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BREAKING: NCISM को मिलीं नई अध्यक्ष प्रो. मनीषा कोटेकर जी – आयुष नियमन में बड़ा बदलाव (11 Dec 2025

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NCISM को मिलीं नई अध्यक्ष: प्रो.(डॉ.) मनीषा कोटेकर जी, आयुष नियमन में बड़ा बदलाव (संपादकीय विश्लेषण)

**आयुष्य पथ डिजिटल स्वास्थ्य न्यूज़ पोर्टल**

I. परिचय: नेतृत्व परिवर्तन और आयुष का भविष्य

भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) को अक्सर आयुष क्षेत्र का सर्वोच्च नियामक निकाय माना जाता है, जो शिक्षा, पाठ्यक्रम और चिकित्सा मानकों को नियंत्रित करता है। इसलिए, यहाँ का नेतृत्व परिवर्तन पूरे आयुष समुदाय और चिकित्सा के भविष्य को दिशा देता है।

एक महत्वपूर्ण घोषणा के अनुसार, प्रो. (डॉ.) मनीषा उपेंद्र कोटेकर जी ने दिनांक 11 दिसंबर 2025 को NCISM के नए चेयरपर्सन के रूप में पदभार संभाला है। यह नियुक्ति आयुष क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रशासनिक दक्षता के लिए नए युग की शुरुआत का संकेत है।


II. NCISM की नई टीम: कौन कहाँ?

डॉ. कोटेकर जी के नेतृत्व में, NCISM के अन्य प्रमुख बोर्डों ने भी 11 दिसंबर 2025 को अपने-अपने पदों का कार्यभार संभाला। यह नई टीम भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के लिए एक मजबूत और एकीकृत नियामक ढांचा तैयार करेगी:

  • आचार्य और पंजीकरण बोर्ड के अध्यक्ष: डॉ. सुश्रुत कनौजिया।
  • बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के अध्यक्ष: डॉ. अल्लमप्रभु गुडा।
  • यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड के अध्यक्ष: प्रोफेसर असीम अली खान।
  • चिकित्सा आंकलन एवं रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष: डॉ. मुकुल पटेल।

इस व्यापक पुनर्गठन में शामिल सभी गणमान्य सदस्यों के पास अपने-अपने क्षेत्रों में गहन अनुभव और विशेषज्ञता है, जो NCISM के कार्यों में अपेक्षित सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


III. संपादकीय विश्लेषण: प्रभाव और भविष्य की उम्मीदें

डॉ. मनीषा कोटेकर जी और उनकी नई टीम की नियुक्ति से आयुष क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलावों की उम्मीद है:

  1. शिक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार: नई टीम से उम्मीद है कि वह आयुष कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को और सख्त बनाएगी, जिससे पास होने वाले छात्र उच्च प्रशिक्षित और अनुभवी हों।
  2. मानकीकरण और पारदर्शिता: NCISM का प्राथमिक लक्ष्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों में मानकीकरण लाना है। नई टीम से नियामक प्रक्रियाओं (जैसे मान्यता और परीक्षा प्रणाली) में अधिक पारदर्शिता और गति लाने की अपेक्षा है।
  3. एकात्मिक चिकित्सा (Integrative Medicine) पर जोर: यह नेतृत्व परिवर्तन आयुष मंत्रालय के एकात्मिक चिकित्सा के मिशन को आगे बढ़ाएगा, जहाँ भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का आधुनिक चिकित्सा के साथ वैज्ञानिक एकीकरण किया जा सके।
  4. अनुसंधान और प्रमाणन: बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के नए अध्यक्ष डॉ. अल्लमप्रभु गुडा के साथ, आयुर्वेदिक अनुसंधान और प्रमाणन प्रक्रियाओं को गति मिल सकती है, जिससे भारतीय चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलेगी।

आयुष्य पथ का दृष्टिकोण:

आयुष्य पथ डिजिटल स्वास्थ्य न्यूज़ पोर्टल इस महत्वपूर्ण बदलाव का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि नई टीम आयुष क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे नकली दवाइयाँ और अप्रमाणित उपचार) का कुशलता से समाधान करेगी। हम भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के उत्थान के लिए उन्हें अपनी सेवाएं और मंच प्रदान करने के लिए तत्पर हैं।


IV. निष्कर्ष और आह्वान

NCISM में यह नेतृत्व परिवर्तन सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के लिए एक युग परिवर्तनकारी क्षण है। यह चिकित्सा के भविष्य को दिशा देगा, गुणवत्ता को बढ़ाएगा और आयुष को वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मजबूत स्थान दिलाएगा।

हम अपने सभी पाठकों से आग्रह करते हैं कि वे NCISM की आधिकारिक वेबसाइट और आयुष्य पथ को आगे के अपडेट्स और विश्लेषण के लिए फॉलो करते रहें।

📣 आधिकारिक पुष्टि और संपादकीय नोट

यह संपादकीय लेख NCISM के आधिकारिक सोशल मीडिया घोषणाओं पर आधारित है। NCISM की किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया या नियमन के विवरण के लिए, कृपया आयोग की वेबसाइट पर जारी किए गए नवीनतम गजट नोटिफिकेशन या प्रेस रिलीज़ को ही अंतिम पुष्टि मानें। यह लेख ‘आयुष्य पथ’ का विश्लेषण है।


संदर्भ और प्राथमिक स्रोत (References and Primary Sources)

  1. NCISM की आधिकारिक फेसबुक पेज पर घोषणा: लिंक
  2. अपलोड की गई स्क्रीनशॉट छवि: [Image Reference]
  3. डॉ. मुकुल पटेल की नियुक्ति पर इंस्टाग्राम पोस्ट: [Instagram Link]
  4. डॉ. सुश्रुत कनौजिया का उल्लेख NCISM दस्तावेजों में: लिंक
  5. प्रो. असीम अली खान की पृष्ठभूमि NCISM वेबसाइट और लिंक्डइन पर: [NCISM/LinkedIn Link]

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