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टीबी मुक्त भारत में तंबाकू मुक्ति: योग व आयुष की सहायक भूमिका

विशेष स्वास्थ्य रिपोर्ट | आयुष्य पथ

‘टीबी मुक्त भारत’ में तंबाकू मुक्ति: योग, आयुष और औषधीय पौधों की सहायक भूमिका

रेवाड़ी (हरियाणा) | पल्मोनरी और आयुष डेस्क | प्रकाशित: आज

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‘टीबी मुक्त भारत’ (TB Mukt Bharat) अभियान तब तक अपने लक्ष्य को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सकता, जब तक हम तंबाकू और धूम्रपान जैसी आदतों से समाज को मुक्त नहीं करते। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, तंबाकू फेफड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Lung Immunity) को कमजोर करता है और टीबी संक्रमण का खतरा 2-3 गुना बढ़ा देता है। लत छोड़ना एक बड़ी मानसिक और शारीरिक चुनौती है। इस दिशा में, आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) और नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम के साथ मिलकर, ‘आयुष्य पथ’ तंबाकू मुक्ति में योग, प्राणायाम और प्राकृतिक जीवनशैली की एक ‘सहायक चिकित्सा’ (Complementary Therapy) के रूप में भूमिका पर जागरूकता फैला रहा है।

टीबी मुक्त भारत और तंबाकू मुक्ति के लिए प्राकृतिक चिकित्सा और स्वस्थ फेफड़े
प्रकृति और आयुष विज्ञान के माध्यम से स्वस्थ फेफड़ों (प्राणवायु) का निर्माण और व्यसन मुक्ति का संकल्प।

1. योग और प्राणायाम: संकल्प शक्ति और क्रेविंग नियंत्रण

तंबाकू छोड़ने के शुरुआती दिनों में जो तलब (Craving) और तनाव (Withdrawal symptoms) महसूस होता है, उसे प्रबंधित करने में योग अत्यंत उपयोगी साबित हुआ है:

  • उज्जायी प्राणायाम और अनुलोम-विलोम: तलब के समय इन श्वास अभ्यासों का प्रयोग पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) को सक्रिय कर तनाव को कम करने में सहायता करता है।
  • योग निद्रा (Yoga Nidra): अवचेतन मन (Subconscious mind) में सकारात्मक संकल्प (Sankalpa) देने से लत के मानसिक बंधनों को कमजोर करने में मदद मिलती है।
  • त्राटक और ध्यान (Trataka & Meditation): एकाग्रता बढ़ाने वाले ये अभ्यास व्यक्ति के आत्म-नियंत्रण (Self-control) को बढ़ाने में सहायक पाए गए हैं।

2. प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पौधे (NMPB के अनुरूप)

लत छोड़ने का दूसरा महत्वपूर्ण चरण है शरीर में जमे हुए विषाक्त तत्वों को कम करना। NMPB औषधीय पौधों के संरक्षण और उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, जो तंबाकू मुक्ति जैसे कार्यक्रमों में भी सहायक हो सकता है:

  • जल नेति और क्षारीय आहार: ये प्राकृतिक विधियां शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को निकालने में मदद करती हैं।
  • खदिर (कत्था), मुलेठी और लौंग: तंबाकू की तलब लगने पर मुंह की आदत (Oral fixation) को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद में इनका उपयोग अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

“टीबी (क्षय रोग) के उपचार में रोगी की जीवनशैली और फेफड़ों की क्षमता (प्राणवायु) का बड़ा योगदान है। तंबाकू मुक्त जीवन अपनाए बिना ‘टीबी मुक्त भारत’ का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है। योग और आयुर्वेद मनुष्य को एक स्वस्थ और अनुशासित जीवन की ओर ले जाने में सहायक हैं।”

— आचार्य डॉ. जयप्रकाशानन्द, संस्थापक, आयुष्या मन्दिरम् (रेवाड़ी)

🔥 7-दिवसीय सहायक आयुष प्रोटोकॉल

(यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। चिकित्सकीय सलाह अनिवार्य है।)

चरण 1 (Day 1-3): डिटॉक्स और श्वास अभ्यास

सुबह उठकर नींबू-शहद का गुनगुना पानी लें। जल नेति का अभ्यास करें और दिन में 3 बार 5-5 मिनट के लिए गहरी श्वास (Deep Breathing) लें।

चरण 2 (Day 4-5): क्रेविंग नियंत्रण (तलब प्रबंधन)

जब भी तलब लगे, कुछ बार उज्जायी प्राणायाम करें। ‘ओरल फिक्सेशन’ को प्रबंधित करने के लिए मुंह में मुलेठी या लौंग रखें।

चरण 3 (Day 6-7): मानसिक दृढ़ता

रात को सोने से पहले 15 मिनट ‘योग निद्रा’ का अभ्यास करें। स्वयं को स्वस्थ और व्यसन मुक्त होने का मानसिक संकल्प (Sankalpa) दें।


निष्कर्ष

टीबी मुक्त भारत और नशा मुक्त भारत अभियान में तंबाकू मुक्ति एक महत्वपूर्ण कड़ी है। आयुष मंत्रालय, TB Mukt Bharat अभियान और NAPDDR जैसे कार्यक्रमों के साथ मिलकर योग और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाकर हम एक स्वस्थ और व्यसन-मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।

⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer): आयुष्य पथ पर दी गई यह जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। टीबी का उपचार DOTS थेरेपी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें। तंबाकू मुक्ति के लिए राष्ट्रीय टोबैको क्विटलाइन (1800-11-2356) या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। योग और प्राकृतिक उपाय चिकित्सा उपचार के पूरक (Complementary) हैं। कोई भी नया अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रमाणित योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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