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आयुष सचिव का मुंबई दौरा: RRIUM यूनानी केंद्र का आधुनिकीकरण

RRIUM Mumbai: Unani Medicine Heritage & Modernization | Ayushya Path
आयुष नीतियां एवं पहल

विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम: आयुष सचिव ने किया मुंबई के RRIUM ‘सह-स्थापना केंद्र’ का दौरा

भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवा (Modern Healthcare) के साथ जोड़ने की दिशा में आयुष मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक मिसाल पेश की है। 17 फरवरी 2026 को आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने मुंबई के प्रतिष्ठित सर जे.जे. अस्पताल परिसर (Sir J.J. Hospital Campus) में स्थित क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवनिर्मित ‘सह-स्थापना केंद्र’ (Co-location Centre) का दौरा किया।

यह दौरा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केंद्र ‘विरासत संरक्षण’ (Heritage Conservation) और ‘आधुनिकीकरण’ (Modernization) के बीच संतुलन का एक जीवंत और उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।

ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और कायाकल्प

RRIUM का यह भवन कोई साधारण इमारत नहीं है; इसका निर्माण वर्ष 1845 में हुआ था। मूल रूप से यह भवन यूनानी चिकित्सा की पारंपरिक विरासत को संजोए हुए था, लेकिन समय के साथ यह जीर्ण-शीर्ण हो चुका था। आयुष मंत्रालय ने इस 181 साल पुरानी ऐतिहासिक संरचना की मूल वास्तुकला, दीवारों और छत को बिना कोई नुकसान पहुंचाए, इसे एक अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर में तब्दील कर दिया है।

1845 में निर्मित ऐतिहासिक भवन
₹3.84 करोड़ नवीनीकरण (Renovation) लागत
100+ दैनिक मरीजों का सफल उपचार

इस नवनिर्मित केंद्र के आंतरिक हिस्सों को आधुनिक उपकरणों, क्लीनिकल रूम्स, डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम और NABL सर्टिफाइड रिसर्च लैब्स से लैस किया गया है। यह न्यूनतम खर्च में अधिकतम परिवर्तन (Maximum Impact with Minimum Expenditure) का शानदार प्रमाण है।

‘सह-स्थापना’ (Co-location) मॉडल: एकीकृत चिकित्सा का नया युग

RRIUM की स्थापना मूल रूप से 1984 में हुई थी, लेकिन अब इसे ‘सह-स्थापना मॉडल’ के तहत सरकारी एलोपैथिक अस्पताल (जे.जे. अस्पताल) के साथ एकीकृत कर दिया गया है। इसके अभूतपूर्व लाभ सामने आ रहे हैं:

  • इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर (एकीकृत स्वास्थ्य सेवा): मरीजों को एक ही छत के नीचे एलोपैथी (Modern Medicine) और यूनानी (Unani) दोनों का लाभ मिल रहा है।
  • क्रॉनिक बीमारियों पर फोकस: यहाँ रोजाना 100 से अधिक मरीजों का उपचार हो रहा है, जिनमें मुख्य रूप से गठिया (Arthritis), त्वचा रोग, पाचन विकार और श्वसन समस्याओं के मरीज शामिल हैं।
  • एविडेंस-बेस्ड रिसर्च: यह केंद्र अब क्लिनिकल ट्रायल्स और यूनानी दवाओं के मानकीकरण (Drug Standardization) के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है।

आयुष सचिव का दौरा और विजन

अपने दौरे के दौरान आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इस इमारत की परिवर्तनकारी छवि की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) और डॉ. कुरैशी की टीम को इस अभूतपूर्व कार्य के लिए बधाई दी।

“यह कदम यूनानी चिकित्सा को मजबूत करने और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा (Integrative Healthcare) को बढ़ावा देने का एक अहम हिस्सा है। हमारा लक्ष्य यूनानी को ‘एविडेंस-बेस्ड’ (साक्ष्य-आधारित) और ‘ग्लोबली बेंचमार्क्ड’ सिस्टम बनाना है, ताकि हर नागरिक को समग्र और किफायती स्वास्थ्य सेवा मिल सके।”

उल्लेखनीय है कि यह दौरा हाल ही में संपन्न हुए ‘यूनानी दिवस 2026’ (Unani Day – 11 फरवरी) के व्यापक कार्यक्रमों का हिस्सा है। इसी क्रम में 14 फरवरी को आयुष राज्य मंत्री (MoS) श्री प्रतापराव जाधव ने इस नवनिर्मित सह-स्थापना केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया था।

व्यापक संदर्भ: वैश्विक स्तर पर यूनानी चिकित्सा

पिछले एक दशक में आयुष मंत्रालय के प्रयासों से यूनानी चिकित्सा पर रिसर्च, पेशेंट केयर और संस्थागत विकास में भारी वृद्धि हुई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा यूनानी के लिए ट्रेनिंग और ट्रीटमेंट गाइडलाइंस जारी करना इस बात का प्रमाण है कि भारत की यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धति अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है।

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अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक एवं जागरूकता उद्देश्य से है। इसमें वर्णित कोई भी सुझाव चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी अभ्यास या जीवनशैली परिवर्तन से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। आयुष्य पथ किसी भी संभावित दुष्परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं है।

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