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मध्य प्रदेश बनेगा ‘आयुर्वेद हब’: 8 नए सरकारी कॉलेजों को मंजूरी, आयुष्मान भारत में योग-आयुर्वेद शामिल करने की मांग तेज | MP Ayush News

मध्य प्रदेश बनेगा ‘आयुर्वेद हब’: 8 नए सरकारी कॉलेजों को मंजूरी, आयुष्मान भारत में योग-आयुर्वेद शामिल करने की मांग तेज | MP Ayush News

मध्य प्रदेश बनेगा ‘आयुर्वेद हब’: 8 नए सरकारी कॉलेजों को मंजूरी, आयुष्मान भारत में योग-आयुर्वेद शामिल करने की मांग तेज

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य को देश का ‘आयुर्वेद हब’ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। आयुष शिक्षा को सुदृढ़ करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से सरकार ने प्रदेश में 8 नए शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों (Government Ayurveda Colleges) की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अपनी सरकार के ‘विकास और सेवा के 2 वर्षों’ की बड़ी उपलब्धि बताया है। वहीं, आयुष मंत्री डॉ. इंदर सिंह परमार ने घोषणा की है कि इन महाविद्यालयों के खुलने से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

कहां खुलेंगे नए कॉलेज? (सत्र-वार विवरण)

सरकार ने इन कॉलेजों को दो चरणों में शुरू करने की योजना बनाई है, जिससे राज्य में आयुर्वेदिक डॉक्टरों की संख्या में 20% की वृद्धि होने का अनुमान है।

सत्र (Session)चयनित जिले
2024-25 (प्रथम चरण)नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट और सागर (5 कॉलेज)
2025-26 (द्वितीय चरण)झाबुआ, शुजालपुर और डिंडोरी (3 कॉलेज)

प्रत्येक महाविद्यालय में 60 से 100 सीटें होंगी और बीएएमएस (BAMS) कोर्स संचालित किए जाएंगे। इन संस्थानों का विकास पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में भी किया जा सकता है।

रोजगार के अवसर:
इन नए कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए 200 से अधिक फैकल्टी पदों (आयुर्वेदाचार्य, योग विशेषज्ञ, प्रोफेसर) पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

संसद में गूंजी मांग: ‘आयुष्मान भारत’ में शामिल हो आयुर्वेद

एक तरफ जहां बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नीतिगत स्तर पर भी बड़े बदलाव की मांग उठी है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने संसद में जोरदार तरीके से मांग रखी है कि केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ में एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को भी शामिल किया जाना चाहिए।

मांग के प्रमुख बिंदु:

  • समान अवसर: 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा कवर में मरीज को अपनी पसंद की चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद/योग) चुनने का अधिकार मिले।
  • पुराने कानून का अंत: अंग्रेजों के जमाने के ‘ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940’ को निरस्त कर एक नया ‘यूनिफॉर्म हेल्थकेयर कोड’ लागू किया जाए।
  • व्यापक प्रभाव: आयुष विभाग का मानना है कि यदि यह लागू होता है, तो 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त आयुर्वेदिक दवाएं और योग सत्र उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य में क्रांति आ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। उत्तराखंड के विशेषज्ञों ने भी इसी तर्ज पर मांग उठाई है, लेकिन मध्य प्रदेश इस मुहिम का नेतृत्व करता नजर आ रहा है।

(स्रोत: एमपी इन्फो, आयुष एमपी आधिकारिक हैंडल एवं दैनिक भास्कर/अमर उजाला रिपोर्ट्स – 29-31 दिसंबर 2025)

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