आयुर्वेदिक सर्जरी पर संग्राम: IMA ने आंध्र के स्वास्थ्य मंत्री के बयान को बताया ‘अवैज्ञानिक’ और ‘भ्रामक’
आयुर्वेदिक सर्जरी पर संग्राम: IMA ने आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के बयान को बताया ‘अवैज्ञानिक’ और ‘भ्रामक’, दी आंदोलन की चेतावनी
विजयवाड़ा | आयुष्य पथ डेस्क (28 दिसंबर 2025)चिकित्सा जगत में ‘मॉडर्न मेडिसिन बनाम आयुर्वेद’ (Modern Medicine vs Ayurveda) की बहस एक बार फिर गर्मा गई है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की राज्य इकाई ने स्वास्थ्य मंत्री सत्या कुमार यादव के उस हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने की बात कही थी।
IMA ने इस कदम को सीधे तौर पर “भ्रामक, अवैज्ञानिक और मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़” करार दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि बिना उचित आधुनिक प्रशिक्षण के ‘क्रॉस-पैथी’ (Cross-pathy) की अनुमति देना गंभीर परिणाम ला सकता है।
क्या था मंत्री का बयान?
विवाद की शुरुआत 23 दिसंबर 2025 को हुई, जब आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्या कुमार यादव ने एक कार्यक्रम में घोषणा की कि “सर्जिकल विषयों में पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) कोर्स पूरा करने वाले आयुर्वेदिक डॉक्टरों को चुनिंदा सर्जरी स्वतंत्र रूप से करने की अनुमति दी जाएगी।”
IMA का कड़ा विरोध: “सर्जरी केवल तकनीकी कौशल नहीं है”
IMA ने एक विस्तृत प्रेस नोट जारी कर सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। संघ ने कहा कि सर्जरी को केवल ‘हाथ की सफाई’ या तकनीकी कौशल समझना भारी भूल है।
IMA ने अपने विरोध में निम्नलिखित प्रमुख तर्क दिए:
- गहन प्रशिक्षण का अभाव: सर्जिकल प्रक्रियाओं के लिए एक संरचित और पर्यवेक्षित (Supervised) प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान में केवल MBBS और MS/MCh पाठ्यक्रमों के माध्यम से ‘नेशनल मेडिकल कमीशन’ (NMC) द्वारा प्रदान किया जाता है।
- जटिल विज्ञान: सर्जरी के लिए एनाटॉमी (शरीर रचना), फिजियोलॉजी (शरीर क्रिया), पैथोलॉजी, एनेस्थीसिया और पेरिऑपरेटिव क्रिटिकल केयर (ऑपरेशन के दौरान और बाद की देखभाल) का गहरा ज्ञान होना अनिवार्य है। यह ज्ञान आधुनिक चिकित्सा पाठ्यक्रम का हिस्सा है, आयुर्वेद का नहीं।
- नैतिकता का उल्लंघन: समकक्ष प्रशिक्षण और मान्यता के बिना क्रॉस-प्रैक्टिस (एक पैथी के डॉक्टर द्वारा दूसरी पैथी का काम करना) न तो साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) है और न ही नैतिक रूप से उचित है।
मामला सुप्रीम कोर्ट में: ‘अदालत की अवमानना’ का खतरा
IMA ने सरकार को याद दिलाया कि आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देने का मुद्दा पहले से ही देश की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है।
संघ ने कहा, “वर्ष 2020 में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अगली सुनवाई 8 जनवरी 2026 को निर्धारित है। ऐसे समय में जब मामला ‘सब-ज्यूडिस’ (Sub-judice) है, किसी भी मंत्री या सरकार द्वारा नीतिगत घोषणा करना कानूनी रूप से अस्थिर है और यह न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन हो सकता है।”
आगे क्या?
IMA ने आंध्र प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री से अपील की है कि वे इस बयान को तुरंत वापस लें और ऐसी कोई भी नीति बनाने से बचें जो सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करती हो। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मुद्दे का तत्काल समाधान नहीं किया गया, तो वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होंगे।
यह विवाद एक बार फिर इस प्रश्न को खड़ा करता है कि क्या पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एकीकरण मरीजों की सुरक्षा की कीमत पर किया जाना चाहिए?
(स्रोत: द हिंदू, 28 दिसंबर 2025 – मूल लेख यहाँ पढ़ें)

