‘लाइक्स’ विज्ञान पर भारी: सोशल मीडिया हेल्थ टिप्स जानलेवा
‘लाइक्स’ के चक्कर में जा रही जान: सोशल मीडिया पर फैल रही ‘हेल्थ मिसइन्फॉर्मेशन’ बनी नई महामारी, डॉक्टर्स ने दी गंभीर चेतावनी
क्या आप भी इंस्टाग्राम रील देखकर ‘डिटॉक्स ड्रिंक’ पी रहे हैं? या फेसबुक पर पढ़कर अपनी बीपी-शुगर की दवा बंद कर दी है? अगर हां, तो सावधान हो जाएं। भारत के शीर्ष डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है: “सोशल मीडिया पर ‘लाइक्स’ अब ‘विज्ञान’ पर भारी पड़ रहे हैं, और इसकी कीमत लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं।”
11 फरवरी 2026 को जारी रिपोर्ट्स और चिकित्सा सम्मेलनों में यह बात सामने आई है कि वैक्सीन, डाइट, धूम्रपान और गंभीर बीमारियों (NCDs) को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी (Misinformation) अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।
खतरा: एल्गोरिदम को परवाह नहीं आपकी सेहत की
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) केवल ‘एंगेजमेंट’ (लाइक, शेयर, कमेंट) को बढ़ावा देते हैं। वैज्ञानिक तथ्य अक्सर बोरिंग होते हैं, जबकि “7 दिन में कैंसर ठीक करने वाले” चमत्कारी दावे सनसनीखेज होते हैं और तेजी से वायरल होते हैं।
“सोशल मीडिया पर सबसे सटीक जानकारी ऊपर नहीं आती, बल्कि वह जानकारी ऊपर आती है जिसकी ‘आवाज’ सबसे तेज होती है (Loudest Voices)। बिना किसी डिग्री वाले ‘वेलनेस कोच’ और ‘इन्फ्लुएंसर्स’ लाखों लोगों को गलत सलाह दे रहे हैं।”
केस स्टडीज: जब ऑनलाइन सलाह बनी जानलेवा
डॉक्टरों ने भारत के हालिया मामलों का हवाला देते हुए स्थिति की गंभीरता समझाई:
एक 36 वर्षीय व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘नेचुरल डिटॉक्स’ डाइट को फॉलो किया। नतीजा यह हुआ कि उसका क्रिएटिनिन लेवल 4.5 तक पहुंच गया और उसकी किडनी फेलियर की स्थिति बन गई।
एक मरीज को स्ट्रोक के लक्षण आए, लेकिन अस्पताल जाने के बजाय परिवार ने ऑनलाइन घरेलू नुस्खे आजमाए। इससे इलाज का ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour) निकल गया और मरीज को जीवन भर के लिए लकवा (Paralysis) मार गया।
इन 4 क्षेत्रों में सबसे ज्यादा झूठ
- वैक्सीन: एंटी-वैक्सीन कंटेंट के कारण लोग अपने बच्चों को जरूरी टीके नहीं लगवा रहे, जिससे पुरानी बीमारियां लौट रही हैं।
- चमत्कारी डाइट: वेट लॉस के लिए खतरनाक सप्लीमेंट्स और डिटॉक्स वॉटर, जो लिवर-किडनी को डैमेज कर रहे हैं।
- नशा: ई-सिगरेट (Vaping) और हुक्का को “सुरक्षित” बताकर युवाओं को गुमराह किया जा रहा है।
- गंभीर रोग: डायबिटीज और हार्ट पेशेंट्स को दवा छोड़कर “नेचुरल क्योर” लेने की सलाह दी जा रही है।
समाधान क्या है? (Expert Advice)
डॉक्टरों ने सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों से सख्त कदम उठाने की मांग की है:
- सख्त नियम: चीन की तर्ज पर भारत में भी स्वास्थ्य, कानून या वित्त पर सलाह देने के लिए संबंधित डिग्री होना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
- ASCI गाइडलाइंस: भारत में विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) के नियम हैं कि हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स अपनी योग्यता डिस्क्लोज करें, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा।
सोशल मीडिया पर कोई भी स्वास्थ्य टिप मानने से पहले तीन चीजें चेक करें:
- बताने वाले की डिग्री/योग्यता क्या है?
- क्या जानकारी का स्रोत (WHO/ICMR) दिया गया है?
- क्या यह दावा “बहुत अच्छा, बहुत जल्दी” (Too good to be true) लगता है?
याद रखें, गूगल या इंस्टाग्राम कभी भी आपके डॉक्टर की जगह नहीं ले सकते।
स्रोत: Times of India (11 Feb 2026) & Medical Systematic Reviews | संपादक: आयुष्य पथ डेस्क

