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योग शिक्षा का ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ तय: WHO ने जारी की नई गाइडलाइंस, भारत की प्राचीन विद्या को मिली वैज्ञानिक मान्यता

योग शिक्षा का ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ तय: WHO ने जारी की नई गाइडलाइंस, भारत की प्राचीन विद्या को मिली वैज्ञानिक मान्यता | Ayushya Path

योग शिक्षा का ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ तय: WHO ने जारी की नई गाइडलाइंस, भारत की प्राचीन विद्या को मिली वैज्ञानिक मान्यता

भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को एक और बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत के आयुष मंत्रालय ने मिलकर ‘Training in Yoga’ (योग में प्रशिक्षण) नामक तकनीकी रिपोर्ट जारी की है।

यह केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक फ्रेमवर्क है जो योग को दुनिया भर में एक ‘मानकीकृत चिकित्सा पद्धति’ के रूप में स्थापित करेगा। इसका सीधा अर्थ है कि अब न्यूयॉर्क हो या नई दिल्ली, योग सिखाने और सीखने का मानक (Standard) एक जैसा होगा।

💡 मुख्य उद्देश्य:
योग की प्राचीन भारतीय विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों से जोड़ना, ताकि दुनिया भर में योग प्रशिक्षण की गुणवत्ता, सुरक्षा (Safety) और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।

रिपोर्ट के 3 प्रमुख स्तंभ (Key Pillars)

WHO की यह रिपोर्ट योग को केवल ‘व्यायाम’ नहीं, बल्कि ‘समग्र स्वास्थ्य विज्ञान’ मानती है। इसके तहत तीन प्रमुख बदलाव आएंगे:

  • मानकीकृत प्रशिक्षण: अब योग प्रशिक्षक (Instructor), योग थेरेपिस्ट और सहायक सेवा प्रदाताओं के लिए अलग-अलग स्तर और पाठ्यक्रम तय होंगे।
  • विज्ञान और दर्शन का संगम: पाठ्यक्रम में केवल आसन नहीं, बल्कि प्राणायाम, ध्यान, योग दर्शन के साथ-साथ ‘मॉडर्न एनाटॉमी’ (शरीर विज्ञान) का ज्ञान अनिवार्य होगा।
  • सुरक्षा पर जोर: गलत योग अभ्यास से होने वाली चोटों को रोकने के लिए ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ और रोगियों की स्क्रीनिंग पर विशेष जोर दिया गया है।

भारत की भूमिका और वैश्विक प्रभाव

इस रिपोर्ट की नींव 2016 में आयुष मंत्रालय और WHO के बीच हुए समझौते से पड़ी थी। दिसंबर 2025 में आयोजित दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विमोचन किया था।

🌎 भारतीय प्रशिक्षकों को फायदा:
इस रिपोर्ट के लागू होने से भारतीय योग प्रशिक्षकों की डिग्री और सर्टिफिकेशन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसानी से मान्यता मिलेगी। इससे ‘योग करियर’ को वैश्विक उड़ान मिलेगी।

WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने इसे पारंपरिक चिकित्सा के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया है। अब दुनिया के अन्य देश भी इस फ्रेमवर्क को अपनाकर योग को अपनी ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली’ (National Health System) का हिस्सा बना सकेंगे।

(स्रोत: WHO आधिकारिक रिपोर्ट ‘Training in Yoga’ एवं आयुष मंत्रालय विज्ञप्ति – 7 जनवरी 2026)

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