दिल्ली-NCR को प्रदूषण से बचाने का ‘ग्रीन प्लान’: हरियाणा में बनेंगे 500 ‘इको-वन’, कचरे के ढेर बनेंगे ऑक्सीजन हब | Ayushya Path
दिल्ली-NCR को प्रदूषण से बचाने का ‘ग्रीन प्लान’: हरियाणा में बनेंगे 500 ‘इको-वन’, कचरे के ढेर बनेंगे ऑक्सीजन हब
फरीदाबाद/नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (10 जनवरी 2026)दिल्ली-NCR की जहरीली हवा और कंक्रीट के जंगलों के बीच हरियाणा सरकार ने एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की है। राज्य सरकार ने ‘इको-वन’ (Eco-Van) परियोजना लॉन्च की है, जिसका लक्ष्य उन जमीनों को हरा-भरा बनाना है जो अब तक कचरे और गंदगी का घर थीं।
इस महाअभियान का शंखनाद फरीदाबाद से किया गया है। हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने घोषणा की है कि पुराने लैंडफिल और अनुपयोगी भूमि को अब ‘मिनी फॉरेस्ट’ (Mini Forests) में बदला जाएगा।
(वर्तमान में 12 वन बनकर तैयार)
क्या है ‘इको-वन’ मॉडल?
यह केवल पेड़ लगाने का अभियान नहीं है, बल्कि शहरों के बीच एक पूरा ‘इको-सिस्टम’ तैयार करने की योजना है। इको-वन में शामिल होंगे:
- घने वुडलैंड्स: ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों का सघन क्षेत्र।
- हर्बल पार्क: औषधीय पौधों का संरक्षण (आयुष और स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण)।
- जल निकाय: छोटे तालाब जो भूजल (Groundwater) को रिचार्ज करेंगे।
- जैव-विविधता: तितलियों, पक्षियों और छोटे जीवों के लिए प्राकृतिक आवास।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे ट्रैफिक आइलैंड्स, आवासीय सेक्टरों के पास पड़ी खाली जमीन और पुराने कूड़े के ढेरों (Landfills) पर विकसित किया जा रहा है। यानी गंदगी हटेगी और ऑक्सीजन मिलेगी।
बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग: प्रकृति से जुड़ेंगे
मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि इस परियोजना की आत्मा ‘जन-भागीदारी’ है।
- बुजुर्गों के लिए: उन्हें शोर-शराबे से दूर शांति और शुद्ध हवा का स्थान मिलेगा।
- महिलाओं के लिए: सुरक्षित और हरा-भरा वातावरण।
- बच्चों के लिए: वे किताबों से बाहर निकलकर प्रकृति को करीब से देख और सीख सकेंगे।
NCR के प्रदूषण पर सीधा प्रहार
चूंकि फरीदाबाद दिल्ली से सटा हुआ है, इसलिए यहां बनने वाले 500 इको-वन पूरे NCR की वायु गुणवत्ता सुधारने में ‘ग्रीन लंग्स’ (Green Lungs) का काम करेंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण संरक्षण विजन से प्रेरित है। फरीदाबाद में सफलता के बाद इसे पूरे हरियाणा में लागू किया जाएगा।
यह परियोजना साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो कचरे के ढेर को भी ‘नंदनवन’ में बदला जा सकता है।
(स्रोत: दैनिक जागरण, 9 जनवरी 2026 – मूल खबर पढ़ें)

