भारत और क्यूबा: आयुर्वेद और होम्योपैथी में सहयोग को नई ऊंचाई, आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल
भारत-क्यूबा ने आयुष, आयुर्वेद और होम्योपैथी में सहयोग को नई ऊंचाई दी: वैश्विक स्वास्थ्य के लिए ऐतिहासिक कदम
नई दिल्ली | आयुष्य पथ समाचार
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। दूसरे WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन समिट के दौरान भारत और क्यूबा के बीच पारंपरिक चिकित्सा एवं होम्योपैथी में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और क्यूबा गणराज्य की चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. फिडेला रेयेस ओबेडिएंटे ने की।
बैठक के 5 प्रमुख निर्णय
- फार्माकोपिया की मान्यता: क्यूबा में भारत की आधिकारिक ‘आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक फार्माकोपिया’ को मान्यता देने पर सहमति।
- बाजार पहुंच: क्यूबा में आयुष दवाओं के पंजीकरण और विपणन के लिए मजबूत नियामक ढांचे का निर्माण, जिससे भारतीय उत्पादों का निर्यात आसान होगा।
- क्षमता निर्माण: विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाओं का आयोजन।
- संस्थागत संबंध: भारत के AIIA और क्यूबा के UCMH विश्वविद्यालय के बीच शोध और फैकल्टी एक्सचेंज को बढ़ावा।
- संयुक्त कार्य समूह: जॉइंट वर्किंग ग्रुप की गतिविधियों की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय की गई।
पृष्ठभूमि और महत्व
इससे पहले भारत और क्यूबा ने आयुर्वेदिक सहयोग पर MoU का विस्तार किया है, जिसमें हवाना में पंचकर्म सेंटर और AYUSH चेयर की स्थापना शामिल है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह सहयोग आयुष को वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने की भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है।
इस बैठक में दोनों देशों ने संरचित, प्रमाण-आधारित आयुष सहयोग से सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।

