुष्ठ रोग के प्रबंधन में आयुर्वेद एक सहायक भूमिका निभा सकता है:

  • शोधन चिकित्सा (Panchakarma): शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर रिकवरी तेज करना।
  • रसायन चिकित्सा: इम्यूनिटी बढ़ाना और घावों (Ulcers) को भरने में औषधियों (जैसे खदिर, बाकुची, नीम) का प्रयोग।

जनता से अपील: एक कदम मानवता की ओर

यदि आपके शरीर पर कोई ऐसा हल्का रंग का दाग (Hypopigmented patch) दिखे जिसमें सुन्नपन हो (पसीना न आता हो, खुजली या जलन न हो), तो इसे नजरअंदाज न करें। यह कुष्ठ का शुरुआती लक्षण हो सकता है। तुरंत डॉक्टर से मिलें।

याद रखें: कुष्ठ लाइलाज नहीं है, लाइलाज है हमारी अज्ञानता। आइए, आज शपथ लें—कुष्ठ मिटाएंगे, भेदभाव नहीं।


रिपोर्ट: आयुष्य पथ सोशल डेस्क | स्रोत: आयुष मंत्रालय/WHO

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