पैथियों की लड़ाई में मरीज क्यों हारे? हमें ‘इंटीग्रेटिव हेल्थ’ की जरूरत है
जब भी स्वास्थ्य चर्चाओं की बात होती है, अक्सर टीवी डिबेट्स में एलोपैथी और आयुर्वेद को आमने-सामने खड़ा कर दिया जाता है। जैसे कि एक को चुनने के लिए दूसरे को खारिज करना जरूरी हो। यह संघर्ष न केवल अनावश्यक है, बल्कि समाज के लिए घातक भी है। एक एक्सीडेंट में टूटी हड्डी जोड़ने के लिए हमें सर्जन की दक्षता चाहिए, लेकिन उस हड्डी को जल्दी भरने और भविष्य में मजबूती के लिए आयुर्वेद का पोषण चाहिए।
मरीज का अधिकार मरीज को इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि उसका इलाज किस ‘पैथी’ से हो रहा है, उसे बस ‘आरोग्य’ और ‘दर्द से मुक्ति’ चाहिए। ‘आयुष्य पथ’ का मानना है कि भारत का भविष्य ‘एकीकृत चिकित्सा’ (Integrative Medicine) में है।
सेतु बनाने का समय डॉक्टर और वैद्य को एक मेज पर बैठना होगा। हमें अहंकार की दीवारों को गिराकर स्वास्थ्य के सेतु बनाने होंगे। जब आधुनिक डायग्नोस्टिक्स (Diagnostics) और प्राचीन ज्ञान (Wisdom) का मिलन होगा, तभी हम एक स्वस्थ भारत की कल्पना कर सकते हैं।
— जयप्रकाश (संपादक, आयुष्य पथ)

