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दिल्ली की खांसी’ से बेहाल? एंटीबायोटिक्स नहीं, अपनाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खे: AIIA निदेशक की सलाह

‘दिल्ली की खांसी’ से बेहाल? एंटीबायोटिक्स नहीं, अपनाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खे: AIIA निदेशक की सलाह | Ayushya Path

‘दिल्ली की खांसी’ से बेहाल? एंटीबायोटिक्स नहीं, अपनाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खे: AIIA निदेशक की सलाह

दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण और बदलते मौसम ने एक नई स्वास्थ्य समस्या को जन्म दिया है, जिसे लोग अब ‘दिल्ली की खांसी’ (Delhi Cough) कहने लगे हैं। यह ऐसी जिद्दी खांसी है जो हफ्तों तक ठीक नहीं हो रही और न ही आम कफ सिरप का इस पर कोई असर हो रहा है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के निदेशक ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक्स खरीदकर न खाएं।

🚫 एंटीबायोटिक्स का खतरा:
AIIA निदेशक ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण या एलर्जी से होने वाली खांसी में एंटीबायोटिक्स बेअसर होती हैं। इनका अनावश्यक उपयोग (Overuse) न केवल शरीर को कमजोर करता है, बल्कि भविष्य में गंभीर बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता (Antibiotic Resistance) को भी खत्म कर देता है।

आयुर्वेद ही क्यों है बेहतर विकल्प?

आयुष मंत्रालय ने बताया कि जब हवा में जहर (Pollutants) घुला हो, तो हमें ‘लक्षणों’ को दबाने वाली नहीं, बल्कि ‘जड़’ (Root Cause) पर काम करने वाली चिकित्सा चाहिए।

🌿 आयुर्वेद का दृष्टिकोण:
  • इम्यूनिटी बूस्टर: आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां फेफड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं, जिससे शरीर खुद प्रदूषण के कणों से लड़ पाता है।
  • सूजन कम करना: प्राकृतिक औषधियां वायुमार्ग (Airways) की सूजन को कम करती हैं और संक्रमण को फैलने से रोकती हैं।
  • साइड इफेक्ट फ्री: ये उपाय लंबे समय तक लेने पर भी सुरक्षित हैं।

क्या उपाय अपनाएं?

मंत्रालय और विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली वालों को अपनी दिनचर्या में ये बदलाव लाने चाहिए:

  • मुलेठी और काली मिर्च: गले की खराश और सूखी खांसी के लिए मुलेठी चूसना या काली मिर्च शहद के साथ लेना रामबाण है।
  • गर्म पानी और भाप: दिन भर गुनगुना पानी पिएं और सोने से पहले भाप लें।
  • अदरक और तुलसी: इनकी चाय या काढ़ा फेफड़ों से बलगम निकालने में मदद करता है।

दिल्ली की हवा कब सुधरेगी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन अपनी सेहत की डोर आयुर्वेद के हाथों में देकर हम सुरक्षित जरूर रह सकते हैं।

(स्रोत: आयुष मंत्रालय आधिकारिक X पोस्ट (@moayush), दिनांक 8 जनवरी 2026 (पोस्ट ID: 2009198583644664187), संदर्भ: News18 India)

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