रेवाड़ी: बड़ा तालाब में सफाई क्रांति, मिली ऐतिहासिक सुरंग | Ayushya Path
इतिहास से जुड़ी ‘सफाई क्रांति’: 525 साल पुराने ‘बड़ा तालाब’ में उतरा ‘आई लव रेवाड़ी’ परिवार, सुरंग देखकर दंग रह गए लोग
रेवाड़ी, 2 फरवरी 2026 (आयुष्य पथ ब्यूरो): दुष्यंत कुमार की पंक्तियाँ “हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए…” कल रेवाड़ी के ऐतिहासिक बड़ा तालाब पर सच होती दिखाई दीं। 1 फरवरी 2026 की तारीख रेवाड़ी के इतिहास में गर्व और गौरव के साथ दर्ज हो गई, जब शहर की सबसे बड़ी ऐतिहासिक धरोहर—‘बड़ा तालाब’ (Bada Talab)—सफाई क्रांति के वीरों के स्पर्श से जीवंत हो उठी।
अपने 67वें चरण में पहुंची इस ‘सफाई क्रांति’ ने न केवल गंदगी को साफ किया, बल्कि शहर के गौरवशाली इतिहास को फिर से जीने का मौका दिया। इस अभियान का नेतृत्व रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने किया, जबकि ‘आई लव रेवाड़ी’ परिवार के सैकड़ों सदस्यों ने श्रमदान किया।
तालाब की तलहटी में ‘सफाई का सर्जिकल स्ट्राइक’
करीब सवा पांच सौ साल (525 years) पहले बने इस तालाब ने दशकों बाद ऐसी आत्मीयता महसूस की।
- अभियान: सुबह होते ही सफाई सैनिक तालाब की तलहटी (Bottom), गलियारों और सीढ़ियों (Paidi) पर जमी सालों पुरानी गंदगी और गाद को हटाने के लिए टूट पड़े।
- जोश: वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के चेहरे पर एक अलग ही उत्साह था। यह केवल सफाई नहीं, बल्कि अपनी विरासत को बचाने का एक अनुष्ठान था।
सुरंग का रहस्य और इतिहास से साक्षात्कार
सफाई के दौरान एक अद्भुत क्षण आया जब लोगों ने तालाब के अंदर बनी उस ऐतिहासिक सुरंग को पहली बार अपनी आंखों से देखा, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह सीधे रामपुरा तक जाती है।
- INTACH का संबोधन: ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने वाली संस्था INTACH के जिला संयोजक सुधीर भार्गव ने इस मौके पर तालाब के इतिहास और रेवाड़ी के गौरवशाली अतीत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उस दौर की जीवनशैली और जल प्रबंधन कितना वैज्ञानिक था।
शिवालय में योग और सनातन की छटा
क्रांति का समापन तेज सरोवर स्थित शिवालय के प्रांगण में हुआ। यहां का माहौल आध्यात्मिक और ऊर्जावान हो गया जब आयुष्य मन्दिरम् (Ayushya Mandiram), मॉडल टाउन की प्रमुख और प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित योगाचार्य सुषमा जी ने सभी स्वयंसेवकों को योग का अभ्यास कराया।
“सफाई बाहरी हो या भीतरी, दोनों जरूरी हैं। योगाचार्य सुषमा के सत्र ने श्रमदान के बाद सभी को मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा से भर दिया। यह क्षण परमात्मा से सीधे जुड़ाव जैसा था।”
सम्मान और समर्पण
इस महायज्ञ में समाजसेवा और समर्पण के कई रंग देखने को मिले:
- भोजन सेवा: लाला भाई त्रिवेंद्र गुप्ता, समाजसेवी चिरंजी लाल बल्लूवाड़ा और रिंकू जैन ने अपने हाथों से तैयार स्वादिष्ट अल्पाहार सभी को परोसा, जिससे पारिवारिक माहौल बन गया।
- सांस्कृतिक रंग: बुजुर्ग प्रभु दयाल ने मोहम्मद रफी के गीतों से समा बांध दिया।
- विशेष सम्मान:
- शिवालय मंदिर के प्रबंधक कुलदीप गुर्जर की पत्नी मोनिका गुर्जर को मंदिर परिसर के चारों तरफ स्वच्छता बनाए रखने के लिए सम्मानित किया गया।
- सफाई क्रांति के मजबूत स्तंभ अशोक भाटोटिया जी का भी विशेष सम्मान किया गया।
राजनीति से परे ‘जन-आंदोलन’
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि यह अभियान राजनीति से कोसों दूर है। इसमें वे लोग शामिल हैं जो रेवाड़ी को अपनी ‘मां’ मानते हैं। विधायक लक्ष्मण सिंह यादव की सक्रिय भागीदारी ने आलोचकों को करारा जवाब दिया है।
अगला पड़ाव: 8 फरवरी
इस क्रांति का कारवां रुका नहीं है। निर्णय लिया गया है कि अगली 68वीं सफाई क्रांति (8 फरवरी) को भी इसी विराट तालाब के अगले हिस्से में चलेगी, जो अभी भी गंदगी से मुक्त होने का इंतजार कर रहा है।
“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” — यह पंक्तियां रेवाड़ी के इन वीरों पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं।
रिपोर्ट: आयुष्य पथ सिटी डेस्क | स्रोत: रणघोष न्यूज़ (YouTube Coverage)

