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अश्व संचालन आसन: वैज्ञानिक लाभ और विधि | योगाचार्य सुषमा

Ashwa Sanchalanasana: Scientific Analysis, Benefits and Guide by Yogacharya Sushma

अश्व संचालन आसन (Ashwa Sanchalanasana): आधुनिक विज्ञान और योग का अद्भुत संगम – एक संपूर्ण वैज्ञानिक विवेचन

नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026 (आयुष्य पथ योग डेस्क): योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर की जैव-यांत्रिकी (Biomechanics) और प्राण ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। सूर्य नमस्कार की बारह स्थितियों में से चौथी और नौवीं स्थिति—‘अश्व संचालन आसन’ (Ashwa Sanchalanasana)—का महत्व आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि में भी अत्यधिक बढ़ गया है।

आज के दौर में जब ‘सिटिंग इज द न्यू स्मोकिंग’ (Sitting is the new smoking) कहा जा रहा है, यह आसन उस ‘सेडेंटरी लाइफस्टाइल’ के दुष्प्रभावों को काटने के लिए एक सर्जिकल स्ट्राइक की तरह काम करता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आयुष मंत्रालय से सम्मानित और आयुष्य मन्दिरम् की वरिष्ठ योग विशेषज्ञ, योगाचार्य सुषमा इस आसन को आधुनिक रोगों का ‘रामबाण’ क्यों मानती हैं और विज्ञान इस पर क्या कहता है।

अश्व संचालन: नाम में छिपा है रहस्य

संस्कृत शब्द ‘अश्व’ का अर्थ है घोड़ा, ‘संचालन’ का अर्थ है गति देना और ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा। जिस प्रकार एक घोड़ा दौड़ने के लिए तैयार होते समय अपनी पिछली टांगों पर भार डालकर अगली टांगों को दिशा देता है, ठीक उसी प्रकार यह आसन शरीर को गति, शक्ति और स्थिरता प्रदान करता है। इसे अंग्रेजी में ‘Equestrian Pose’ या ‘Low Lunge’ भी कहा जाता है।


विशेषज्ञ दृष्टिकोण: योगाचार्य सुषमा, आयुष्य मन्दिरम्

योग के क्षेत्र में गहन अनुभव रखने वाली और आयुष्य मन्दिरम् संस्था के माध्यम से हजारों साधकों का मार्गदर्शन करने वाली योगाचार्य सुषमा का मानना है कि अश्व संचालन आसन केवल पैरों का व्यायाम नहीं है, बल्कि यह ‘मूलाधार’ और ‘स्वाधिष्ठान’ चक्र को जागृत करने की कुंजी है।

“आधुनिक जीवनशैली में हम अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं और शारीरिक रूप से हम घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं। इससे हमारी हिप्स (Hips) और पेल्विक क्षेत्र में तनाव जमा हो जाता है। अश्व संचालन आसन में जब हम पेल्विक को जमीन की ओर दबाते हैं, तो न केवल मांसपेशियां खुलती हैं, बल्कि दबी हुई भावनात्मक ग्रंथियां भी तनावमुक्त होती हैं। यह आसन शरीर में ‘अग्नि तत्व’ को बढ़ाता है, जिससे पाचन और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि होती है।”
— योगाचार्य सुषमा, आयुष्य मन्दिरम्

वैज्ञानिक विश्लेषण: शरीर के भीतर क्या घटित होता है? (Scientific Anatomy & Physiology)

आधुनिक काइनेसियोलॉजी (Kinesiology) और एनाटॉमी के अध्ययनों के आधार पर, इस आसन के प्रभाव को निम्नलिखित बिंदुओं में गहराई से समझा जा सकता है:

1. Psoas Muscle और ‘फाइट और फ्लाइट’ रिस्पॉन्स

अश्व संचालन आसन का सबसे गहरा प्रभाव Iliopsoas (Psoas Major) मांसपेशी पर पड़ता है। इसे “आत्मा की मांसपेशी” (Muscle of the Soul) भी कहा जाता है।

  • समस्या: जब हम डरते हैं या तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर सुरक्षा के लिए सिकुड़ता है, जिससे Psoas टाइट हो जाता है। लगातार बैठने से भी यह मांसपेशी छोटी हो जाती है, जिससे कमर दर्द (Lower Back Pain) होता है।
  • समाधान: अश्व संचालन में पीछे वाले पैर का खिंचाव (Extension) Psoas को उसकी पूरी लंबाई में खींचता है। यह खिंचाव मस्तिष्क को यह संकेत भेजता है कि “खतरा टल गया है”, जिससे Parasympathetic Nervous System सक्रिय होता है और शरीर रिलैक्स मोड में आता है।

2. क्वाड्रिसेप्स और ग्लूट्स का एक्टिवेशन (EMG Studies)

इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) अध्ययनों में पाया गया है कि स्क्वाट्स (Squats) की तुलना में ‘लंज पोज’ (Lunge Pose) में ग्लूटस मैक्सिमस (Gluteus Maximus) और क्वाड्रिसेप्स का संतुलन बेहतर होता है।

  • आगे वाले पैर पर 90 डिग्री का कोण Isometric Contraction (बिना हिले मांसपेशियों में तनाव) पैदा करता है, जो जोड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना घुटनों की स्थिरता (Knee Stability) बढ़ाता है।
  • यह आसन Proprioception (शरीर के संतुलन का बोध) को बढ़ाता है, जिससे गिरने या चोट लगने का खतरा कम होता है।

3. अंतःस्रावी ग्रंथियां और हार्मोनल स्वास्थ्य (Endocrine Health)

गर्दन को ऊपर उठाने और छाती को फैलाने से थायरॉइड (Thyroid) और पैराथायरॉइड ग्रंथियों पर हल्का खिंचाव आता है, जो उनके स्राव को संतुलित करता है। वहीं, पेल्विक क्षेत्र पर पड़ने वाला दबाव अंडाशय (Ovaries) और वृषण (Testes) में रक्त संचार बढ़ाता है। यह महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता और पुरुषों में प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक रूप से लाभकारी माना गया है।


चरणबद्ध विधि: सही तरीका क्या है? (Step-by-Step Guide)

एक सही आसन वह है जिसमें ‘स्थिरता’ और ‘सुख’ हो (स्थिरसुखम् आसनम्)। आयुष्य मन्दिरम् द्वारा सुझाई गई विधि इस प्रकार है:

  1. प्रारंभिक स्थिति: ताड़ासन में खड़े हों। श्वास छोड़ते हुए आगे झुकें और दोनों हथेलियों को पैरों के बगल में जमीन पर टिकाएं (हस्तपादासन)।
  2. विस्तार: श्वास भरते (Inhale) हुए अपना दायां पैर (Right Leg) जितना हो सके पीछे ले जाएं।
  3. संपर्क: दाएं पैर का घुटना और पंजा जमीन पर स्पर्श कराएं। ध्यान रहे, पंजा बाहर की ओर खिंचा हुआ हो।
  4. संतुलन: बायां पैर (Left Leg) दोनों हथेलियों के बीच में रहे। बायां घुटना और एड़ी एक सीधी रेखा में (90 डिग्री) होने चाहिए। घुटना पंजों से आगे नहीं निकलना चाहिए।
  5. अंतिम मुद्रा: कमर को नीचे की ओर दबाएं, छाती को आगे की ओर खोलें और गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं। दृष्टि (Drishti) भ्रूमध्य (दोनों भौहों के बीच) या आकाश की ओर रखें।
  6. श्वास प्रक्रिया: इस स्थिति में सामान्य रूप से गहरा श्वास लें। महसूस करें कि प्रत्येक श्वास के साथ छाती फैल रही है और प्रत्येक उच्छ्वास (Exhale) के साथ हिप्स जमीन की ओर जा रहे हैं।
  7. वापसी: श्वास छोड़ते हुए पीछे वाले पैर को आगे लाएं और पुनः हस्तपादासन में आएं। फिर दूसरे पैर से यही प्रक्रिया दोहराएं।

सावधानियां और निषेध (Contraindications)

हालांकि यह आसन सुरक्षित है, लेकिन योगाचार्य सुषमा निम्नलिखित स्थितियों में सावधानी बरतने की सलाह देती हैं:

  • घुटने की चोट: यदि घुटने में दर्द है, तो पीछे वाले घुटने के नीचे एक मोटा कंबल या कुशन रखें।
  • गर्दन दर्द (Cervical): गर्दन को बहुत पीछे न झुकाएं, दृष्टि सामने रखें ताकि सर्वाइकल स्पाइन पर दबाव न पड़े।
  • उच्च रक्तचाप: यदि आपको हाई बीपी या चक्कर आने की समस्या है, तो ऊपर देखने के बजाय सामने देखें।

निष्कर्ष: आधुनिक युग की संजीवनी

अश्व संचालन आसन केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे नर्वस सिस्टम को रिबूट करने का एक बटन है। यह हमें घोड़े जैसी गतिशीलता और पर्वत जैसी स्थिरता एक साथ प्रदान करता है।

आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और आयुष्य मन्दिरम् जैसी संस्थाओं के प्रयासों से आज योग को वैज्ञानिक आधार मिल रहा है। यदि आप अपनी दिनचर्या में प्रतिदिन केवल 3 से 5 मिनट इस आसन को देते हैं, तो आप न केवल कमर दर्द और तनाव से मुक्त हो सकते हैं, बल्कि एक ऊर्जावान जीवन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

(अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।)


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