टीबी व प्रदूषण: AIIA नई दिल्ली का विशेष कैंप, आयुर्वेद से इलाज | Ayush Path
टीबी के खिलाफ जंग: AIIA, नई दिल्ली का ऐतिहासिक कदम – प्रदूषण और ‘लेटेंट टीबी’ पर महा-अभियान का समापन
नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026 (आयुष्य पथ न्यूज): भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ‘क्षय रोग’ (Tuberculosis – TB) को जड़ से मिटाने के लिए आयुर्वेद अब एक सशक्त भूमिका में है। इसी कड़ी में, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने एक विशेष पहल की है।
संस्थान के कायचिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित चार दिवसीय (28 से 31 जनवरी 2026) फ्री मेडिकल कैंप और वर्कशॉप का आज समापन हुआ। यह विशेष कार्यक्रम वायु प्रदूषण और ‘लेटेंट टीबी’ (Latent TB Infection – LTBI) के बीच के खतरनाक संबंध और आयुर्वेद द्वारा इसके प्रबंधन पर केंद्रित था।
PHI प्रोजेक्ट: लेटेंट टीबी पर आयुर्वेद का प्रहार
यह आयोजन ‘PHI प्रोजेक्ट’ (Promotion of Ayurvedic Medicines and Rasayana Therapy for the Management of Latent Tuberculosis) के तहत किया गया। AIIA देश का पहला ऐसा संस्थान है जिसने MoA (Memorandum of Agreement) द्वारा वित्तपोषित इस प्रोजेक्ट के तहत लेटेंट टीबी के लिए आयुर्वेदिक प्रबंधन लागू किया है।
इस कैंप के मुख्य आकर्षण रहे:
- जागरूकता सामग्री: प्रदूषण और LTBI पर विशेष बुकलेट और पैंफलेट्स की लॉन्चिंग।
- निशुल्क वितरण: मरीजों को फ्री ‘काढ़ा’ और आयुर्वेदिक औषधियां बांटी गईं।
- विशेषज्ञ सत्र: डॉक्टरों और शोधकर्ताओं द्वारा मरीजों की जांच और उन्हें प्रदूषण से बचने की ट्रेनिंग दी गई।
खतरे की घंटी: प्रदूषण कैसे जगा रहा है ‘सोई हुई टीबी’?
कैंप के दौरान विशेषज्ञों ने एक चिंताजनक तथ्य पर प्रकाश डाला। हालिया शोध बताते हैं कि वायु प्रदूषण (PM2.5, PM10) केवल फेफड़ों को कमजोर नहीं करता, बल्कि शरीर में छिपे हुए (Latent) टीबी बैक्टीरिया को सक्रिय कर देता है।
“हर 10 μg/m³ PM2.5 की वृद्धि से टीबी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। भारत के शहरी और स्लम इलाकों में जहां प्रदूषण अधिक है, वहां टीबी का खतरा 5 गुना ज्यादा है। यहां तक कि इंडोर प्रदूषण (चूल्हे का धुआं) भी 26% संक्रमणों का कारण है।”
भारत में टीबी की स्थिति: एक नजर आंकड़ों पर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के 2022-2025 के आंकड़े बताते हैं कि लड़ाई अभी लंबी है:
- वैश्विक हिस्सेदारी: 2023-24 में दुनिया के कुल नए टीबी मामलों का 26% अकेले भारत में दर्ज किया गया।
- लेटेंट टीबी का बोझ: भारत की 15 वर्ष से ऊपर की 31% आबादी लेटेंट टीबी से संक्रमित है। यह संक्रमण बिना लक्षण वाला होता है, लेकिन प्रदूषण या कमजोर इम्यूनिटी इसे जानलेवा बना सकती है।
- राहत की खबर: हालांकि, 2015 के मुकाबले टीबी की घटनाओं में 16-21% और मौतों में 18% की कमी आई है।
समाधान: आयुर्वेद और ‘रसायन थेरेपी’
AIIA के विशेषज्ञों के अनुसार, लेटेंट टीबी को सक्रिय होने से रोकने में आयुर्वेद की ‘रसायन थेरेपी’ (जैसे अश्वगंधा, च्यवनप्राश, पिप्पली आदि) बेहद कारगर है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को इतना बढ़ा देती है कि बैक्टीरिया हावी नहीं हो पाते।
जनता के लिए अपील: #TBHaregaDeshJeetega
सरकार और AIIA ने अपील की है कि यदि आपको लगातार खांसी, बुखार या वजन घटने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच कराएं। टीबी अब लाइलाज नहीं है, और आयुर्वेद के साथ इसे और प्रभावी ढंग से हराया जा सकता है।
स्वच्छ हवा, सही पोषण और आयुर्वेद का साथ – यही है टीबी मुक्त भारत का रास्ता।
रिपोर्ट: आयुष्य पथ न्यूज डेस्क | स्थान: नई दिल्ली
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