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कैंसर का कहर: भारतीय महिलाओं में 13% बढ़े ब्रेस्ट कैंसर के मामले | NCRP रिपोर्ट

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Rising Cancer Cases in Indian Women: NCRP 2026 Data Analysis

खतरे की घंटी: भारतीय महिलाओं में स्तन, गर्भाशय और अंडाशय कैंसर में विस्फोटक वृद्धि – NCRP के चौंकाने वाले आंकड़े

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों ने देश भर में खतरे की घंटी बजा दी है। पिछले 5 वर्षों (2019-2024) में महिलाओं में होने वाले तीन प्रमुख कैंसर—स्तन (Breast), गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) और अंडाशय (Ovary)—के मामलों में खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है।

ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि यह बताते हैं कि जागरूकता की कमी और बदलती जीवनशैली (Lifestyle) कैसे महिलाओं के स्वास्थ्य को दीमक की तरह खा रही है।

आंकड़ों का आईना: कहां खड़ा है भारत?

NCRP और ICMR के सहयोग से तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति भयावह है:

1. स्तन कैंसर (Breast Cancer) – सबसे बड़ा हत्यारा

  • वृद्धि: 2019 में 2.13 लाख मामले थे, जो 2024 में बढ़कर 2.4 लाख हो गए (13% की छलांग)।
  • मौतें: सालाना 1 लाख से अधिक महिलाएं जान गंवा रही हैं।
  • खतरा: हर 4 मिनट में एक भारतीय महिला को ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोस हो रहा है। शहरी महिलाओं में यह सबसे आम है।

2. गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) – रोके जाने योग्य फिर भी घातक

  • वृद्धि: नए मामले 79,000 के पार।
  • हॉटस्पॉट: पूर्वोत्तर भारत (असम, मिजोरम) और उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में स्थिति सबसे खराब है।
  • विडंबना: यह एकमात्र ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सीन (HPV) से पूरी तरह रोका जा सकता है, फिर भी जागरूकता न होने से मौतें बढ़ रही हैं।

3. अंडाशय कैंसर (Ovarian Cancer) – ‘साइलेंट किलर’

  • वृद्धि: मामलों में लगभग 10% की वृद्धि
  • चुनौती: इसके शुरुआती लक्षण (पेट फूलना, गैस) बहुत सामान्य होते हैं, जिससे 70% महिलाएं तब डॉक्टर के पास पहुंचती हैं जब कैंसर स्टेज 3 या 4 में होता है।

क्यों बढ़ रहा है कैंसर? (Root Causes)

एम्स (AIIMS) और टाटा मेमोरियल सेंटर के विशेषज्ञों ने इसके पीछे कई कारण गिनाए हैं:

  • देर से डायग्नोसिस: भारत में 60% से अधिक कैंसर के मामले एडवांस स्टेज में पकड़े जाते हैं, जब इलाज मुश्किल हो जाता है।
  • शहरी जीवनशैली: देर से शादी, बच्चों को स्तनपान न कराना, मोटापा, तनाव और प्रोसेस्ड फूड (जंक फूड) का सेवन।
  • स्क्रीनिंग का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में मैमोग्राफी और पैप स्मियर टेस्ट की सुविधाएं न के बराबर हैं।
“कैंसर अब बुढ़ापे की बीमारी नहीं रही। हम 30 से 40 साल की महिलाओं में भी ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर देख रहे हैं। इसका एकमात्र समाधान ‘अर्ली डिटेक्शन’ (शुरुआती जांच) है।”
— डॉ. सी.एस. प्रभु, टाटा मेमोरियल सेंटर

बचाव ही इलाज है: क्या करें महिलाएं?

विशेषज्ञों ने महिलाओं के लिए एक ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ सुझाया है:

  1. सेल्फ एग्जामिनेशन: हर महीने पीरियड्स के बाद स्तनों की खुद जांच करें। कोई भी गांठ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  2. HPV वैक्सीन: 9 से 14 साल की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन जरूर लगवाएं।
  3. पैप स्मियर टेस्ट: 30 साल के बाद हर 3 साल में एक बार यह टेस्ट जरूर कराएं।
  4. जीवनशैली सुधारें: वजन नियंत्रित रखें, रोजाना 30 मिनट व्यायाम करें और शराब-धूम्रपान से दूर रहें।

सरकार की पहल

बजट 2026 में कैंसर की 3 जीवनरक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाकर सरकार ने इलाज सस्ता करने की कोशिश की है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक गांव-गांव में स्क्रीनिंग कैंप नहीं लगेंगे, तब तक इन आंकड़ों को कम करना मुश्किल होगा।

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रिपोर्ट: आयुष्य पथ हेल्थ डेस्क | स्रोत: NCRP/ICMR 2024-25 रिपोर्ट

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