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आंध्र प्रदेश: 13 साल से कम बच्चों के सोशल मीडिया पर पूर्ण बैन | Ayushya Path

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बाल मानसिक स्वास्थ्य और सरकारी नीतियां

ऐतिहासिक फैसला: आंध्र प्रदेश में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन, मानसिक स्वास्थ्य को बचाने की बड़ी पहल

अमरावती / नई दिल्ली | 07 मार्च, 2026 | रिपोर्ट: आयुष्य पथ ब्यूरो

बच्चों में बढ़ती ‘स्क्रीन एडिक्शन’ और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ आंध्र प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध (Age-Based Restriction) लगाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह फैसला बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन, स्लीप डिसऑर्डर और एकाग्रता की कमी जैसी गंभीर होती ‘मौन महामारी’ को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

“बचपन स्क्रीन पर नहीं, मैदान में बीतना चाहिए”

आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री श्री बोतसा सत्यनारायण ने इस फैसले की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि शॉर्ट वीडियो, रील्स और सोशल मीडिया की लत ने बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है।

“हमारे बच्चे पढ़ाई और खेल के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर घंटों बिता रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहें। यह प्रतिबंध स्कूलों में सख्ती से लागू किया जाएगा।” – शिक्षा मंत्री, आंध्र प्रदेश

🚫 सोशल मीडिया बैन: मुख्य नियम और क्रियान्वयन

उम्र सीमा13 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चे (कक्षा 8 तक)।
प्रतिबंधित प्लेटफॉर्मइंस्टाग्राम, यूट्यूब शॉर्ट्स, फेसबुक, X (ट्विटर), स्नैपचैट आदि।
लागू करने का तरीका
  • स्कूलों में मोबाइल फोन लाने पर सख्त पाबंदी।
  • पैरेंट्स के लिए अनिवार्य ‘डिजिटल हाइजीन’ वर्कशॉप।
  • स्कूल असेंबली में रोजाना 5-10 मिनट ‘डिजिटल हेल्थ’ पर चर्चा।
प्रभावराज्य के 1.2 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों को सीधा लाभ।

चिकित्सा विशेषज्ञों ने किया फैसले का स्वागत

मनोचिकित्सकों और बाल रोग विशेषज्ञों ने इस फैसले को ‘समय की सबसे बड़ी मांग’ बताया है। शॉर्ट वीडियो बच्चों के दिमाग में जो ‘डोपामाइन लूप’ (Dopamine Loop) बनाते हैं, वह उनके मानसिक विकास को अवरुद्ध कर देता है।

  • डॉ. रमेश कुमार (बाल मनोचिकित्सक): “अध्ययनों से पता चला है कि 10-13 साल के बच्चों में सोशल मीडिया उपयोग से एंग्जायटी 40% और स्लीप डिसऑर्डर 55% तक बढ़ जाता है। आंध्र प्रदेश ने देश के लिए एक मिसाल कायम की है।”
  • डॉ. अनिता रेड्डी (चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट): “यह बैन बच्चों को उनका खोया हुआ बचपन वापस लौटाने जैसा है।”

अन्य राज्यों के लिए एक सबक

जहाँ महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्कूलों में मोबाइल प्रतिबंध की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं आंध्र प्रदेश ने स्पष्ट ‘उम्र-आधारित प्रतिबंध’ लगाकर पूरे देश को एक दिशा दिखाई है। केंद्र सरकार के IT Rules 2021 और POCSO एक्ट के तहत भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर जोर दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह अब तक का सबसे कड़ा कदम है।

अभिभावकों और शिक्षकों के सहयोग के बिना यह पहल अधूरी है। आइए, बच्चों को आभासी दुनिया की कैद से निकालकर वास्तविक दुनिया की सुंदरता से परिचित कराएं।

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