WHO पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025: ‘संभावित खजाना’ और विज्ञान (Traditional Medicine)
‘एक संभावित खजाना’: WHO की नई रणनीति से बदलेगी दुनिया की सेहत, पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगा वैज्ञानिक आधार
नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2025
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। संगठन अगले दशक (2025-2034) के लिए एक नई वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति (Global Traditional Medicine Strategy) अपनाने जा रहा है। इसका उद्देश्य सदियों पुराने ज्ञान को केवल ‘वैकल्पिक’ न मानकर, उसे मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बनाना है—बशर्ते वह विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरे।
इस रणनीति का मूल मंत्र है: “सबूत, नियमन और एकीकरण”। यानी अब पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (TCIM) का उपयोग केवल आस्था के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों (Evidence-based) के आधार पर किया जाएगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीनोमिक्स से खुलेगा ‘खजाना’
पारंपरिक चिकित्सा में अफ्रीका की हर्बल दवाएं, चीन का एक्यूपंक्चर और भारत का योग-ध्यान शामिल है। पहले अक्सर साक्ष्यों की कमी के कारण इन्हें आधुनिक चिकित्सा जगत में खारिज कर दिया जाता था।
WHO के ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की निदेशक डॉ. श्यामा कुरुविल्ला ने इसे “सुपर-एक्साइटिंग” (Super-exciting) दौर बताया है। उन्होंने कहा:
“आज हमारे पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीनोमिक्स और ब्रेन स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकें हैं। अब हम देख सकते हैं कि ध्यान (Meditation) कैसे दिमाग की संरचना बदलता है या एक्यूपंक्चर माइग्रेन पर कैसे असर करता है। विज्ञान अब परंपरा की पुष्टि कर रहा है।”
थाईलैंड का मॉडल: बायोमेडिसिन की जगह पारंपरिक उपचार
थाईलैंड ने दुनिया के सामने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। वहां पारंपरिक उपचारों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनका रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल (RCT) किया गया।
- बड़ा बदलाव (मई 2025): थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मांसपेशियों के दर्द और कब्ज जैसी सामान्य स्थितियों के लिए एलोपैथिक दवाओं (Biomedicine) की जगह पारंपरिक उपचारों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है।
- क्रेटॉम का वैधीकरण: दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल होने वाली सदियों पुरानी जड़ी-बूटी ‘क्रेटॉम’ (Mitragyna speciosa) को 2021 में वैध कर दिया गया और अब इसे आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया जा रहा है।

नई दिल्ली शिखर सम्मेलन और भविष्य की राह
17 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित दूसरे WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में एक नए ‘रणनीतिक तकनीकी सलाहकार समूह’ (STAG) का गठन किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक चिकित्सा दुनिया भर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी (Workforce shortage) को पूरा कर सकती है और ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज’ (Universal Health Coverage) के लक्ष्य को पाने में मदद कर सकती है।
चुनौतियां और स्पष्टीकरण: होम्योपैथी पर WHO का रुख
इस नई रणनीति को लेकर कुछ वैज्ञानिकों ने चिंता जताई थी कि क्या इससे अवैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा? डॉ. कुरुविल्ला ने इस पर स्पष्टता दी है:
“होम्योपैथी, जो 18वीं शताब्दी में विकसित हुई, WHO की पारंपरिक चिकित्सा की परिभाषा में पूरी तरह फिट नहीं बैठती। इसके लिए अभी भी मजबूत प्रमाणों (Evidence) की कमी है। WHO का जोर केवल उन पद्धतियों पर है जो वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो सकें। निवेश न करने का सबसे बड़ा जोखिम यह है कि लोग अपनी पसंदीदा चिकित्सा असुरक्षित तरीके से अपनाएंगे।”
आयुष्य पथ का नजरिया
WHO का यह कदम सिद्ध करता है कि भविष्य ‘संघर्ष’ में नहीं, बल्कि ‘संगम’ में है। जब आधुनिक विज्ञान की सटीकता और प्राचीन चिकित्सा का अनुभव मिल जाएंगे, तो मानव स्वास्थ्य का एक स्वर्णिम अध्याय शुरू होगा। यह भारत के लिए विशेष रूप से गर्व का विषय है क्योंकि आयुर्वेद और योग इस क्रांति के केंद्र में हैं।
स्वस्थ रहें, प्राकृतिक रहें!
- The Guardian (20 Dec 2025): WHO to explore traditional medicine benefits
- WHO Global Summit on Traditional Medicine Reports (New Delhi).
- Thailand Ministry of Public Health Policy Documents (2025).

