विश्व काला मोतियाबिंद सप्ताह 2026: लक्षण, योग और आयुष उपाय
आयुष्य पथ – नेत्र स्वास्थ्य एवं आयुष बुलेटिन
विश्व काला मोतियाबिंद सप्ताह (World Glaucoma Week 2026)
विश्व काला मोतियाबिंद सप्ताह: ‘दृष्टि के इस खामोश चोर’ को कैसे पहचानें? जानें योग और आयुर्वेद से बचाव के उपाय
नई दिल्ली / भिवानी | 12 मार्च, 2026 | रिपोर्ट: आयुष्य पथ डेस्क
नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 8 मार्च से 14 मार्च 2026 तक ‘विश्व काला मोतियाबिंद सप्ताह’ (World Glaucoma Week) मनाया जा रहा है। काला मोतियाबिंद एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो धीरे-धीरे आँखों की ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) को नष्ट कर देती है। अधिकांश मामलों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, इसीलिए इसे “दृष्टि का चुपके से चोर” (Silent Thief of Sight) कहा जाता है। भारत में 1.2 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं।
👁️ इस वर्ष का मुख्य संदेश:
“आँखों में दर्द, धुंधली दृष्टि या कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो अनदेखा न करें – समय पर जाँच से काला मोतियाबिंद को रोका जा सकता है।”
⚠️ इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी संकेत दिखे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से संपर्क करें:
- दर्द: आँखों में या आँखों के ठीक पीछे/माथे पर भारीपन और दर्द।
- धुंधलापन: दृष्टि का धुंधला होना या चश्मे का नंबर बहुत जल्दी-जल्दी बदलना।
- रंगीन छल्ले (Halos): रोशनी (जैसे बल्ब या कार की हेडलाइट) के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना।
- टनल विजन: किनारों से धुंधला दिखना (यह बीमारी के उन्नत चरण का संकेत है)।
- अन्य: रंगों का फीका पड़ना, रात में देखने में कठिनाई, या आँखों का लाल होना।
किसे है सबसे ज्यादा खतरा? (Risk Factors)
40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, डायबिटीज या उच्च रक्तचाप के मरीज, परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास रखने वाले लोग, और लंबे समय तक स्टेरॉयड (Steroids) दवाओं का सेवन करने वालों को इसका सबसे अधिक खतरा होता है।
🌿 योग और आयुष: काला मोतियाबिंद में सहायक रोकथाम
आयुष मंत्रालय के अनुसार, हालाँकि योग ग्लूकोमा का पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन यह नेत्र दबाव (IOP) को नियंत्रित करने और आँखों की नसों को मजबूत बनाने में बेहद सहायक है:
- त्राटक (Tratak): मोमबत्ती की लौ या किसी बिंदु पर एकटक देखने से आँखों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- पालमिंग (Palming): हथेलियों को रगड़कर आँखों पर रखने से तनाव कम होता है और रक्त संचार बढ़ता है।
- अनुलोम-विलोम प्राणायाम: यह मस्तिष्क और आँखों में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाता है। (तनाव बढ़ने से नेत्र दबाव बढ़ता है, जिसे यह प्राणायाम रोकता है)।
- आयुर्वेदिक उपाय: त्रिफला चूर्ण का सेवन, गुलाब जल का प्रयोग और आँवला आँखों को पोषण देते हैं।
- स्वस्थ जीवनशैली: रात 8 बजे तक हल्का डिनर (जैसा हालिया शोध में सिद्ध हुआ है) और स्क्रीन टाइम में कमी आँखों को आराम देती है।
आयुष्य मन्दिरम् (रेवाड़ी) की योगाचार्या सुषमा कुमारी ने बताया: “हम नियमित त्राटक और प्राणायाम सत्र आयोजित करते हैं जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन हैं। लेकिन काला मोतियाबिंद के संदेह पर सबसे पहले नेत्र विशेषज्ञ से मेडिकल जाँच करवाना सर्वोपरि है।”
क्या करें? (Call to Action)
स्वास्थ्य मंत्रालय का आह्वान है कि 40 वर्ष की आयु के बाद हर 1-2 साल में अपनी आँखों का दबाव (IOP) और फंडस (Fundus) की जाँच अवश्य करवाएँ। विश्व काला मोतियाबिंद सप्ताह के दौरान अपने नजदीकी अस्पतालों में लग रहे फ्री नेत्र जाँच शिविरों का लाभ उठाएँ। “आँखें हैं तो जीवन है – इन्हें सुरक्षित रखें।”
काला मोतियाबिंद (Glaucoma) एक गंभीर और दृष्टि छीनने वाली बीमारी है। इस लेख में बताए गए योग (त्राटक, पालमिंग) और आयुर्वेदिक उपाय केवल ‘सहायक और निवारक’ (Preventive & Supportive) हैं। यह किसी भी मेडिकल इलाज या सर्जरी का विकल्प नहीं हैं। कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ (Eye Specialist) से संपर्क करें और डॉक्टर द्वारा दी गई आई-ड्रॉप्स (Eye Drops) का नियमित उपयोग करें।

