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भ्रामरी प्राणायाम और ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’: वह विज्ञान जिसे आधुनिक डॉक्टर भी अब मान रहे हैं

योग में ‘भ्रामरी’ (Humming Bee Breath) को सदियों से मन को शांत करने के लिए जाना जाता है। लेकिन 1998 में चिकित्सा के नोबेल पुरस्कार ने इस प्राणायाम को देखने का वैज्ञानिक नजरिया ही बदल दिया। वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारी नाक और साइनस गुहाओं (Sinus Cavities) में ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ (NO) नामक एक गैस बनती है, जो हमारे स्वास्थ्य की रक्षक है।

15 गुना अधिक सुरक्षा स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन में पाया गया कि जब हम भ्रामरी की तरह ‘हम्म’ (Humming) की ध्वनि निकालते हैं, तो नाक में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन सामान्य सांस लेने की तुलना में 15 गुना बढ़ जाता है [1]।

नाइट्रिक ऑक्साइड क्यों जरूरी है?

  1. एंटी-वायरल गुण: यह गैस नाक के स्तर पर ही वायरस और बैक्टीरिया को बेअसर करने की क्षमता रखती है, जिससे श्वसन संक्रमण (Respiratory Infections) का खतरा कम होता है।
  2. रक्तचाप नियंत्रण: यह एक ‘वेसोडिलेटर’ (Vasodilator) है, यानी यह रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करती है, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है और हृदय पर भार घटता है।
  3. ऑक्सीजन अवशोषण: यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाती है।

करने की सही विधि

  • सुखासन या पद्मासन में बैठें।
  • ‘षण्मुखी मुद्रा’ (Shanmukhi Mudra) का प्रयोग करें—अंगूठे से कान बंद करें और उंगलियों से आँखों को ढकें।
  • लंबी सांस लें और छोड़ते समय गले से भंवरे की तरह गुंजन करें।
  • कम्पन (Vibration) को मस्तिष्क के केंद्र में महसूस करें।

सावधानी इसे खाली पेट करें। यदि कान में संक्रमण है तो इसका अभ्यास न करें।


संदर्भ (References):

  1. Weitzberg, E., & Lundberg, J. O. (2002). “Humming Greatly Increases Nasal Nitric Oxide.” American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine.
  2. Ni, Z., et al. “Nitric Oxide and Viral Infection.” Nature Reviews Microbiology.

अस्वीकरण (Disclaimer): Disclaimer: Content on Ayushya Path is for informational purposes only. Do not rely on this for treating acute infections like COVID-19 without medical advice.

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