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भारत में स्वास्थ्य क्रांति: संक्रामक रोगों से आगे बढ़कर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ और ‘जीनोमिक्स’ के नए युग में प्रवेश – डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत में स्वास्थ्य क्रांति: संक्रामक रोगों से आगे बढ़कर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ और ‘जीनोमिक्स’ के नए युग में प्रवेश – डॉ. जितेंद्र सिंह | Ayushya Path

भारत में स्वास्थ्य क्रांति: संक्रामक रोगों से आगे बढ़कर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ और ‘जीनोमिक्स’ के नए युग में प्रवेश – डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। दशकों तक संक्रामक रोगों (Infectious Diseases) से लड़ने के बाद, भारत अब ‘भविष्यवादी स्वास्थ्य चरण’ (Futuristic Healthcare Phase) में प्रवेश कर चुका है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की।

डॉ. सिंह ने हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (CDFD) का दौरा किया और ‘समर्थ’ (SAMARTH) राष्ट्रीय केंद्र की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि भारत अब मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, जीनोम सीक्वेंसिंग और व्यक्तिगत चिकित्सा के दम पर दुनिया की जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

[Image of genome sequencing process]

जीनोमिक्स में भारत की लंबी छलांग

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत जीनोमिक्स के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। इसके प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:

  • 10,000 जीनोम का डेटाबेस: ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ (Genome India Project) और ‘इंडीजेन प्रोजेक्ट’ के तहत भारत ने अपनी विविध आबादी के 10,000 जीनोम की सीक्वेंसिंग पूरी कर ली है।
  • ‘फिनोम इंडिया’ बायोबैंक: ‘Phenome India National Biobank’ की स्थापना की गई है, जो भविष्य में AI-आधारित डायग्नोस्टिक्स और नई दवाओं की खोज (Drug Discovery) का आधार बनेगा।
  • अगला लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य अब 10 लाख (1 मिलियन) जीनोम सीक्वेंसिंग करना है, जिससे रोगों की सटीक भविष्यवाणी संभव हो सकेगी।
“हम अब उस दौर में हैं जहां समान लक्षण वाले दो मरीजों के लिए भी अलग-अलग चिकित्सा दृष्टिकोण (Treatment Approach) की जरूरत हो सकती है।” — डॉ. जितेंद्र सिंह

क्या है ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’? (Personalized Medicine)

पारंपरिक चिकित्सा में अक्सर “एक दवा सब पर लागू” (One size fits all) का नियम चलता था। लेकिन ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ एक क्रांतिकारी बदलाव है। इसमें किसी व्यक्ति का इलाज उसकी:

  1. जेनेटिक संरचना (Genetic Makeup)
  2. जीवनशैली (Lifestyle)
  3. पर्यावरण (Environment)

के आधार पर किया जाता है। इससे दवाओं का असर (Efficacy) बढ़ता है और साइड इफेक्ट्स कम होते हैं।

[Image of personalized medicine concept]

आयुष और जीनोमिक्स का ‘संगम’

इस भविष्यवादी यात्रा में भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका भी अहम है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयुष मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत एक ‘एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल’ (Integrated Healthcare Model) की ओर बढ़ रहा है।

भविष्य की रणनीति:
आधुनिक विज्ञान (जीनोमिक्स) + पारंपरिक ज्ञान (आयुष/योग) = विकसित भारत का स्वास्थ्य मॉडल।
जहाँ जीनोमिक्स बीमारी के जेनेटिक कारणों का पता लगाएगा, वहीं योग और आयुर्वेद ‘रोकथाम’ (Prevention) और जीवनशैली प्रबंधन का जिम्मा संभालेंगे।

यह दृष्टिकोण भारत को Viksit Bharat@2047 के स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा, जहाँ स्वास्थ्य सेवा केवल ‘इलाज’ तक सीमित नहीं होगी, बल्कि ‘कल्याण’ (Wellness) पर केंद्रित होगी।

(स्रोत: PIB प्रेस विज्ञप्ति एवं डॉ. जितेंद्र सिंह का CDFD संबोधन – 9/10 जनवरी 2026)

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