सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: क्या आयुष डॉक्टरों को मिलेगा ‘रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर’ (RMP) का दर्जा? केंद्र से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: क्या आयुष डॉक्टरों को मिलेगा ‘रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर’ (RMP) का दर्जा? केंद्र से जवाब तलब
नई दिल्ली | आयुष्य पथ विधि संवाददाता (14 जनवरी 2026)भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के लाखों आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी) चिकित्सकों के अधिकारों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के तीन प्रमुख मंत्रालयों—कानून मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय—को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में मांग की गई है कि आयुष डॉक्टरों को आधिकारिक तौर पर ‘रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर’ (RMP) घोषित किया जाए और उन्हें एलोपैथिक डॉक्टरों के समान अधिकार और सम्मान मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि आयुष चिकित्सकों को RMP दर्जा देने पर उनकी क्या नीति है? क्या उन्हें सीमित दायरे में आधुनिक दवाएं लिखने की अनुमति दी जा सकती है? जवाब दाखिल करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया गया है।
क्यों उठी यह मांग? (याचिकाकर्ता के तर्क)
याचिकाकर्ता का कहना है कि आयुष डॉक्टर अपनी डिग्री पूरी करने के बाद राज्य परिषदों में पंजीकृत होते हैं, फिर भी उन्हें RMP का पूर्ण दर्जा नहीं मिलता। इसके कारण:
- उन्हें मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने या कुछ राज्यों में प्रिस्क्रिप्शन लिखने में कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय का अधिकार) का उल्लंघन है।
- ग्रामीण भारत में जहाँ MBBS डॉक्टर नहीं जाना चाहते, वहाँ आयुष डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। उन्हें अधिकार न देना मरीजों के साथ अन्याय है।
विवाद क्या है?
यह मामला लंबे समय से विवादित रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और एलोपैथिक लॉबी इसका विरोध करती रही है। उनका तर्क है कि यह ‘मिश्रित चिकित्सा’ (Mixopathy) को बढ़ावा देगा, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। वहीं, आयुष पक्ष का कहना है कि वे एक ब्रिज कोर्स या ट्रेनिंग के माध्यम से प्राथमिक उपचार देने में सक्षम हैं।
फैसले का संभावित असर
यदि सुप्रीम कोर्ट आयुष डॉक्टरों के पक्ष में फैसला देता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे:
- देश के 8-9 लाख आयुष डॉक्टरों को सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने के नए अवसर मिलेंगे।
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार होगा, क्योंकि कानूनी डर खत्म होने से डॉक्टर खुलकर इलाज कर सकेंगे।
- आयुष चिकित्सा पद्धति को ‘वैकल्पिक’ के बजाय ‘मुख्यधारा’ का दर्जा मिलेगा।
अब सबकी नजरें 8 सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई पर हैं, जब केंद्र सरकार अपना हलफनामा दायर करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय इस मुद्दे पर एक राय रखते हैं या नहीं।
(स्रोत: सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और मीडिया रिपोर्ट्स – 14 जनवरी 2026)

