वेलनेस ट्रेंड्स 2026: भारत में ‘यौन स्वास्थ्य’ और ‘विमेन केयर’ बनी पहली पसंद, स्पा से निकलकर दिनचर्या में शामिल हुई वेलनेस
वेलनेस ट्रेंड्स 2026: भारत में ‘यौन स्वास्थ्य’ और ‘विमेन केयर’ बनी पहली पसंद, स्पा से निकलकर दिनचर्या में शामिल हुई वेलनेस
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (04 जनवरी 2026)भारत में ‘वेलनेस’ (Wellness) की परिभाषा अब बदल रही है। यह अब केवल अमीर वर्ग के लिए ‘स्पा हॉलिडे’ या ‘लग्जरी रिट्रीट’ तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। द हिंदू (The Hindu) की हालिया रिपोर्ट (2 जनवरी 2026) के अनुसार, वर्ष 2026 में भारतीय वेलनेस उद्योग तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है—यौन स्वास्थ्य, महिलाओं की देखभाल और रिकवरी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तनाव और डिजिटल थकान के बीच लोग अब ‘दिखावटी स्वास्थ्य’ के बजाय ‘आंतरिक शांति’ और दीर्घायु (Longevity) की तलाश कर रहे हैं。
1. महिलाओं की देखभाल: जीवनचक्र पर फोकस
2026 में महिलाओं का स्वास्थ्य चर्चा के केंद्र में है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाएं अब केवल सौंदर्य उपचार नहीं, बल्कि अपने शरीर के जैविक चरणों के लिए वैज्ञानिक और पारंपरिक समर्थन मांग रही हैं।
- मासिक धर्म से रजोनिवृत्ति तक: फर्टिलिटी इश्यूज, पेरिमेनोपॉज, मेनोपॉज और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रोग्राम्स की मांग बढ़ी है।
- विशेषज्ञ की राय: ‘आनंद इन द हिमालयस’ के आयुर्वेद प्रमुख डॉ. श्रीलाल संकर कहते हैं, “महिलाओं का वेलबीइंग ट्रांजिशनल (परिवर्तनशील) होता है। यह उनके जीवन के विभिन्न जैविक और भावनात्मक चरणों से गहराई से जुड़ा है, जिस पर अब ध्यान दिया जा रहा है” .
2. यौन स्वास्थ्य और रिकवरी (Sexual Health & Recovery)
प्रोफेशनल प्रेशर और ‘डिजिटल ओवरलोड’ ने लोगों को मानसिक रूप से थका दिया है। ऐसे में रिकवरी अब एक विकल्प नहीं, जरूरत बन गई है।
लोग अब छुट्टियों में सिर्फ घूमने नहीं जाते, बल्कि ‘रिस्टोरेटिव प्रोग्राम्स’ (Restorative Programs) और ‘बायोलॉजिकल रेजिलिएंस’ बढ़ाने वाले स्टेकेशन चुन रहे हैं। यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) अब कोई टैबू नहीं रहा, बल्कि इसे समग्र स्वास्थ्य का एक अनिवार्य हिस्सा माना जा रहा है .
3. ‘रूटेडनेस’: जड़ों की ओर वापसी
2026 का सबसे बड़ा ट्रेंड है—‘रूटेडनेस’ (Rootedness)। इसका अर्थ है अपनी जड़ों और प्राचीन ज्ञान से दोबारा जुड़ना।
योग, ब्रिथवर्क (प्राणायाम), मेडिटेशन और आत्म-चिंतन (Introspection) अब शहरों के फ्लैट्स और ऑफिसों में जगह बना चुके हैं। ‘फॉरेस्ट बाथिंग’ (वन स्नान) जैसी प्रकृति-आधारित क्रियाएं अब केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन (Philosophy) बन रही हैं। लोग समझ रहे हैं कि स्वास्थ्य का असली राज सांस, भूमि और स्वयं से जुड़ने में है .
यह बदलाव स्पष्ट करता है कि वेलनेस अब एक ‘एस्पिरेशनल’ (महत्वाकांक्षी) चीज नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का अनुशासन है।
(स्रोत: द हिंदू – 2 जनवरी 2026, “Wellness in India 2026: Why sexual health, women’s care and recovery are taking centre stage”)

