डायबिटीज: भारत की अर्थव्यवस्था पर ‘साइलेंट अटैक’, 2050 तक $11.4 ट्रिलियन के नुकसान का अनुमान
डायबिटीज: भारत की अर्थव्यवस्था पर ‘साइलेंट अटैक’, 2050 तक $11.4 ट्रिलियन के नुकसान का अनुमान
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (13 जनवरी 2026)डायबिटीज (मधुमेह) को अब तक केवल एक ‘लाइफस्टाइल बीमारी’ माना जाता था, लेकिन एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इसे भारत के लिए ‘आर्थिक आपातकाल’ (Economic Emergency) की तरह पेश किया है। प्रतिष्ठित जर्नल ‘Nature Medicine’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज के कारण भारत को भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2019 से 2050 के बीच डायबिटीज की वजह से भारत को कुल 11.4 ट्रिलियन डॉलर (US Dollars) का नुकसान होगा। इस मामले में भारत, चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
वैश्विक रैंकिंग: 1. अमेरिका ($16.5T) | 2. भारत ($11.4T) | 3. चीन ($11T)
पैसा कहाँ जा रहा है? (नुकसान का गणित)
यह भारी-भरकम राशि केवल अस्पतालों के बिल नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, नुकसान दो तरह का है:
- प्रत्यक्ष लागत (Direct Cost): दवाएं, इंसुलिन, अस्पताल में भर्ती होना और जांच का खर्च।
- अप्रत्यक्ष लागत (Indirect Cost): यह सबसे बड़ा हिस्सा है। युवा और कामकाजी लोगों का बीमार पड़ना, काम से छुट्टी (Absenteeism), कम उम्र में मृत्यु और परिवार के किसी सदस्य का देखभाल में समय देना—ये सब मिलकर देश की उत्पादकता (Productivity) को खत्म कर रहे हैं।
भारत के लिए चिंता की बात क्यों?
भारत को अक्सर ‘दुनिया की डायबिटीज राजधानी’ कहा जाता है। वर्तमान में यहाँ 7.7 करोड़ से अधिक मरीज हैं, जो 2045 तक बढ़कर 13.4 करोड़ होने का अनुमान है। सबसे डरावनी बात यह है कि यह बीमारी अब बुजुर्गों की नहीं, बल्कि 30-40 साल के कामकाजी युवाओं की बीमारी बन गई है, जिससे देश की वर्कफोर्स कमजोर हो रही है।
विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय की सलाह
मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डॉ. वी. मोहन का कहना है कि “आर्थिक तबाही से बचने का एक ही रास्ता है—रोकथाम (Prevention)।”
वहीं, आयुष मंत्रालय ने इस संकट से निपटने के लिए ‘इंटीग्रेटेड अप्रोच’ अपनाने पर जोर दिया है:
- आहार: करेला, जामुन की गुठली का चूर्ण, मेथी और गुड़मार का सेवन ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायक है।
- योग: मंडूकासन, सर्वांगासन और सूर्य नमस्कार पैंक्रियाज को सक्रिय रखते हैं।
- दिनचर्या: भोजन के बाद 15 मिनट वज्रासन में बैठना और नियमित 45 मिनट की सैर।
निष्कर्ष: डायबिटीज अब केवल एक व्यक्तिगत बीमारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है। यदि हमने आज अपनी जीवनशैली नहीं सुधारी, तो आने वाले कल में यह हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ सकती है। बचाव ही सबसे बड़ा निवेश है।
(स्रोत: Nature Medicine जर्नल, जनवरी 2026 और आयुष मंत्रालय की एडवायजरी)

