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आयुष मंत्रालय का ‘नित्य योग’ मंत्र: पर्वतासन से पाएं पहाड़ जैसी मजबूती और मानसिक शांति

आयुष मंत्रालय का ‘नित्य योग’ मंत्र: पर्वतासन से पाएं पहाड़ जैसी मजबूती और मानसिक शांति | Ayushya Path

आयुष मंत्रालय का ‘नित्य योग’ मंत्र: पर्वतासन से पाएं पहाड़ जैसी मजबूती और मानसिक शांति

भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने के लिए भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार प्रयासरत है। अपने #NityaYoga (दैनिक योग) अभियान के तहत, मंत्रालय ने आज (10 जनवरी) एक अत्यंत सरल लेकिन प्रभावशाली योगासन—‘पर्वतासन’ (Mountain Pose)—को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है।

यह आसन न केवल शरीर को पहाड़ जैसी स्थिरता (Stability) प्रदान करता है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का एक समग्र समाधान भी है।

व्यक्ति पर्वतासन (Mountain Pose/Downward Dog) का अभ्यास करते हुए
चित्र: पर्वतासन (Mountain Pose) रीढ़ और पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है।

पर्वतासन: संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार

मंत्रालय के अनुसार, पर्वतासन का नियमित अभ्यास शरीर और मन दोनों के लिए वरदान है। इसका नाम ‘पर्वत’ (Mountain) पर रखा गया है, जो अडिगता और मजबूती का प्रतीक है।

क्यों खास है यह आसन? (प्रमुख लाभ)

  • गहरी स्ट्रेचिंग (Deep Stretching): यह आसन रीढ़ की हड्डी (Spine) को सीधा और लंबा करता है। साथ ही, यह जांघों के पिछले हिस्से (Hamstrings) और पिंडलियों के लिए एक बेहतरीन स्ट्रेच है, जो घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए बहुत जरूरी है।
  • रक्त संचार में सुधार: इस आसन में सिर हृदय से नीचे होता है (हल्का उलटापन), जिससे मस्तिष्क की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ता है। यह चेहरे पर चमक लाता है और बालों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है।
  • अंगों की मजबूती: यह पेट के आंतरिक अंगों की मालिश करता है, पाचन में सुधार करता है और बाहों व कंधों को मजबूत बनाता है।
  • मानसिक स्पष्टता (Mental Clarity): जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह आसन मन को स्थिर करता है। यह तनाव, चिंता को कम कर मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाता है।
मंत्रालय का संदेश:
“पर्वतासन शारीरिक संतुलन और मानसिक स्पष्टता के लिए एक सरल और प्रभावी अभ्यास है। इसे अपनी दैनिक योग दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।” #NityaYoga

अभ्यास में सरलता

आयुष मंत्रालय ने जोर दिया है कि यह आसन दैनिक अभ्यास के लिए बहुत सरल है। इसे सूर्य नमस्कार के क्रम में भी किया जाता है। सुबह के समय खाली पेट इसका अभ्यास सबसे अधिक लाभकारी होता है।

आइये, आयुष मंत्रालय की इस सलाह को अपनाएं और अपने जीवन को संतुलित व निरोगी बनाएं।

(स्रोत: आयुष मंत्रालय आधिकारिक अपडेट्स एवं #NityaYoga अभियान – 10 जनवरी 2026)

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